बद्रीनाथ DJ विवाद पर घिरी बीकेटीसी : महाराज ने दी सफाई, CM धामी के शामिल होने पर भी उठे सवाल
बीकेटीसी की भूमिका भी सवालों के घेरे में, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जिम्मेदारी को लेकर सवाल
चमोली(उद ब्यूेरा)। बद्रीनाथ धाम में आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में तेज संगीत और DJ बजाए जाने का मामला अब राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। कार्यक्रम के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद तीर्थ पुरोहितों और संतों ने धाम की धार्मिक मर्यादा को लेकर सवाल उठाए हैं। आयोजन की अनुमति, कार्यक्रम की रूपरेखा और इसकी जिम्मेदारी को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग उठ रही है। बद्रीनाथ धाम के टूरिस्ट अराइवल प्लाजा में ‘देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव’ (Devbhoomi Cultural Festival) का आयोजन किया गया था। इस दो दिवसीय कार्यक्रम में लाउड म्यूजिक, डीजे और डांस परफॉर्मेंस की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद साधु-संतों, पुजारियों और तीर्थ पुरोहितों ने तीखी आपत्ति जताई। जब सरकार और सूबे के मुखिया खुद वहां मौजूद थे, तो ऐसी मर्यादा विरोधी प्रस्तुतियों को बढ़ावा कैसे मिला। कहना है कि खुद मुख्यमंत्री की मौजूदगी वाले कार्यक्रम की जिम्मेदारी पूरी तरह सेना पर डालना उचित नहीं है। वहीं बीकेटीसी की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। आखिर बीकेटीसी की अनुमति के बिना वहां इस तरह के सांस्कृतिक और डीजे बजाने की अनुमति क्यों दी गई है। शुरुआत में सामने आई जानकारी के अनुसार कार्यक्रम का आयोजन चमोली जिला प्रशासन और भारतीय सेना से जुड़ा बताया गया था। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मौजूदगी को लेकर भी विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं। हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों के चयन और उनके स्वरूप में प्रशासन की कोई भूमिका नहीं थी तथा इसके लिए प्रशासन से पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी। प्रशासन की ओर से सेना से जवाब मांगे जाने की बात भी सामने आई है।
सेना को जिम्मेदार ठहराने पर उठे सवाल
विवाद के बीच आयोजन की पूरी जिम्मेदारी सेना पर डालने का भी विरोध सामने आया है। दावा किया जा रहा है कि कार्यक्रम से पहले सेना और जिला प्रशासन के बीच बैठक हुई थी और आयोजन की व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन स्तर से निर्देश जारी किए गए थे। सोशल मीडिया पर एक पत्र भी वायरल है, जिसे चमोली के मुख्य विकास अधिकारी की ओर से जारी बताया जा रहा है। हालांकि, वायरल पत्र की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।कार्यक्रम के समापन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मौजूदगी को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्षी दल इस मामले में सरकार से जवाब मांग रहे हैं और बद्रीनाथ धाम की धार्मिक मर्यादा बनाए रखने की मांग कर रहे हैं।
UKD नेता ने सरकार पर साधा निशाना
उत्तराखंड क्रांति दल के वरिष्ठ नेता काशी सिंह ऐरी ने मामले को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने बद्रीनाथ धाम में धार्मिक मर्यादाओं के साथ खिलवाड़ का आरोप लगाते हुए सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने सवाल उठाया कि धाम में श्रद्धालु आस्था और शांति के लिए पहुंचते हैं, ऐसे में इस तरह के आयोजनों की अनुमति और स्वरूप को लेकर स्पष्ट नीति होनी चाहिए।
सतपाल महाराज ने दी सफाई
वहीं, उत्तराखंड के धर्मस्व एवं पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने बद्रीनाथ धाम में पारंपरिक संगीत, नृत्य और गढ़वाल स्काउट्स के बैंड पर किसी पूर्ण प्रतिबंध से इनकार किया है। उन्होंने इसे क्षेत्र की मूल परंपरा से जोड़ते हुए कहा कि बद्रीनाथ में संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं किया गया है।सतपाल महाराज ने बद्रीनाथ धाम में शंख बजाने की परंपरा को लेकर भी टिप्पणी की। उनके अनुसार वहां शंख नहीं बजाया जाता क्योंकि पारंपरिक मान्यता में शंख को हड्डी से बना माना जाता है।
सोशल मीडिया वीडियो के बाद बढ़ा विवाद
बताया जा रहा है कि कार्यक्रम के दौरान मौके पर किसी तरह का विरोध दर्ज नहीं हुआ था। 21 सितंबर के बाद कार्यक्रम से संबंधित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद ने तूल पकड़ा। इसके बाद धार्मिक संगठनों और राजनीतिक दलों की ओर से आयोजन के स्वरूप और जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठाए गए। फिलहाल मुख्य सवाल यही है कि कार्यक्रम की अनुमति किस स्तर से दी गई, आयोजन की रूपरेखा किसने तय की और प्रशासन तथा सेना की इसमें वास्तविक भूमिका क्या थी। सरकार या संबंधित विभाग की ओर से कार्रवाई को लेकर अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। आयोजन से जुड़े दस्तावेजों और प्रशासन-सेना के बीच हुए पत्राचार से स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
