कलेक्ट्रेट कूच कर रहे किसानों ने तोड़ी बैरिकेडिंग
सिंचाई बिजली बिल माफी, 300 यूनिट मुफ्त विद्युत, भूमिधरी अधिकार सहित कई मांगों को लेकर सैकड़ों किसानों का प्रदर्शन
रुद्रपुर। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर शुक्रवार को प्रदेश भर में हो रहे किसानों के धरना प्रदर्शन के क्रम में आज जिलेभर से पहुंचे सैकड़ों किसानों ने रुद्रपुर में जोरदार प्रदर्शन किया। किसान संगठनों के आ“वान पर किसान कलेक्ट्रेट कूच के लिए एकत्र हुए और नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट की ओर रवाना हुए। कलेक्ट्रेट एवं विकास भवन जाने वाले मुख्य मार्ग पर बैरिकेडिंग के साथ भारी पुलिस फोर्स तैनात होने के कारण किसानों को रास्ते में रोक दिया गया। इससे नाराज किसान नैनीताल हाईवे के किनारे धरने पर बैठ गए और जमकर नारेबाजी की। किसानों का कहना था कि हाईवे के किनारे धरना देने से यातायात प्रभावित हो रहा है, इसलिए उन्हें कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट तक जाने दिया जाए, जहां वे शांतिपूर्वक अपना धरना जारी रख सकें। प्रशासन की ओर से तत्काल कोई पहल नहीं होने पर उनका आक्रोश बढ़ता गया। कुछ देर तक हाईवे किनारे धरना देने के बाद किसान एकजुट होकर लकड़ी की बनी बैरिकेडिंग को तोड़ते हुए कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट तक पहुंच गए। मुख्य गेट पर ताला लगा हुआ था और बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात था। इसके बाद किसानों ने मुख्य गेट के बाहर ही दरिया बिछाते हुए धरना शुरू कर दिया और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करते रहे। किसानों की प्रमुख मांगों में सिंचाई के लिए इस्तेमाल होने वाली बिजली के बिल माफ करना और प्रत्येक किसान को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध कराना शामिल है। इसके साथ ही किसानों ने लंबे समय से काबिज भूमि वर्ग क और ख पर भूमिधरी अधिकार देने सहित कई अन्य मांग उठाई। किसानों का कहना था कि बढ़ती लागत के कारण खेती करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलना जरूरी है। किसान नेताओं ने भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र का हवाला देते हुए सरकार पर वादािखलाफी का आरोप लगाया। उनका कहना था कि भाजपा ने चुनाव के दौरान किसानों को सिंचाई के लिए मुफ्त विद्युत उपलब्ध कराने और बिजली के बिल माफ करने का वादा किया था। किसान नेताओं के अनुसार, यूपी सहित अन्य प्रदेशों में इन घोषणाओं पर अमल किया जा रहा है, लेकिन उत्तराखंड में किसानों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने सरकार से चुनावी वादे को पूरा करते हुए किसानों के सिंचाई बिजली बिल माफ करने और मुफ्त बिजली की व्यवस्था लागू करने की मांग की। धरना स्थल पर किसान नेताओं ने आंदोलन को शांतिपूर्ण बनाए रखने की अपील की। किसान यूनियन पदाधिकारियों ने कहा कि यह तीन दिवसीय धरना-प्रदर्शन है और संगठन के अग्रिम आदेश तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि किसानों की मांगों पर सरकार और प्रशासन को गंभीरता से विचार करना चाहिए। प्रदर्शन में प्रदेश के विभिन्न किसान संगठनों से जुड़े पदाधिकारी और जिलेभर से सैकड़ों किसान शामिल रहे। किसानों के कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद प्रशासन भी सक्रिय हो गया। इस दौरान कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के क्षेत्र में भारी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात रहा। पुलिस अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए थे और बैरिकेडिंग के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई। समाचार लिखे जाने तक कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट के बाहर किसानों का धरना शांतिपूर्ण ढंग से जारी था। प्रशासन की ओर से किसान प्रतिनिधियों से वार्ता करने की तैयारी की जा रही थी।


