August 14, 2026

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उत्तराखंड में तीन लाख से अधिक महिलाएं बनीं लखपति

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड में महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। प्रदेश में लखपति दीदियों की संख्या तीन लाख तीन हजार 696 के आंकड़े को पार कर चुकी है। अब वित्तीय वर्ष 2026 27 में एक लाख 12 हजार महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। संबंधित विभाग निर्धारित अवधि से पहले लक्ष्य हासिल करने के लिए जुट गए हैं। धामी सरकार ने उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत नारी सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई योजनाएं संचालित की हैं। इसी क्रम में नवंबर 2022 से लखपति दीदी योजना शुरू की गई। सरकार के अनुसार योजना के तहत हर वर्ष निर्धारित लक्ष्य को समय से पहले हासिल किया गया है। वित्तीय वर्ष 2025 26 तक प्रदेश की तीन लाख तीन हजार 696 महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। इन महिलाओं ने अपनी वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक पहुंचाकर आत्मनिर्भरता की मिसाल कायम की है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं प्रदेश सरकार की अनुदान और )ण योजनाओं का लाभ लेकर विभिन्न व्यवसायों के माध्यम से अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं। महिलाओं ने विशेष रूप से जैविक खेती, खाद्य प्रसंस्करण, मसाला निर्माण, हस्तशिल्प, डेयरी और पशुपालन, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन तथा होमस्टे संचालन को आजीविका का साधन बनाया है। मिलेट से तैयार बेकरी उत्पादों की बढ़ती मांग को देखते हुए महिलाएं इनके उत्पादन से भी जुड़ रही हैं। स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की प्रसंस्करण, बिक्री और बाजार तक पहुंच आसान बनाने के लिए प्रदेश में विशेष व्यवस्थाएं विकसित की गई हैं। वर्तमान में 24 विकास केंद्र, 33 सूक्ष्म पैकेजिंग इकाइयां और 17 सरस केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। महिलाओं के उत्पादों को बड़े बाजारों से जोड़ने के लिए जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर सरस मेलों का आयोजन भी किया जा रहा है। प्रदेश सरकार की पहल पर हाउस ऑफ हिमालयाज ब्रांड के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है। स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग और गुणवत्ता में सुधार के चलते महानगरों और प्रमुख शहरों में इनकी मांग बढ़ी है। उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत प्रदेश के सभी 13 जनपदों के 95 विकासखंडों में 5,19,943 महिलाओं को संगठित किया गया है। इनके लिए 70,767 स्वयं सहायता समूह, 8,179 ग्राम संगठन और 615 कलस्टर स्तरीय महासंघ तैयार किए गए हैं। इन संगठनों के माध्यम से महिलाओं को विभिन्न आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर आय के नए स्रोत विकसित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से महिला सशक्तिकरण और स्वावलंबन के लिए कई कदम उठाए गए हैं। सरकारी सेवाओं में महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण तथा सहकारी समितियों में 33 प्रतिशत आरक्षण को सरकार के प्रमुख फैसलों में शामिल किया गया है। इसके अलावा मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना, मुख्यमंत्री सशक्त बहना योजना, ड्रोन दीदी योजना, सोलर सखी योजना, मुख्यमंत्री सतत आजीविका मिशन, मुख्यमंत्री नारी सशक्तिकरण योजना और मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना जैसी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मातृशक्ति उत्तराखंड की आर्थिक और सामाजिक प्रगति की सबसे बड़ी संवाहक है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के साथ ही राज्य के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इन समूहों को विभिन्न आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है, ताकि महिलाओं की आय के नए स्रोत विकसित हो सकें। सरकार हर स्तर पर मातृशक्ति के सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है।

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