August 13, 2026

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“शुद्धिकरण यज्ञ” पर भाजपा का पलटवार: यज्ञ में पार्टी का पदाधिकारी शामिल नहीं, इस्लामिक नारे लगाए गए थे

यशपाल आर्य ने कहा : घटना सामाजिक एकता के लिए दुर्भाग्यपूर्ण, भाजपा रखे पक्ष
हल्द्वानी ।भाजपा के नैनीताल जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट ने कहा कि हवन यज्ञ में पार्टी का कोई पदाधिकारी शामिल नहीं था और इसका भाजपा से कोई संबंध नहीं है। वहीं शुद्धिकरण कराने वाले संगठन ने भी कहा है कि कार्यक्रम किसी जाति या व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि मैदान की धार्मिक गरिमा को लेकर किया गया था। दरअसल, रामलीला मैदान में रैली के ठीक दो दिन बाद 10 अगस्त को स्थानीय धार्मिक संगठन श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास ने सचिव राम अवस्थी के नेतृत्व में मैदान में हवन-पूजन कराया था। संगठन का आरोप है कि रैली में कुछ इस्लामिक नारे लगाए गए और हिंदू संगठनों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं थीं। इसीलिए मैदान का शुद्धिकरण अनिवार्य था। संगठन का तर्क है कि इसका दलित से कोई लेना-देना नहीं है, बल्कि मैदान की धार्मिक और सांस्कृतिक गरिमा की पुनर्स्थापना के उद्देश्य से यह किया गया। संगठन के सदस्य गिरीश चंद्र पांडे ने कहा कि श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास किसी भी राजनीतिक पार्टी से जुड़ी नहीं है। भाजपा के नैनीताल जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट ने भी कहा कि यज्ञ से भाजपा का कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कांग्रेस पर मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया। भाजपा का कहना है कि किसी निजी संगठन के कार्यक्रम को पार्टी से जोड़ना उचित नहीं है। हल्द्वानी रामलीला मैदान की पवित्र भूमि पर धर्म विशेष के नारे कांग्रेस ने लगवाए। भाजपा ने इसे सनातन धर्म का अपमान और समाज को बांटने की घटिया राजनीति बताया। हांलाकि कांग्रेस नेताओं ने जनसभा में धार्मिक नारे लगाने को लेकर वायरल पोस्ट को एआई जनरेटेट बताया है साथ ही पुलिस से कार्यवाही की मांग भी की गई है। वहीं नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि उत्तराखंड की धरती सामाजिक समरसता, भाईचारे और लोकतांत्रिक चेतना की भूमि रही है। हल्द्वानी जैसे शहर में इस प्रकार की घटना का सामने आना प्रदेश की सामाजिक एकता के लिए भी दुर्भाग्यपूर्ण है। भाजपा नेताओं को यह समझना चाहिए कि समाज को जोड़ने का समय है, जाति और ऊंच-नीच की दीवारें खड़ी करने का नहीं। मल्लिकार्जुन खड़गे जी केवल कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष ही नहीं, बल्कि देश के वरिष्ठतम जननेताओं में से एक हैं। उनका सार्वजनिक जीवन संविधान, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष को समर्पित रहा है। ऐसे नेता की जनसभा के बाद मैदान का शुद्धिकरण करना सामाजिक बराबरी की उस भावना का अपमान है, जिसकी स्थापना के लिए डॉ. भीमराव आंबेडकर सहित अनेक महापुरुषों ने जीवनभर संघर्ष किया। किसी भी सार्वजनिक स्थान की पवित्रता किसी व्यक्ति की जाति, वर्ग या राजनीतिक विचारधारा से निर्धारित नहीं होती। यशपाल आर्य ने कहा कि भाजपा नेतृत्व इस मामले में जनता के समक्ष आकर इसका प्रतिकार करना चाहिए। मेरा भाजपा से सवाल है यदि किसी सार्वजनिक मैदान में किसी दलित नेता की सभा होने के बाद उसे शुद्ध करने की आवश्यकता महसूस की जाती है, तो क्या भाजपा नेतृत्व इस मानसिकता का समर्थन करता है? यदि नहीं, तो भाजपा को इस घटना पर अपना स्पष्ट पक्ष जनता के सामने रखना चाहिए।

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