पद बड़ा हुआ तो क्या… जमीन से नहीं टूटा धामी का नाता
सड़क पर आम लोगों के बीच दिखे धामी, कुर्सी की दूरी मिटाकर चाय की दुकान पर बैठे मुख्यमंत्री
खटीमा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सोमवार को अपने विधानसभा क्षेत्र खटीमा में एक अलग ही अंदाज में नजर आए। मुख्यमंत्री का काफिला जब मेलाघाट रोड से गुजरा तो धामी गाड़ी में बैठे रहने के बजाय सड़क पर पैदल निकल पड़े। रास्ते में लोगों से मिले। युवाओं से बातचीत की और स्थानीय दुकानदारों का हाल जाना। इसी दौरान वह मिलन डेयरी पहुंच गए और वहां बैठकर चाय पी। मुख्यमंत्री का यह अंदाज लोगों के लिए खास था। मुख्यमंत्री पद पर होने के बावजूद धामी का आम लोगों के बीच इस तरह घुलना-मिलना खटीमा में चर्चा का विषय बना रहा। न कोई बड़ा मंच था और न कोई औपचारिक कार्यक्रम। सड़क थी और सामने रोजमर्रा की जिंदगी जी रहे लोग। धामी उन्हीं के बीच चलते और रुकते नजर आए। चाय की दुकान पर भी मुख्यमंत्री ने केवल चाय नहीं पी बल्कि दुकानदारों और आसपास मौजूद लोगों से बातचीत की। स्थानीय कारोबार और छोटे दुकानदारों की स्थिति जानी। धामी का कहना था कि स्थानीय दुकानों और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना जरूरी है। इससे छोटे कारोबारियों को सहारा मिलता है और स्थानीय स्तर पर रोजगार भी बढ़ता है। युवाओं के बीच पहुंचे तो माहौल और बदल गया। सनातन धर्मशाला परिसर में आयोजित युवा संवाद में मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से सीधे सवाल सुने। रोजगार से लेकर सरकारी नौकरी तक युवाओं की चिंता सामने आई तो मुख्यमंत्री ने सरकार की योजनाओं और आगे के अवसरों की जानकारी दी। भ्रष्टाचार को लेकर सवाल आया तो उन्होंने युवाओं से कहा कि रिश्वत मांगने या गलत दबाव बनाने वालों की शिकायत करें। उन्होंने 1064 पर शिकायत करने की बात कही और शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखने का भरोसा दिया।संवाद केवल रोजगार तक सीमित नहीं रहा। सीमांत क्षेत्रें में रहने वाले युवाओं के भविष्य से लेकर पलायन और पर्यटन तक सवाल पहुंचे। विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन का मुद्दा भी उठा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड का विकास जरूरी है लेकिन उसकी पहचान और पर्यावरण को बचाते हुए विकास किया जाना चाहिए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने युवाओं को यह भरोसा भी दिलाया कि रोजगार के अवसर लगातार बढ़ाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार अब तक 34 हजार युवाओं को सरकारी नौकरी दे चुकी है और यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। खटीमा में धामी के दौरे की एक और तस्वीर लोगों के बीच चर्चा में रही। लोहियाहेड में टिक्की की दुकान चलाने वाले रवि शर्मा ने मुख्यमंत्री को अपने आठ वर्षीय बेटे देव की बीमारी के बारे में बताया था। रवि ने बताया कि बच्चा बचपन से ही बीमारी से जूझ रहा है और उसके हाथ-पैर काम नहीं करते। परिवार लंबे समय से उसका इलाज करा रहा है। बच्चे की परेशानी सुनने के बाद मुख्यमंत्री ने इसे वहीं खत्म नहीं होने दिया। उनके निर्देश पर सोमवार जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया सहित प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम रवि शर्मा के घर पहुंची। चिकित्सकों ने बच्चे की जांच की और पुराने इलाज की जानकारी ली। डॉक्टरों ने आगे की जांच के लिए एमआरआई कराने की सलाह दी। जिलाधिकारी ने तत्काल एमआरआई कराने के निर्देश दिए और बच्चे को अस्पताल ले जाने के लिए वाहन और जरूरी सहायता उपलब्ध कराने की बात कही। यानी खटीमा में मुख्यमंत्री की मौजूदगी सिर्फ सरकारी कार्यक्रमों तक नहीं रही। वह सड़क पर पैदल चलते मिले तो कभी चाय की दुकान पर बैठे दिखाई दिए। युवाओं के सवालों के बीच रहे तो दूसरी तरफ एक गरीब परिवार की परेशानी सुनकर उसके घर तक प्रशासन पहुंच गया। मुख्यमंत्री और आम आदमी के बीच अक्सर कुर्सी और सुरक्षा का फासला दिखाई देता है लेकिन खटीमा में धामी इस फासले को कम करते नजर आए। सड़क पर चलते हुए लोगों से मिलना हो या छोटी सी दुकान पर बैठकर चाय पीना या फिर किसी परिवार की परेशानी सुनकर उसका समाधान कराने की कोशिश करना— इन तस्वीरों में धामी का वह चेहरा दिखाई दिया जो मुख्यमंत्री होने के साथ खुद को जमीन से जुड़ा हुआ दिखाता है। शायद यही वजह है कि खटीमा में धामी का यह दौरा भाषणों से ज्यादा उनके व्यवहार के लिए याद किया जा रहा है। युवाओं के बीच संवाद हो या किसी परिवार के सुख-दुख में खड़े होने की बात— धामी लगातार यह संदेश देते नजर आए कि मुख्यमंत्री की कुर्सी उन्हें आम आदमी से दूर नहीं करती।
