आईएएस अधिकारियों में राष्ट्रसेवा और संवेदनशीलता का भाव सर्वाेपरि हो: राज्यपाल
देहरादून । उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने बुधवार को मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में भारतीय प्रशासनिक सेवा के 2024 बैच के अधिकारी प्रशिक्षुओं को संबोधित किया। इस अवसर पर राज्यपाल लेफ्रिटनेंट जनरल गुरमीत सिंह सेवानिवृत्त भी मौजूद रहे।राज्यपाल ने व्यावसायिक प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने पर सभी अधिकारी प्रशिक्षुओं को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल, सार्थक और राष्ट्रसेवा को समर्पित सेवाकाल की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि अकादमी में प्रशिक्षण का एक अध्याय पूरा हो रहा है, लेकिन राष्ट्रसेवा की वास्तविक और महत्वपूर्ण यात्रा अब शुरू हो रही है। राज्यपाल ने कहा कि प्रशासन की वास्तविक परीक्षा चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में होती है, जब समय सीमित हो, जानकारी अधूरी हो और किसी निर्णय का प्रभाव व्यापक हो। ऐसी परिस्थितियों में नियम मार्गदर्शन करते हैं और अनुभव सहायता देता है, लेकिन सही निर्णय के लिए विवेक, निष्पक्षता और दूरदृष्टि आवश्यक होती है। उन्होंने कहा कि भारत आज परिवर्तन के महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है। विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए अधिकारियों को नीतियों के साथ जमीनी वास्तविकताओं और नागरिकों की आकांक्षाओं को भी समझना होगा। अधिकारी प्रशिक्षुओं का आ“वान करते हुए उन्होंने कहा कि भारत को केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि गांवों, कस्बों, शहरों और सामान्य नागरिक के जीवन में देखें। राज्यपाल ने कहा कि फाइलें तथ्य उपलब्ध कराती हैं, लेकिन क्षेत्रीय भ्रमण वास्तविकता से परिचित कराता है। अधिकारियों को लोगों के बीच जाना चाहिए, उनकी बातें सुननी चाहिए और उनकी कठिनाइयों को समझना चाहिए। प्रशासन का पहला धर्म जनता की बात सुनना और उसके विश्वास को बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, आंकड़ा विज्ञान और नई तकनीक प्रशासन की कार्यक्षमता तथा निर्णय क्षमता को नई शक्ति प्रदान कर रही हैं। अधिकारियों को इन तकनीकों को सीखने और अपनाने के साथ स्वयं को निरंतर अद्यतन रखना चाहिए। बदलते समय के साथ प्रशासनिक कार्यप्रणाली में भी तकनीक और नवाचार को उचित स्थान देना जरूरी है। राज्यपाल ने कहा कि अधिकारी अपने सेवाकाल में अनेक अवसरों और चुनौतियों का सामना करेंगे। प्रत्येक परिस्थिति में राष्ट्र को सर्वाेपरि रखने का भाव उनके भीतर जीवित रहना चाहिए। यही भावना उन्हें पद से ऊपर उठाकर सच्चा राष्ट्रसेवक बनाएगी। उन्होंने कहा कि लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी से निकलते समय अधिकारी प्रशिक्षु केवल सक्षम प्रशासक ही नहीं, बल्कि ऐसे राष्ट्रसेवक बनें, जिनकी कार्यशैली में पारदर्शिता, व्यवहार में संवेदना, निर्णयों में दृढ़ता और हृदय में सदैव राष्ट्र प्रथम का भाव हो। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी के निदेशक डॉ. बी. राजेंदर सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

