सैन्य सम्मान के साथ अग्निवीर को दी अंतिम विदाई
टिहरी (उद संवाददाता)। जम्मू में तैनात उत्तराखंड के अग्निवीर रोहित रावत का शुक्रवार को उनके पैतृक घाट बिनपुला में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर उन्हें अंतिम सलामी दी। वीर जवान को अंतिम विदाई देने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी और आसपास के क्षेत्रें के लोग पहुंचे। पूरे क्षेत्र में गमगीन माहौल रहा और नम आंखों से लोगों ने वीर सपूत को अंतिम विदाई दी। टिहरी जिले के घनसाली क्षेत्र स्थित मेंदू सिंधवाल गांव निवासी रोहित रावत एक वर्ष पूर्व अग्निवीर योजना के तहत भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद इसी वर्ष जनवरी में उनकी पहली तैनाती भारतीय सेना की 20 गढ़वाल राइफल्स में जम्मू में हुई थी। देश सेवा का उनका सपना पूरा हुआ ही था कि डड्ढूटी के दौरान हुई एक दुखद घटना ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। जानकारी के अनुसार 10 जून की सुबह जम्मू में डड्ढूटी के दौरान रोहित रावत को उनकी सर्विस राइफल से गोली लग गई। गोली लगने से वह गंभीर रूप से घायल हो गए और उपचार से पहले ही उनकी मृत्यु हो गई। हालांकि गोली किन परिस्थितियों में चली, इसका कारण अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। सेना ने मामले की जांच शुरू कर दी है। घटना की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। रोहित के पिता सुरेंद्र सिंह दुबई के एक होटल में कार्यरत हैं, जबकि उनका छोटा भाई मोहित कक्षा नौ का छात्र है। बड़े बेटे की असमय मौत की खबर से परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है। पूरे मेंदू सिंधवाल गांव में शोक की लहर दौड़ गई। सैन्य औपचारिकताएं पूरी होने के बाद गुरुवार देर शाम रोहित रावत का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर उनके पैतृक गांव पहुंचा। जैसे ही सेना का वाहन गांव पहुंचा, बड़ी संख्या में ग्रामीण अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। पूरा क्षेत्र रोहित रावत अमर रहें और भारत माता की जय के नारों से गूंज उठा। लोगों ने पुष्प अर्पित कर अपने वीर सपूत को श्रद्धांजलि दी। शुक्रवार सुबह पैतृक घाट बिनपुला में सेना की टुकड़ी ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ उन्हें अंतिम सलामी दी। इसके बाद पूरे राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम यात्र में शामिल लोगों ने देश के लिए समर्पित इस युवा सैनिक को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके बलिदान को सदैव याद रखने का संकल्प व्यक्त किया।
