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Hello फ्रेंड्स! आपत्तिजनक भाषा पर लड़की ने मांगी माफी : सोशल मीडिया पर छिड़ी नई बहस, मोदी समर्थकों और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज

राजनीतिक विरोधियों और विभिन्न संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ भी आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया जाता है
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वाले युवाओं को माफ करने और समाज से उन्हें सही राह दिखाने की अपील के बाद सोशल मीडिया पर नई राजनीतिक बहस छिड़ गई है।
कुछ विपक्षी नेताओं, आलोचकों का कहना है कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, महात्मा गांधी सहित कई ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के खिलाफ भी सोशल मीडिया पर अभद्र टिप्पणियां की जाती रही हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि सार्वजनिक संवाद में मर्यादा बनाए रखने की अपील की जा रही है, तो यह संदेश सभी राजनीतिक दलों और उनके समर्थकों पर समान रूप से लागू होना चाहिए।
प्रधानमंत्री के वीडियो संदेश को लेकर एक ओर उनके समर्थक इसे सकारात्मक और संवेदनशील पहल बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दलों के नेताओं और कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इस मुद्दे पर दोहरे मापदंड का आरोप लगाया है। विपक्षी नेताओं और कई सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि काकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान कुछ राजनीतिक नेताओं और समर्थकों ने छात्रों को “दहशतगर्द”, “विदेशी एजेंट”, “राष्ट्रविरोधी तत्व” जैसे शब्दों से संबोधित किया और कई मौकों पर उनके लिए अभद्र भाषा का भी इस्तेमाल किया।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि सार्वजनिक जीवन में शालीन भाषा का इस्तेमाल सभी राजनीतिक दलों और उनके समर्थकों पर समान रूप से लागू होना चाहिए। उनका आरोप है कि सोशल मीडिया पर अक्सर राजनीतिक विरोधियों, महिला नेताओं और विभिन्न संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ भी आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया जाता है।
विपक्ष की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि सत्ता पक्ष से जुड़े कुछ समर्थक और ट्रोल अकाउंट विपक्षी नेताओं, विशेषकर महिला नेताओं, के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते हैं। कुछ नेताओं ने यह दावा भी किया कि अतीत में भारत के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India) के खिलाफ भी सोशल मीडिया पर अभद्र टिप्पणियां की गई थीं।
फिलहाल, प्रधानमंत्री की अपील के बाद राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर राजनीतिक विमर्श की भाषा और सार्वजनिक मर्यादा को लेकर बहस तेज हो गई है।आलोचकों का कहना है कि यदि सार्वजनिक जीवन में शालीन भाषा और सामाजिक मर्यादा बनाए रखने की बात की जा रही है, तो यह सिद्धांत सभी राजनीतिक दलों, नेताओं और समर्थकों पर समान रूप से लागू होना चाहिए। उनका तर्क है कि लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करना और विरोध प्रदर्शन करना एक संवैधानिक अधिकार है, इसलिए किसी भी छात्र या प्रदर्शनकारी को बिना पर्याप्त आधार के अपमानजनक विशेषणों से संबोधित करना उचित नहीं है। कुछ विपक्षी नेताओं ने यह भी कहा कि जो लोग लगातार नफरत फैलाने वाली या असामाजिक भाषा का प्रयोग करते हैं, समाज को ऐसे व्यवहार का विरोध करना चाहिए और सार्वजनिक विमर्श में शालीनता को बढ़ावा देना चाहिए। उनका कहना है कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन व्यक्तिगत अपमान और अभद्र भाषा लोकतांत्रिक संवाद को कमजोर करती है।प्रधानमंत्री का यह बयान उस विवाद के बाद आया है, जिसमें नीट पेपर लीक को लेकर जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणियां किए जाने का मामला सामने आया था। इस मामले में नोएडा पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा आयोजित प्रदर्शन में शामिल एक युवती के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। आरोप था कि प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री और उनके परिवार के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, “क्या माननीय प्रधानमंत्री ने एक्स पर सरकार की आलोचना करने वाली पोस्ट पर अभद्र और अश्लील टिप्पणियां करने वाले भाजपा ट्रोल्स को भी माफ कर दिया है?” कांग्रेस सांसद की यह टिप्पणी सार्वजनिक विमर्श की भाषा और सोशल मीडिया पर अपशब्दों के इस्तेमाल को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच आई है।

पीएम मोदी पर अभद्र टिप्पणी के मामले में नाबालिग लड़की का माफीनामा वायरल, बोली- “मुझे अपने किए पर शर्मिंदगी है”

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित रूप से अभद्र टिप्पणी करने के मामले में एक नाबालिग लड़की का माफी मांगते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में लड़की अपने बयान पर खेद व्यक्त करते हुए पूरे देश से माफी मांगती नजर आ रही है। वीडियो में लड़की ने खुद को 15 वर्षीय नाबालिग बताते हुए कहा कि वह अपने दोस्तों के साथ कनॉट प्लेस गई थी, जहां एक प्रदर्शन चल रहा था। उसके अनुसार, वहां मौजूद कुछ लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक नारे और टिप्पणियां कर रहे थे, जिनके प्रभाव में आकर उसने भी अनुचित बातें कह दीं। लड़की ने कहा,“मैं अपने दोस्तों के साथ कनॉट प्लेस गई थी, जहां प्रदर्शन चल रहा था। वहां कई समूह प्रधानमंत्री मोदी को गालियां दे रहे थे। मैं उनके प्रभाव में आ गई और मैंने भी कई अनुचित बातें कह दीं। मैं केवल 15 साल की हूं। मैंने जो किया, वह माफी के लायक नहीं था।”

“यह मेरी पहली और आखिरी गलती है”

वीडियो में लड़की ने आगे कहा कि उसे अपने व्यवहार पर गहरा पछतावा है और भविष्य में वह कभी भी इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं करेगी। उसने कहा,“यह मेरी पहली और आखिरी गलती है। मैं भविष्य में कभी भी इस तरह की बात नहीं कहूंगी और न ही कुछ पोस्ट करूंगी। मैं पूरे देश से माफी मांगती हूं। मुझे अपने किए पर गहरी शर्मिंदगी है और मैं किसी की आंखों में नहीं देख पा रही हूं। कृपया मुझे माफ कर दीजिए।”

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

लड़की का यह माफीनामा सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जा रहा है। वीडियो को लेकर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे अपनी गलती स्वीकार करने का साहस बता रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि नाबालिग होने के कारण उसके साथ संवेदनशीलता से पेश आना चाहिए। इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हालिया वीडियो संदेश भी चर्चा में है, जिसमें उन्होंने जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वाले युवाओं को माफ करने की बात कही थी। प्रधानमंत्री ने कहा था कि युवाओं को दंडित करने के बजाय उन्हें सही दिशा दिखाना समाज की जिम्मेदारी है।

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