Uttaranchal Darpan

Hindi Newsportal

एकल महिला स्वरोजगार योजना के द्वितीय चरण का सीएम ने किया शुभारंभ

देहरादून । मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को देहरादून में मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना के द्वितीय चरण का शुभारंभ करते हुए कहा कि राज्य सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य महिलाओं को रोजगार मांगने वाली नहीं, बल्कि रोजगार देने वाली बनाना है। महिला सशक्तीकरण की दिशा में यह योजना राज्य की हजारों एकल महिलाओं के जीवन में आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन लाने का माध्यम बनेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में नारी शक्ति को विकास की धुरी बनाया गया है। उसी सोच को आगे बढ़ाते हुए उत्तराखंड सरकार महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण, सम्मानजनक आजीविका और सामाजिक सुरक्षा के लिए अनेक योजनाएं संचालित कर रही है। मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना भी इसी कड़ी की महत्वपूर्ण पहल है, जिसके माध्यम से ऐसी महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर मिलेगा, जो किसी कारणवश परिवार पर आश्रित नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि योजना के दूसरे चरण में प्रदेश के आठ जिलों की 212 एकल महिलाओं को स्वरोजगार स्थापित करने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। प्रत्येक लाभार्थी को दो लाख रुपये तक की परियोजना लागत पर 75 प्रतिशत, अधिकतम डेढ़ लाख रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा। शेष राशि का वहन लाभार्थी अथवा बैंक ऋण के माध्यम से किया जाएगा। इससे महिलाएं अपने क्षेत्र में ही छोटे उद्योग, सेवा क्षेत्र अथवा अन्य स्वरोजगार आधारित गतिविधियां शुरू कर सकेंगी। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि महिलाएं अपने गांव और कस्बों में ही आर्थिक गतिविधियां शुरू करें, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ें, पलायन रुके और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले। यह योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने और उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर प्रदान करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और विपणन की सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान दे रही है। महिला स्वयं सहायता समूहों, लखपति दीदी अभियान, ग्रामीण आजीविका मिशन और विभिन्न स्वरोजगार योजनाओं के माध्यम से हजारों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक महिला अपनी क्षमता के अनुरूप उद्यम स्थापित कर परिवार की आय बढ़ाने के साथ अन्य लोगों को भी रोजगार उपलब्ध करा सके। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में महिला सशक्तीकरण केवल सरकारी नारा नहीं, बल्कि सरकार की प्राथमिकता है। प्रदेश की महिलाएं कृषि, बागवानी, दुग्ध उत्पादन, हस्तशिल्प, पर्यटन, खाद्य प्रसंस्करण और सेवा क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं। सरकार उन्हें आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एकल महिलाओं को समाज में अनेक प्रकार की आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने और आत्मनिर्भर बनने का अवसर प्रदान किया जाए। मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना इसी सोच का परिणाम है और भविष्य में इसका दायरा और व्यापक किया जाएगा। योजना के तहत विधवा, परित्यक्ता, तलाकशुदा, किन्नर, परिवार पर आश्रित न रहने वाली अविवाहित महिलाएं तथा एसिड अटैक पीड़ित एकल महिलाएं लाभार्थी होंगी। पात्र महिला का उत्तराखंड का मूल एवं स्थायी निवासी होना तथा आयु 21 से 50 वर्ष के बीच होना आवश्यक है। योजना का संचालन महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने लाभार्थी महिलाओं से संवाद करते हुए उन्हें स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने का संकल्प लेने का आ“वान किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह योजना प्रदेश में महिला उद्यमिता को नई दिशा देगी और आत्मनिर्भर उत्तराखंड के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। कार्यक्रम के दौरान कई लाभार्थी महिलाओं ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए सरकार की इस पहल को जीवन बदलने वाली योजना बताया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *