सिस्टम की पेचीदगियों में ‘उलझी’ योजना: उत्तराखंड वासियों को नहीं मिल पा रहा पीएम राहत योजना का पूरा लाभ
लगातार बढ़ रही सड़क दुर्घटनाएं,लागू होने से अब तक राज्य में केवल 29 लोगों को ही मिल पाया है योजना का लाभ
देहरादून- उत्तराखंड में लगातार बढ़ रही सड़क दुर्घटनाएं शासन प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। यद्यपि, सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाए जाने को लेकर प्रदेश के परिवहन विभाग की ओर से लगातार उपाय किए जा रहे हैं ,बावजूद इसके सड़क दुर्घटनाओं और उससे होने वाला मौतों का आंकड़ा साल दर साल बढ़ता जा रहा है। ऐसे में भारत सरकार द्वारा सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों को तत्काल उपचार कराए जाने को लेकर आरंभ की गई पीएम राहत योजना, जिसका उद्देश्य सड़क हादसों के घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पताल में निशुल्क इलाज का लाभ देना था, उत्तराखंड में सड़क दुर्घटना में घायल होने वाले लोगों के लिए एक बड़ी सौगात साबित हो सकती थी, लेकिन सिस्टम की सुस्ती एवं क्रियान्वयन की कतिपय पेचीदगियों के चलते उपरोक्त योजना का लाभ उत्तराखंड में मात्र 29 लोगों को ही मिल पाया है। जबकि, इस योजना के शुरू होने के बाद से अब तक सैकड़ों लोग सड़क हादसे में घायल हो चुके हैं। उत्तराखंड के संदर्भ में उपरोक्त योजना के आंकड़ों पर दृष्टिपात करें तो योजना के लागू होने के बाद उत्तराखंड में करीब 400 सड़क दुर्घटनाएं हुई है, जिसमें करीब 250 लोगों की मौत और 450 लोग घायल हुए हैं। बावजूद इसके उत्तराखंड में इस योजना के लागू होने के बाद यानी 13 फरवरी से 3 जून 2026 तक मात्र 29 लोग ही इस योजना का लाभ उठा पाए हैं। योजना का लाभ पाने वाले सौभाग्यशाली घायलों में से 13 देहरादून,10 चमोली, 4 उधम सिंह नगर तथा एक- एक नैनीताल एवं उत्तरकाशी जिले से हैं। हैरानी की बात तो यह है कि जिन 29 लोगों को सड़क दुर्घटना के बाद जिन नजदीकी अस्पतालों में चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हुई है, उन अस्पतालों को अभी तक कोई भी भुगतान नहीं हो पाया है। हासिल जानकारी के मुताबिक सभी 29 घायलों के इलाज में खर्च कुल 8,11,189 रुपए का बिल अस्पतालों की ओर से तैयार कर उत्तराखंड राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण की ओर भेजा गया है, लेकिन अभी तक किसी भी अस्पताल को भुगतान नहीं हो पाया है। ज्ञात हो कि पीएम राहत योजना के तहत सड़क दुर्घटना में पीड़ितों को अधिकतम 1.5 लाख रुपए का कैशलेस इलाज 7 दिनों तक, जबकि कुछ मामलों में 24 घंटे तक स्टेबलाइजेशन केयर और जीवन-घातक स्थिति में 48 घंटे तक के उपचार व्यवस्था है। खास बात तो यह है कि घायलों के अस्पतालों में इलाज के बाद खर्च का भुगतान मोटर व्हीकल एक्सीडेंट फंड, बीमा योगदान या फिर सरकार के बजट से किए जाने की व्यवस्था की गई है फिर भी अस्पतालों का समय से भुगतान न हो पाने के कारण यह योजना अपने अस्तित्व में आने की तिथि 13 फरवरी 2026 से अब तक उत्तराखंड में आशा अनुरूप आकर नहीं ले पाई है।
