घोषणा के पहले ही ‘विधाानसभा चुनाव’ के बहिष्कार की चेतावनी
बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे काणीगाढ़ गांव के ग्रामीणों का छलका सब्र का पैमाना
टिहरी गढ़वाल। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव की विधिवत घोषणा तोअभी नहीं हुई है, पर विधानसभा चुनाव के बहिष्कार की चेतावनी का सिलसिला अभी से आरंभ हो गया है । ज्ञात हो कि धनोल्टी विधानसभा क्षेत्र की ग्राम सभा बनाली के काणीगाढ़ गांव के ग्रामीण पिछले 26 वर्ष से बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं और अब उनका सब्र का पैमाना छलक चुका है। लिहाजा उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव के बहिष्कार की चेतावनी दे दी है। प्रदेश के सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के सर्वांगीण विकास और पहाड़ों तक सड़क पहुंचाने के तमाम दावों के बीच टिहरी जिले की ग्राम सभा बनाली के काणीगाढ़ गांव से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो आज भी पहाड़ के गांवों की जमीनी हकीकत बयां करती है। काणीगाढ़ गांव के ग्रामीण आज भी सड़क जैसी मूलभूत सुविधा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। गांव तक सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीणों को अपनी रोजमर्रा की जरूरतों का सामान लाने के लिए करीब 4 से 5 किलोमीटर पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। राशन हो, रसोई गैस हो या फिर कोई दूसरा जरूरी सामान सब कुछ ग्रामीणों को अपने कंधों पर उठाकर गांव तक पहुंचाना पड़ता है। सबसे बड़ी परेशानी तब सामने आती है, जब गांव में कोई बीमार पड़ता है। सड़क के अभाव में मरीजों को डंडी-कंडी के सहारे कंधों पर उठाकर मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाना भी काणीगाढ़ गांव के ग्रामीणों के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार गांव तक सड़क पहुंचने की मांग कोई नई नहीं है। सालों से गांव तक सड़क पहुंचाने की मांग शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने उठाई जाती रही है, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी समस्या पर अब तक गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया। ग्रामीण बताते हैं कि लोक निर्माण विभाग ने सड़क के लिए सर्वे तो किया है पर उसके अधिकारी हमेशा यही कहते हैं कि हो जाएगा, हो जाएगा। कभी मामले को जंगलात के पास बताते हैं, तो कभी कोई प्रशासनिक अड़चन। गांव तक सड़क न होने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को होती है, जो बरसात में समय सड़क के अभाव में स्कूल नहीं जा पाते हैं।सड़क नहीं होने का असर ग्रामीणों की जिंदगी के हर हिस्से पर पड़ रहा है। ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर है। गांव में यदि अचानक कोई व्यक्ति बीमार हो जाए, तो उसे अस्पताल तक पहुंचाने के लिए सड़क के अभाव में डंडी-कंडी का सहारा लेना पड़ता है। बीमार व्यक्ति को कंधों पर उठाकर पहले पैदल रास्ते से मुख्य सड़क तक लाया जाता है। उसके बाद कहीं जाकर वाहन की सुविधा मिल पाती है। गर्भवती महिलाओं के लिए भी हालात बेहद चुनौतीपूर्ण हैं। प्रसव पीड़ा के दौरान उन्हें समय पर अस्पताल पहुंचाना परिवार के साथ-साथ पूरे गांव के लिए चिंता का विषय बन जाता है। बरसात का मौसम आते ही काणीगाढ़ के ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। गांव तक पहुंचने वाले पैदल रास्तों के बीच कई गधेरे पड़ते हैं। भारी बारिश के दौरान जब ये गधेरे उफान पर आते हैं, तो ग्रामीणों के लिए उन्हें पार करना जान जोखिम में डालने जैसा हो जाता है। रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लोगों को इन उफनते गधेरों को पार करना पड़ता है। ऐसे में कभी भी कोई बड़ा हादसा होने का खतरा बराबर बना रहता है। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि उनकी समस्या का समाधान देर सवेर हो ही जाएगा और गांव तक सड़क पहुंचेगी, लेकिन लंबे इंतजार के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर सरकार और शासन-प्रशासन उनकी समस्या को अब भी गंभीरता से नहीं लेता और गांव तक सड़क पहुंचाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाते हैं, तो वे आगामी विधानसभा चुनाव में चुनाव बहिष्कार करने का फैसला ले सकते हैं। ग्रामीणों के अनुसार चुनाव के समय नेताओं और जनप्रतिनिधियों द्वारा विकास के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव के बाद उनकी मूलभूत समस्याएं फिर भुला दी जाती हैं। अब ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि केवल आश्वासन से अब काम नहीं चलेगा, उन्हें सड़क चाहिए और जमीन पर काम चाहिए। ग्रामीणों ने शासन- प्रशासन को साफ संदेश देते हुए कहा है की उनकी मांग को और नजरअंदाज किया गया तो वे आगामी विधानसभा चुनाव में चुनाव बहिष्कार का रास्ता अपनाएंगे। देखा जाए तो काणीगाढ़ गांव की यह तस्वीर पहाड़ के उन तमाम गांवों की कहानी है, जहां आज भी लोग सड़क, स्वास्थ्य और आवागमन जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं। एक तरफ विकास की योजनाओं और पहाड़ों को बेहतर कनेक्टिविटी से जोड़ने की बातें होती हैं, तो दूसरी तरफ काणीगाढ़ जैसे गांवों में ग्रामीण आज भी राशन और गैस के लिए 5 किलोमीटर पैदल चल रहे हैं। सबसे गंभीर सवाल ग्रामीणों की जिंदगी और स्वास्थ्य से जुड़ा है। अगर रात के समय गांव में कोई गंभीर रूप से बीमार पड़ जाए या किसी गर्भवती महिला को तत्काल अस्पताल ले जाना पड़े, तो उसे समय पर अस्पताल कैसे पहुंचाया जाएगा?

