बद्रीनाथ धाम में डीजे कार्यक्रम को लेकर उठे सवाल: संतों, पुरोहितों और स्थानीय लोगों ने जताई चिंता
विवाद के बाद प्रशासन सख्त, धार्मिक स्थलों पर हाई-फ्रीक्वेंसी साउंड सिस्टम पर रोक
चमोली। बद्रीनाथ धाम के अराइवल प्लाजा में डीजे कार्यक्रम को लेकर उठे विवाद के बाद चमोली प्रशासन ने धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों की गरिमा बनाए रखने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। जिला मजिस्ट्रेट गौरव कुमार ने बद्रीनाथ धाम सहित जिले के सभी धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के आसपास उच्च आवृत्ति वाले साउंड सिस्टम के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। प्रशासन के आदेश के अनुसार धार्मिक स्थलों की गरिमा प्रभावित करने वाले कार्यक्रमों पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध रहेगा। ऐसे स्थलों के आसपास किसी भी कार्यक्रम के आयोजन के लिए स्थानीय प्रशासन से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। कार्यक्रम की अनुमति संबंधित उप जिलाधिकारी द्वारा सभी पहलुओं की जांच के बाद ही दी जाएगी। आदेश का उल्लंघन करने वाले आयोजक मंडल या आयोजन समिति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। बद्रीनाथ धाम के अराइवल प्लाजा में आयोजित डीजे कार्यक्रम को लेकर संतों, पुरोहितों और स्थानीय लोगों की ओर से आपत्ति जताई गई थी। उनका कहना था कि बद्रीनाथ धाम की विशिष्ट धार्मिक परंपराओं और मर्यादाओं के अनुरूप ऐसे कार्यक्रमों की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
धार्मिक स्थलों की गरिमा के साथ-साथ पर्यावरण को ध्यान में रखना भी आवश्यक
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी कार्यक्रम पर आपत्ति जताते हुए सरकार से बद्रीनाथ और केदारनाथ जैसे धार्मिक स्थलों पर ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने की मांग की। रावत ने कहा कि विकास कार्य और सुविधाओं का विस्तार स्थानीय परिवेश, संस्कृति और परंपराओं के अनुरूप होना चाहिए।उन्होंने बद्रीनाथ क्षेत्र में हेलीकॉप्टरों के लगातार शोर और पिछले कुछ वर्षों से चल रहे निर्माण कार्यों में इस्तेमाल हो रही भारी मशीनों से होने वाले शोर को भी चिंता का विषय बताया। रावत ने कहा कि धार्मिक स्थलों की गरिमा के साथ-साथ पर्यावरण और स्थानीय पारिस्थितिकी को ध्यान में रखना भी आवश्यक है।
मुरली मनोहर जोशी ने भी जताई चिंता
भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने भी बद्रीनाथ धाम में डीजे कार्यक्रम को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि भगवान बद्रीनाथ के पावन धाम में इस प्रकार के नाच-गाने और डीजे कार्यक्रम का आयोजन गंभीर चिंता का विषय है।जोशी ने बद्रीनाथ धाम की धार्मिक परंपराओं और मर्यादाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे पवित्र स्थल पर आयोजित किसी भी कार्यक्रम में धार्मिक भावनाओं और परंपराओं का सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए। उन्होंने सरकार और प्रशासन से मामले का संज्ञान लेकर धार्मिक परंपराओं एवं मर्यादाओं का पालन सुनिश्चित करने की अपील की।
ध्वनि प्रदूषण और विकास कार्य भी बहस के केंद्र में
विवाद के बाद अब चर्चा केवल डीजे कार्यक्रम तक सीमित नहीं है। बद्रीनाथ और अन्य हिमालयी धार्मिक स्थलों पर हेलीकॉप्टर संचालन, निर्माण गतिविधियों और उनसे होने वाले ध्वनि प्रदूषण को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।हरीश रावत ने सरकार से धार्मिक स्थलों पर ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए व्यापक कदम उठाने की मांग की है। वहीं, प्रशासन के नए आदेश में धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों के आसपास किसी भी कार्यक्रम के आयोजन से पहले अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है।इस पूरे घटनाक्रम के बीच अब यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि बद्रीनाथ जैसे संवेदनशील धार्मिक और हिमालयी क्षेत्र में विकास, पर्यटन, धार्मिक परंपराओं और पर्यावरणीय संरक्षण के बीच संतुलन किस तरह कायम किया जाए।
