September 26, 2026

Uttaranchal Darpan

Hindi Newsportal

फर्जी दस्तावेजों से प्रमाण पत्र बनवाने का खुलासा,10 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज

गदरपुर । तहसील गदरपुर क्षेत्र में कूटरचित अभिलेखों के आधार पर स्थायी निवास, जाति एवं अन्य प्रमाण पत्र बनवाने के मामले में प्रशासनिक जांच के बाद पांच प्रकरण सामने आए हैं। जांच के दौरान आधार कार्ड, राशन कार्ड, खतौनी, परिवार रजिस्टर, बिजली बिल समेत अन्य दस्तावेजों के सत्यापन में विसंगतियां पाए जाने की बात सामने आई है। मामले में 10 लोगों के खिलाफ कोतवाली गदरपुर में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने शुभम हुड़िया और निखिल वर्मा को गिरफ्रतार किया है। प्रशासनिक जांच के दौरान प्रमाण पत्रों के लिए लगाए गए दस्तावेजों का संबंधित गांवों के राजस्व अभिलेखों, राशन कार्ड, परिवार रजिस्टर और बिजली कनेक्शन से मिलान कराया गया। सत्यापन में कुछ दस्तावेजों में दर्ज नाम, पते और पारिवारिक विवरण सरकारी अभिलेखों से मेल नहीं खाए। जांच रिपोर्ट में कुछ दस्तावेजों में दूसरे व्यक्तियों के नाम, पते और पारिवारिक विवरण इस्तेमाल किए जाने का भी उल्लेख है। जांच में प्रियांशु गुप्ता, कुमारी वैष्णवी सिंह और कुमारी अवंतिका दास समेत अन्य प्रकरणों से जुड़े दस्तावेजों की प्रमाणिकता पर सवाल सामने आए। संबंधित अभिलेखों के सत्यापन के बाद गलत पाए गए प्रमाण पत्रों को निरस्त करने की कार्रवाई की गई। प्रशासन ने प्रमाण पत्रों के लिए लगाए गए दस्तावेजों में दर्ज जानकारी के अलग अलग सरकारी रिकॉर्ड से मिलान की भी जांच की। कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और उनका इस्तेमाल कर प्रमाण पत्र हासिल करने के आरोप में शुभम हुड़िया, निखिल वर्मा, प्रमोद सैनी, शेखर अरोरा, लवी, प्रियांशु गुप्ता, कुमारी वैष्णवी सिंह, कुमारी अवंतिका दास, कुमारी बनामी कुमारी और प्रभात चौधरी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने नामजद आरोपियों में से शुभम हुड़िया और निखिल वर्मा को गिरफ्रतार किया है। प्रकरण की गंभीरता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर तैयार किए गए प्रमाण पत्रों का संबंध एमबीबीएस प्रवेश से जुड़ा बताया जा रहा है। प्रशासनिक जांच में दस्तावेजों की प्रमाणिकता पर सवाल सामने आने के बाद पुलिस स्तर पर भी मामले की जांच की जा रही है। मामला सामने आने के बाद तहसील स्तर पर प्रमाण पत्र जारी करने से पहले होने वाली सत्यापन प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। प्रशासन यह जांच कर रहा है कि संबंधित दस्तावेज प्रमाण पत्र जारी होने से पहले किन स्तरों पर सत्यापित किए गए। दस्तावेज तैयार करने से लेकर उनके सत्यापन और प्रमाण पत्र जारी होने तक की प्रक्रिया की भी जांच की जा रही है। उप जिलाधिकारी अमृता शर्मा ने बताया कि प्रकरण में संबंधित राजस्व कर्मियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पटवारी सरताज अली के स्तर से जुड़े तथ्यों की विभागीय जांच कराई जाएगी। इस संबंध में जिलाधिकारी को रिपोर्ट भेजी जाएगी और रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आने पर संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *