जाली नोट छापने वाले गिरोह का भंडाफोड़,सरगना समेत तीन गिरफ्तार
श्यामपुर। जाली नोट छापने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह के मुख्य सरगना समेत तीन शातिर आरोपितों को श्यामपुर थाना पुलिस ने लालढांग तिराहे के पास से गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों की कार से करीब 50 हजार रुपये के अधकटे नकली नोट बरामद हुए। इसके अलावा उनकी निशानदेही पर नोट छापने के उपकरण और विशेष जीएसएम पेपर बरामद हुआ है, जिस पर नोट प्रिंट करते थे। इस गिरोह के तीन सदस्यों को पुलिस पहले ही जेल भेज चुकी है, जिसके बाद मामले में कुल छह गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। एसपी अपराध निशा यादव ने मंगलवार को पूरे गिरोह के काम करने के तरीके का भंडाफोड़ किया। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि पिछले दिनों श्यामपुर थाना क्षेत्र में कुछ युवकों ने वन कर्मियों के साथ मारपीट की थी। उस दौरान तलाशी में उनकी गाड़ी से करीब 52 हजार रुपये के जाली नोट बरामद हुए थे, जिस पर पुलिस ने तीन आरोपियों को मौके से गिरफ्तार किया था। उनसे कड़ाई से पूछताछ करने के बाद लालढांग तिराहे के पास से गिरोह के मुख्य सरगना देवेंद्र कुमार (निवासी सरदारपुर छांमली, बढ़ापुर, बिजनौर), गुलजार अहमद (निवासी टांडा सिक्कावाला, बढ़ापुर, बिजनौर) और शगुन जोशी (निवासी लालढांग, हरिद्वार) को गिरफ्तार किया गया। मुख्य आरोपी देवेंद्र ने कुबूल किया कि इससे पहले उसने और गुलजार ने मिलकर बढ़ापुर बिजनौर में भी करीब एक लाख रुपये के नकली नोट छापे थे। उनमें से कुछ नोट खराब हो गए थे, लेकिन करीब 60 हजार रुपये के नकली नोट वे लोग बाजार में चला चुके थे। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से नकली नोट छापने में प्रयोग होने वाले चार असली नोट (500 रुपये के), 25 पेपर शीट जिस पर करीब 50 हजार रुपये के नकली नोट छपे हैं (जिनकी कटिंग होनी शेष है), एक लैपटाप और दो कलर प्रिंटर बरामद किए हैं। कार्रवाई में शामिल पुलिस टीम में प्रशिक्षु सीओ अवनी तिवारी, वरिष्ठ उप निरीक्षक मनोज रावत, लालढांग चौकी प्रभारी मोहन कठैत, कांस्टेबल राहुल देव, सुदेश खरोला और सुशील चौहान शामिल रहे। पूछताछ में सामने आया कि आरोपी गुलजार नकली नोट छापने वाला विशेष जीएसएम पेपर आनलाइन मंगवाता था, जो छूने में हूबहू असली नोट की तरह लगता है। वहीं शगुन असली नोट से फोटो खींचकर उसे साफ्टवेयर और मोबाइल ऐप्स की मदद से एडिट करके प्रिंटिंग की गुणवत्ता बढ़ाता था, ताकि नोट का प्रिंट पूरी तरह सही आए। पुलिस अधीक्षक नगर अभय प्रताप सिंह ने बताया कि इन नकली नोटों के बीच में जो गोल्डन तार (सुरक्षा धागा) होती है, उसके न होने से इनको पकड़े जाने का डर था। इसी वजह से ये भीड़भाड़ वाले स्थानों या देहाती बाजारों में नोट चलाते थे, जहां जल्दबाजी में दुकानदार नोटों की जांच न कर सके।
