August 31, 2026

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 ‘शुद्धिकरण यज्ञ’ और एफआईआर पर हरीश रावत का ‘होशियार लोगों’ पर हमला, बोले—अपराधियों पर कार्रवाई के बजाय उन्हें दिया जा रहा संरक्षण

देहरादून। हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा के बाद कथित तौर पर किए गए ‘शुद्धिकरण यज्ञ’ को लेकर सियासी विवाद लगातार गहराता जा रहा है। कांग्रेस इस घटना को दलित अपमान और संविधान की मूल भावना से जोड़ते हुए भाजपा सरकार पर हमलावर है। वहीं, आयोजकों और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से जातिगत भेदभाव के आरोपों को खारिज किया गया है। उनका कहना है कि यज्ञ स्थल की सफाई और शुद्धि के उद्देश्य से यह आयोजन किया गया था। इसी विवाद के बीच पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। रावत ने कहा कि हल्द्वानी में हुआ तथाकथित शुद्धिकरण यज्ञ किसी एक व्यक्ति या कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का ही अपमान नहीं, बल्कि भारत के संविधान और कानून का भी अपमान है। हरीश रावत ने आरोप लगाया कि संविधान की शपथ लेकर सत्ता में बैठी सरकारें अपराधियों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें संरक्षण देती हुई दिखाई दे रही हैं। उन्होंने कहा कि यह संरक्षण भी बेहद खुले तौर पर नजर आ रहा है।रावत ने राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने सत्य और न्याय की आवाज उठाई है, ऐसे में उनके खिलाफ एफआईआर क्यों दर्ज की गई?हल्द्वानी प्रकरण में राहुल गांधी के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किए जाने की खबर सामने आई है। आरोप है कि उन्होंने शुद्धिकरण की घटना को जातिगत रंग दिया और इससे सामाजिक वैमनस्य पैदा हुआ।हरीश रावत ने तंज कसते हुए कहा कि सरकार के ‘होशियार लोगों’ को राहुल गांधी के बजाय भारत के संविधान के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवानी चाहिए, क्योंकि राहुल गांधी वही बात कह रहे हैं जो उनके हाथ में मौजूद संविधान की लाल किताब कहती है। आज जिस व्यक्ति से एफआईआर करवाई गई है, उससे यह बात साफ हो जाती है कि भाजपा और आरएसएस इस मामले में इतनी घबराई हुई हैं। जिस व्यक्ति ने एफआईआर की है, वह दलित परिवार का हो सकता है। अगर वह भाजपा का एक्टिव सदस्य है, हो सकता है उसका आरएसएस से भी संबंध हो, तो सत्ता के कहने पर यह एफआईआर हुई है। इससे बिल्कुल स्पष्ट हो जाता है कि जो शुद्धिकरण किया गया, उसका भाजपा व स्थानीय सत्ता से संबंध था। अब उसे केंद्र की सत्ता का भी संरक्षण है, तो भाजपा और संघ, दोनों जो कभी-कभी चेहरे पर संभाव वाला मुखौटा लगाते हैं, उसको उतारकर फेंक दे रहे हैं। केंद्र की समझदारी तो यहाँ होनी चाहिए थी, राज्य सरकार से कहते हैं कि क्यों नहीं एफआईआर हो रही है? लेकिन आप एफआईआर करने के बजाय, आप श्री राहुल गांधी जी पर एफआईआर करवा रहे हैं।इस पूरे विवाद ने उत्तराखंड की सियासत को एक बार फिर गरमा दिया है। कांग्रेस जहां इसे सामाजिक समानता, दलित सम्मान और संवैधानिक मूल्यों का मुद्दा बता रही है, वहीं भाजपा कांग्रेस पर घटना को राजनीतिक और जातिगत रंग देने का आरोप लगा रही है।
भाजपा चाहे कितने भी मुकदमे दर्ज करा ले, राहुल गांधी को डराया नहीं जा सकता : करन माहरा
देहरादून। हल्द्वानी में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद उत्तराखंड कांग्रेस में भाजपा सरकार के खिलाफ आक्रोश बढ़ गया है। पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) सदस्य करन माहरा ने कार्रवाई को भाजपा की “बौखलाहट” और “राजनीतिक प्रतिशोध” की राजनीति का उदाहरण बताया है। करन माहरा ने कहा कि जब भाजपा राहुल गांधी का मुकाबला विचारों, तथ्यों और जनहित के मुद्दों पर नहीं कर पाती और महंगाई, बेरोजगारी, किसानों, युवाओं, महिलाओं, संविधान तथा सामाजिक न्याय जैसे सवालों पर जवाब देना मुश्किल हो जाता है, तब विपक्ष की आवाज दबाने के लिए मुकदमों और एफआईआर का सहारा लिया जाता है।उन्होंने आरोप लगाया कि हल्द्वानी में राहुल गांधी के खिलाफ हुई कार्रवाई भी इसी राजनीतिक मानसिकता का हिस्सा है। माहरा ने कहा कि भाजपा चाहे कितने भी मुकदमे दर्ज करा ले, राहुल गांधी को डराया नहीं जा सकता। उनके मुताबिक राहुल गांधी सत्ता के सामने झुकने के बजाय देश के गरीब, वंचित, युवा और शोषित वर्गों की आवाज उठाते हैं।करन माहरा ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल भाजपा की कथित संवेदनशीलता और उसके “दोहरे चरित्र” को लेकर है। उन्होंने हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद सामने आए कथित ‘शुद्धिकरण’ प्रकरण का जिक्र करते हुए भाजपा से सवाल किया कि क्या दलित समाज से आने वाले किसी राष्ट्रीय नेता की मौजूदगी से कोई मंच “अपवित्र” हो जाता है।उन्होंने पूछा कि क्या यही भाजपा की सामाजिक समानता की सोच है और क्या यही उसका “सबका साथ” का दावा है?माहरा ने कहा कि जिस मानसिकता को लेकर भाजपा को देश से माफी मांगनी चाहिए थी, उसी प्रकरण के संदर्भ में अब राहुल गांधी पर दलित समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाकर राजनीति की जा रही है। उन्होंने इसे विडंबनापूर्ण स्थिति करार दिया।कांग्रेस नेता ने कहा कि एफआईआर और मुकदमों के जरिए राहुल गांधी या कांग्रेस की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। पार्टी सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी आवाज आगे भी उठाती रहेगी।

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