ग्रामीण को निवाला बनाने वाला बाघ पकड़ा
अल्मोड़ा (उद संवाददाता)। अल्मोड़ा जिले के सल्ट क्षेत्र में कार्बेट और कालागढ़ टाइगर रिजर्व से लगे तड़म गांव में ग्रामीण की जान लेने वाले बाघ को आिखरकार वन विभाग की टीम ने पकड़ लिया। पूर्व निर्धारित रणनीति के तहत विशेषज्ञ शूटर दल ने कई दिनों तक बाघ की गतिविधियों और व्यवहार का अध्ययन करने के बाद उसे ट्रैंकुलाइज कर सुरक्षित कैद कर लिया। इसके साथ ही हिंसक वन्यजीव बाघ था या गुलदार, इसको लेकर बना संशय भी दूर हो गया है। विशेषज्ञों के अनुसार तड़म गांव में पिछले एक माह के दौरान हुई दो घटनाओं में यही वयस्क नर बाघ शामिल था। देर रात बेहोश किए जाने के बाद उसे रामनगर स्थित कार्बेट टाइगर रिजर्व के रेस्क्यू सेंटर भेज दिया गया। डीएफओ दीपक सिंह ने उम्मीद जताई कि तड़म गांव के लोगों को अब मानव वन्यजीव संघर्ष से राहत मिलेगी। बताया गया कि तल्ला सल्ट क्षेत्र के मोहान रेंज अंतर्गत तड़म गांव के बौरड़ा तोक में तीन मई की शाम 55 वर्षीय महिपाल सिंह मेहरा पर बाघ ने उस समय हमला कर दिया था जब वह अपनी पत्नी के साथ घास लेकर घर लौट रहे थे। घर के पास खेत में हुए इस हमले में उनकी मौत हो गई थी। घटना के बाद ग्रामीण लगातार दावा कर रहे थे कि हमलावर बाघ ही था। वहीं वन विभाग ड्रोन और ट्रैप कैमरों की मदद से हिंसक वन्यजीव की पहचान में जुटा था। वन क्षेत्रधिकारी गंगाशरण के नेतृत्व में वन कर्मियों की 30 सदस्यीय तीन टीमें लगातार दिन रात गश्त कर रही थीं। टीमों द्वारा क्षेत्र में वन्यजीवों की गतिविधियों और उनके व्यवहार पर नजर रखी जा रही थी। इस दौरान कार्बेट टाइगर रिजर्व के विशेषज्ञों की भी मदद ली गई। वन विभाग के अनुसार मोहान सफारी जोन के ऊपरी क्षेत्र से तड़म गांव की ओर बाघ की गतिविधियां लगातार सामने आने के बाद विशेषज्ञ शूटर दल ने इलाके में डेरा डाल दिया था। बीती रात आबादी की ओर बढ़ रहे बाघ को ट्रैंकुलाइज कर काबू में लिया गया। घटना के बाद ग्रामीणों की मांग पर वन विभाग ने मोहान सफारी जोन को भी बंद करा दिया था। ग्रामीणों का कहना था कि सफारी के चलते मानवीय गतिविधियां बढ़ने से बाघ और गुलदार आबादी की ओर आ रहे हैं। अब बाघ पकड़े जाने के बाद जंगल क्षेत्र में जिप्सियों के प्रवेश पर लगी रोक हटने की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं बाघ प्रभावित क्षेत्र में पिछले पांच दिनों से बंद तीन सरकारी विद्यालय भी दोबारा खोले जाएंगे। वन क्षेत्रधिकारी गंगाशरण ने बताया कि एहतियात के तौर पर क्षेत्र में गश्त जारी रहेगी। साथ ही बच्चों को वन कर्मियों की निगरानी में स्कूल पहुंचाने और वापस घर भेजने की व्यवस्था भी आगे जारी रखी जाएगी।
