August 21, 2026

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विजिलेंस को बिना गिरफ्तारी लौटना पड़ा : सितारगंज तहसील में 20 घंटे चला हाई वोल्टेज ड्रामा

पूरी रात बंधक रही विजिलेंस टीम
सितारगंज (उद संवाददाता)। तहसील सितारगंज में कथित रिश्वतखोरी के मामले ने बुधवार दोपहर से गुरुवार सुबह तक ऐसा हाई वोल्टेज घटनाक्रम देखा, जिसने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। विजिलेंस की ट्रैप कार्रवाई के बाद हिरासत में लिए गए वरिष्ठ सहायक और संग्रह अमीन को राजस्व कर्मचारियों के जबरदस्त विरोध, प्रशासनिक हस्तक्षेप और करीब 20 घंटे तक चले गतिरोध के बाद गुरुवार सुबह मुक्त करना पड़ा। इसके बाद विजिलेंस टीम भारी पुलिस सुरक्षा के बीच बिना दोनों कर्मचारियों को साथ लिए तहसील परिसर से लौट गई। पूरे घटनाक्रम के बाद अब मामला जांच के दायरे में है और दोनों पक्ष अपने अपने दावे कर रहे हैं। बुधवार दोपहर बाद सतर्कता अधिष्ठान हल्द्वानी की टीम ने किसान की शिकायत पर तहसील परिसर में ट्रैप कार्रवाई करते हुए वरिष्ठ सहायक भूपेंद्र सिंह राणा और संग्रह अमीन मदन लाल शर्मा को कथित रिश्वत लेने के आरोप में हिरासत में लिया था। कार्रवाई की सूचना फैलते ही तहसील कर्मचारियों में भारी आक्रोश फैल गया। कर्मचारियों ने तत्काल कामकाज बंद कर तहसील परिसर में धरना शुरू कर दिया और विजिलेंस कार्रवाई का विरोध करते हुए टीम को परिसर से बाहर नहीं जाने दिया। शाम होते होते विरोध प्रदर्शन उग्र हो गया। जिलेभर से राजस्व कर्मचारी सितारगंज पहुंचने लगे। वहीं वरिष्ठ सहायक भूपेंद्र सिंह राणा के गांव से भी बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिजन तहसील पहुंच गए और कर्मचारियों के समर्थन में आंदोलन में शामिल हो गए। देखते ही देखते तहसील परिसर पुलिस छावनी में तब्दील हो गया। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। पूरी रात विजिलेंस टीम तहसील परिसर में ही रही। इस दौरान कर्मचारी संगठन कार्रवाई को अवैध बताते हुए दोनों कर्मचारियों को छोड़ने की मांग पर अड़े रहे। वहीं विजिलेंस टीम अपनी कार्रवाई को सही ठहराते हुए आगे की प्रक्रिया पूरी करने पर जोर देती रही। इससे पूरे परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। टीम को कर्मचारियों ने पूरी रात बंधक बनाये रखा। गुरुवार सुबह उपजिलाधिकारी तुषार सैनी तहसील पहुंचे। उन्होंने राजस्व विभाग के अधिकारियों, कर्मचारी नेताओं और विजिलेंस अधिकारियों के साथ लंबी वार्ता की। मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों तक पहुंचाई गई और कई दौर की बातचीत के बाद गतिरोध समाप्त करने पर सहमति बनी। वार्ता के बाद विजिलेंस टीम ने हिरासत में लिए गए वरिष्ठ सहायक भूपेंद्र सिंह राणा और संग्रह अमीन मदन लाल शर्मा को मुक्त कर दिया। इसके बाद भारी पुलिस सुरक्षा के बीच विजिलेंस टीम तहसील परिसर से रवाना हो गई। उपजिलाधिकारी तुषार सैनी ने बताया कि विभागीय अधिकारियों ने विजिलेंस टीम को स्पष्ट किया कि जिस धनराशि को रिश्वत बताया जा रहा था, वह राजस्व विभाग की वैधानिक ऋण वसूली प्रक्रिया के तहत प्राप्त की गई सरकारी राशि थी। उन्होंने कहा कि विभागीय कार्यप्रणाली की पूरी जानकारी नहीं होने के कारण कार्रवाई को अलग नजरिए से देखा गया। पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट शासन और उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है तथा आगे की कार्रवाई सक्षम स्तर के निर्देशों के अनुसार होगी। दरअसल सतर्कता अधिष्ठान के निदेशक डॉ. वी. मुरुगेशन के अनुसार एक किसान ने शिकायत दर्ज कराई थी कि तहसील सितारगंज में तैनात वरिष्ठ सहायक भूपेंद्र सिंह राणा और संग्रह अमीन मदन लाल शर्मा उसके कार्य के बदले रिश्वत मांग रहे हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि भूमि को कुर्की आदेश से मुक्त कराने, बंधनमुक्त करने तथा किसान क्रेडिट कार्ड ऋण से संबंधित रिकवरी प्रमाणपत्र समाप्त कराने के एवज में संग्रह अमीन ने 10 हजार और वरिष्ठ सहायक ने छह हजार रुपये की मांग की थी। शिकायत के सत्यापन के बाद पुलिस अधीक्षक सतर्कता अधिष्ठान हल्द्वानी के निर्देशन में ट्रैप टीम गठित की गई। योजना के तहत शिकायतकर्ता को आरोपियों के पास भेजा गया। विजिलेंस का दावा है कि शिकायतकर्ता द्वारा रकम देने के दौरान संग्रह अमीन को आठ हजार रुपये तथा वरिष्ठ सहायक को छह हजार रुपये लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया गया था। विजिलेंस कार्रवाई के विरोध में गुरुवार को भी राजस्व कर्मचारियों का आंदोलन जारी रहा। कर्मचारियों ने तहसील कार्यालय पर ताला जड़कर अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया। प्रमाणपत्र, नामांतरण, राजस्व अभिलेखों सहित सभी प्रशासनिक कार्य पूरी तरह ठप रहे, जिससे दूरदराज से आए लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। आंदोलन के बीच पूर्व विधायक प्रेम सिंह राणा और भाजपा जिलाध्यक्ष कमल जिंदल भी तहसील पहुंचे। उन्होंने आंदोलनरत कर्मचारियों से बातचीत कर उनकी बात सुनी और मामले को उच्च स्तर पर उठाने का आश्वासन दिया। कर्मचारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को जिलेभर में और व्यापक बनाया जाएगा।


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