जंतर-मंतर पर सीजेपी आंदोलन जारी: अनशन कर रही उत्तराखंड की शोधार्थी नेहा बोरा की बिगड़ती सेहत ने बढ़ाई चिंता
20 जुलाई को दिल्ली में “छात्र संसद मार्च” निकाला जाएगा अभिषेक दीपके ने संभाली अनशन की कमान
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी (CJP) के बैनर तले चल रहा आंदोलन लगातार जारी है। आंदोलनकारियों के अनुसार, 18 जुलाई की सुबह दिल्ली पुलिस ने आमरण अनशन पर बैठे समाजसेवी सोनम वांगचुक को स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बीच जंतर-मंतर से हटाकर अस्पताल में भर्ती कराया। वह करीब 20 दिनों से भूख हड़ताल पर थे। इसी बीच, उत्तराखंड की जेएनयू शोधार्थी नेहा बोरा की सेहत को लेकर भी चिंता बनी हुई है। आंदोलन से जुड़े लोगों का दावा है कि वह पिछले 20 दिनों से केवल पानी के सहारे अनशन कर रही हैं। वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के बाद सीजेपी के संयोजक अभिषेक दीपके ने आमरण अनशन शुरू कर दिया है। आंदोलनकारियों का कहना है कि उनकी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। आंदोलनकारियों ने बताया कि 20 जुलाई को दिल्ली में “छात्र संसद मार्च” निकाला जाएगा। इसके माध्यम से वे अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास करेंगे। सीजेपी ने देशभर के छात्रों, युवाओं और नागरिकों से आंदोलन के समर्थन में शामिल होने की अपील भी की है। आंदोलन फिलहाल जंतर-मंतर पर जारी है और प्रदर्शनकारी अपनी मांगों के समाधान तक संघर्ष जारी रखने की बात कह रहे हैं। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे सीजेपी (CJP) आंदोलन के तहत आमरण अनशन लगातार 20वें दिन भी जारी है। आंदोलन में शामिल उत्तराखंड की 25 वर्षीय शोधार्थी नेहा बोरा की सेहत को लेकर चिंता बढ़ गई है। चिकित्सकीय जांच में उनकी शारीरिक स्थिति गंभीर बताई गई है। जानकारी के अनुसार, नेहा बोरा केवल पानी के सहारे अनशन कर रही हैं। वह जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में पीएचडी की छात्रा हैं और आंदोलन में शामिल कई अन्य अनशनकारियों के साथ अपनी मांगों को लेकर डटी हुई हैं।मुंबई से पहुंचीं चिकित्सक डॉ. अंजलि छाबड़िया ने जंतर-मंतर पर नेहा की स्वास्थ्य जांच की। उनके अनुसार, नेहा का ब्लड शुगर स्तर काफी कम हो गया है, शरीर की ऊर्जा क्षमता लगातार घट रही है और संक्रमण का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। डॉक्टर ने चेतावनी दी कि यदि जल्द उचित चिकित्सकीय देखभाल नहीं मिली तो उनकी स्थिति और गंभीर हो सकती है।आंदोलन में शामिल लोगों का कहना है कि जंतर-मंतर पर करीब 25–30 लोग विभिन्न स्तरों पर भूख हड़ताल में शामिल हैं। प्रदर्शनकारी शिक्षा, जवाबदेही और अपने अन्य मुद्दों को लेकर सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।नेहा बोरा के समर्थन में कई सामाजिक कार्यकर्ता और छात्र संगठन भी अपनी चिंता व्यक्त कर रहे हैं। समर्थकों का कहना है कि वह अपने व्यक्तिगत भविष्य की परवाह किए बिना आंदोलन में डटी हुई हैं, जबकि चिकित्सक लगातार उनके स्वास्थ्य पर निगरानी बनाए हुए हैं।फिलहाल प्रशासन या संबंधित सरकारी पक्ष की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आंदोलनकारी अपनी मांगों के समाधान तक अनशन जारी रखने की बात कह रहे हैं।
