चारधाम यात्रा में उमड़ा आस्था का जनसैलाब : 35 दिनों में 20 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
एक दिन में पहुंचे रिकॉर्ड 96 हजार यात्री
देहरादून। चारधाम यात्रा में इस बार आस्था का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ पड़ा है। बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग रही हैं। हालांकि यात्रा व्यवस्थाएं सुचारु होने से श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है। शनिवार को एक दिन में रिकॉर्ड 96 हजार 116 श्रद्धालुओं ने चारधाम के दर्शन किए। वहीं अब तक कुल दर्शनार्थियों की संख्या 20 लाख 76 हजार 553 के पार पहुंच चुकी है। अकेले केदारनाथ धाम में 8 लाख 11 हजार से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। चारधाम यात्रा का शुभारंभ 19 अप्रैल को हुआ था और 35 दिनों के भीतर ही यात्रा ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। धामी सरकार के कुशल यात्रा प्रबंधन और व्यवस्थाओं के चलते श्रद्धालुओं का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। यात्रा मार्गों पर सुरक्षा, स्वास्थ्य, यातायात और आपदा प्रबंधन को लेकर विशेष इंतजाम किए गए हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्र में मौसम की संवेदनशीलता को देखते हुए आपदा प्रबंधन तंत्र को अलर्ट मोड पर रखा गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मौसम प्रतिकूल होने की स्थिति में भी श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा में किसी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यात्रियों की सुरक्षित और सुगम यात्रा सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। अब तक के आंकड़ों के अनुसार केदारनाथ धाम में 8 लाख 11 हजार 923 श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। बद्रीनाथ धाम में 5 लाख 56 हजार 437, गंगोत्री धाम में 3 लाख 52 हजार 162 और यमुनोत्री धाम में 3 लाख 56 हजार 31 श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। शनिवार को बद्रीनाथ धाम में सर्वाधिक 32 हजार 219 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। वहीं केदारनाथ में 29 हजार 787, यमुनोत्री में 16 हजार 213 तथा गंगोत्री धाम में 17 हजार 897 श्रद्धालु पहुंचे। इधर विश्व प्रसिद्ध तीर्थस्थल श्री हेमकुंट साहिब के कपाट भी शनिवार को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाटोद्घाटन के पहले दिन 6 हजार 605 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। पंच प्यारों की अगुवाई में सिख श्रद्धालुओं का पहला जत्था शनिवार सुबह रवाना होकर हेमकुंट साहिब पहुंचा। ‘बोले सो निहाल, सत श्री अकाल’ के जयकारों से पूरी लोकपाल घाटी भक्तिमय माहौल में डूबी रही।
