शोध, नवाचार और भविष्य की जरूरतों पर ध्यान दें विश्वविद्यालयः राज्यपाल
राज्यपाल ने निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ बैठक में गुणवत्ता, रोजगार, पेटेंट के व्यावसायीकरण और उद्योग अकादमिक सहयोग पर दिया जोर
देहरादून । राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ;से निद्ध ने गुरुवार को लोक भवन में उत्तराखंड के स्व वित्तपोषित निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ आयोजित दूसरे चरण की बैठक में विश्वविद्यालयों को शोध, नवाचार और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। बैठक में 14 विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने प्रतिभाग किया। बैठक में कुलपतियों ने अपने अपने विश्वविद्यालयों की उपलब्धियों, भावी योजनाओं और चुनौतियों की जानकारी राज्यपाल को दी। इस दौरान अनुसंधान को बढ़ावा देने, पेटेंट संस्कृति विकसित करने, पेटेंट के व्यावसायीकरण, उद्योग और अकादमिक क्षेत्र के बीच सहयोग, राष्ट्रीय स्तर पर साझा शोध व्यवस्था तथा विश्वविद्यालयों के बीच समन्वय बढ़ाने से संबंधित महत्वपूर्ण सुझाव भी रखे गए। राज्यपाल ने कहा कि विद्यार्थियों को केवल डिग्री प्रदान करना ही विश्वविद्यालयों का उद्देश्य नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें रोजगार, उद्योग, समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए पूरी तरह सक्षम बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप युवाओं को तैयार करने की जिम्मेदारी उच्च शिक्षण संस्थानों की है। विश्वविद्यालय नई शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था को आगे बढ़ाते हुए विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करें। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं को सही दिशा देना सबसे बड़ी चुनौती है। नशे जैसी सामाजिक चुनौतियों से निपटने के साथ ही युवाओं को नशामुक्त और सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराना आवश्यक है। विश्वविद्यालय विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, संस्कार, परंपराओं और चरित्र निर्माण को भी प्राथमिकता दें। राज्यपाल ने कहा कि 21वीं सदी में शिक्षा के सामने पर्यावरण संरक्षण के साथ मेटावर्स, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष एवं साइबर तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी नई तकनीकों की चुनौतियां भी हैं। विश्वविद्यालयों को इन क्षेत्रों में अध्ययन और अनुसंधान को बढ़ावा देना होगा। उन्होंने शोध, प्रकाशन और शोध उद्धरण पर विशेष ध्यान देने के साथ ही पेटेंट को केवल दर्ज कराने तक सीमित न रखते हुए उनके व्यावसायीकरण की दिशा में भी काम करने को कहा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों का मुख्य लक्ष्य शिक्षा की गुणवत्ता, विद्यार्थियों का चरित्र निर्माण और उन्हें भविष्य के लिए तैयार करना होना चाहिए। राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों को राज्य की आवश्यकताओं और संभावनाओं के अनुरूप शोध के विषय चिन्हित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे विषयों पर शोध किया जाए, जो उत्तराखंड के विकास में प्रत्यक्ष योगदान दे सकें। उन्होंने विश्वविद्यालयों को अपनी पहचान और विरासत को संरक्षित करने के लिए संस्थापक और विश्वविद्यालय के इतिहास पर पुस्तक प्रकाशित करने, विश्वविद्यालय की यात्रा पर फिल्म बनाने तथा कॉफी टेबल पुस्तक तैयार करने की दिशा में भी कार्य करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि राज्य के सभी विश्वविद्यालय आपसी सहयोग और समन्वय से मजबूत अकादमिक और शोध व्यवस्था विकसित करें। विश्वविद्यालयों की उपलब्धियों का वास्तविक महत्व तभी है, जब उनका लाभ विद्यार्थियों, समाज, उद्योग और प्रदेश के विकास तक पहुंचे। बैठक में राज्यपाल के विधि परामर्शी कौशल किशोर शुक्ल, उच्च शिक्षा सचिव डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम, राज्यपाल की अपर सचिव रीना जोशी सहित जिज्ञासा विश्वविद्यालय सेलाकुई, पतंजलि विश्वविद्यालय हरिद्वार, मदरहुड विश्वविद्यालय रुड़की, महाराजा अग्रसेन हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय पोखड़ा पौड़ी गढ़वाल, भगवंत ग्लोबल विश्वविद्यालय कोटद्वार, स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय देहरादून, सूरजमल विश्वविद्यालय किच्छा, देवभूमि विश्वविद्यालय देहरादून, आम्रपाली विश्वविद्यालय हल्द्वानी, माइंड पावर विश्वविद्यालय भीमताल, माया देवी विश्वविद्यालय सेलाकुई, श्रीमती मंजीरा देवी विश्वविद्यालय उत्तरकाशी, नॉर्थ वेस्ट हिमालयाज विश्वविद्यालय धारकोट देहरादून तथा फोनिक्स विश्वविद्यालय रुड़की के कुलपति उपस्थित रहे।
