धामी की सबसे बड़ी पहल : जनशिकायतों पर सख्ती, अब हर अधिकारी होगा जवाबदेह
सात दिन में समाधान के निर्देश, फर्जी निस्तारण पर होगी कार्रवाई,सुशासन की दिशा में बड़ा कदम
देहरादून। उत्तराखंड में सुशासन को नई दिशा देने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। सरकार ने पहली बार जनशिकायतों के निस्तारण को सीधे अधिकारियों की जवाबदेही से जोड़ते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब केवल फाइलों का निस्तारण नहीं बल्कि जनता की समस्याओं का वास्तविक समाधान ही अधिकारियों के कामकाज का पैमाना होगा। मुख्यमंत्री का यह फैसला राज्य में जवाबदेह और जन कल्याणकारी शासन व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। सचिवालय में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1905 की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने लंबित जनशिकायतों फर्जी निस्तारण और अधिकारियों की लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि जनता की समस्याओं के समाधान में किसी भी स्तर पर हीलाहवाली स्वीकार नहीं की जाएगी। जिन विभागों में शिकायतों का निस्तारण संतोषजनक नहीं है वहां जिम्मेदारी तय करते हुए अधिकारियों को सात दिन के भीतर सभी लंबित मामलों का समाधान करने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से पेयजल विभाग और जल जीवन मिशन से जुड़ी बड़ी संख्या में लंबित शिकायतों पर नाराजगी जताई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय के भीतर शिकायतों का समाधान नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी। बैठक में यह भी सामने आया कि कुछ शिकायतों को वास्तविक समाधान किए बिना बंद कर दिया गया या उन्हें स्पेशल क्लोज डिमांड सजेशन जैसी श्रेणियों में डालकर लंबित मामलों की संख्या कम दिखाने का प्रयास किया गया। मुख्यमंत्री ने इसे गंभीर मामला बताते हुए ऐसे सभी मामलों की जांच कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनता को भ्रमित करने या आंकड़ों की बाजीगरी करने वाले अधिकारियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जिन अधिकारियों की शिकायतों के निस्तारण में शून्य प्रतिशत प्रगति है उन्हें तत्काल कारण बताओ नोटिस जारी किए जाएं। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक और विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही विभागाध्यक्षों और जिलाधिकारियों को नियमित समीक्षा कर शिकायतों का समयबद्ध समाधान कराने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई। जनसुनवाई व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने प्रत्येक सोमवार को जिला मंडल और शासन स्तर पर समाधान दिवस आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि समाधान दिवस केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रभावी मंच बने और इसकी नियमित निगरानी भी की जाए। सेवानिवृत्त कर्मचारियों के मामलों को लेकर भी मुख्यमंत्री ने संवेदनशील रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि किसी भी कर्मचारी को सेवानिवृत्ति के बाद पहले ही महीने से पेंशन मिलनी चाहिए। इसमें देरी होने पर संबंधित विभागाध्यक्ष की जवाबदेही तय की जाएगी। समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने स्वयं कई शिकायतकर्ताओं से फोन पर बातचीत कर उनकी समस्याओं की जानकारी ली। जिन मामलों में शिकायतों का समाधान नहीं हुआ था वहां संबंधित जिलाधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। इससे यह स्पष्ट संदेश गया कि सरकार केवल कागजी रिपोर्ट पर भरोसा नहीं करेगी बल्कि जमीनी हकीकत की भी सीधे समीक्षा करेगी। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री धामी इससे पहले भी भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही के मामलों में आईएएस और पीसीएस अधिकारियों सहित कई अफसरों पर कार्रवाई कर चुके हैं। अब जनशिकायतों के निस्तारण को भी अधिकारियों की जवाबदेही से जोड़कर उन्होंने साफ कर दिया है कि सुशासन केवल नारा नहीं बल्कि सरकार की कार्यशैली है। मुख्यमंत्री की यह पहल उत्तराखंड में जवाबदेह प्रशासन और जनकल्याणकारी शासन की मजबूत नींव साबित हो सकती है।
