उत्तराखंड समेत पांच राज्यों में समय से पहले चुनाव की संभावना
उत्तराखंड में कुंभ और देश भर में जनगणना को देखते हुए तेज हुई चर्चाएं, राजनीतिक दलों ने बढ़ाई सक्रियता
देहरादून। उत्तराखंड समेत उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव तय समय से पहले कराए जाने की संभावनाओं ने राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। राष्ट्रीय जनगणना के दूसरे चरण और आगामी बड़े आयोजनों को देखते हुए चुनावी कार्यक्रम में बदलाव की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन भाजपा और विपक्षी दलों ने संभावित परिस्थितियों को देखते हुए अपनी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। सूत्रें के अनुसार इन पांच राज्यों में अगले वर्ष फरवरी-मार्च के दौरान विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। वहीं केंद्र सरकार अगले वर्ष फरवरी में राष्ट्रीय जनगणना का दूसरा चरण शुरू करने जा रही है। ऐसे में चुनाव और जनगणना दोनों के लिए बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों की आवश्यकता होगी। यही कारण है कि चुनावी कार्यक्रम में बदलाव की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। उत्तराखंड के संदर्भ में यह मामला और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्ष 2027 में हरिद्वार में प्रस्तावित कुंभ मेले को देखते हुए राज्य सरकार और प्रशासन पहले से ही दीर्घकालिक तैयारियों में जुटा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि चुनावी कार्यक्रम में बदलाव होता है तो उसके पीछे जनगणना के साथ- साथ कुंभ की तैयारियां भी एक महत्वपूर्ण कारण हो सकती हैं। सूत्रें के अनुसार भाजपा नेतृत्व ने विभिन्न राज्यों की इकाइयों को संगठनात्मक तैयारियों में तेजी लाने के संकेत दिए हैं। बूथ समितियों को सक्रिय करने, संगठनात्मक नियुक्तियों को पूरा करने और चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने पर जोर दिया जा रहा है। उत्तराखंड में भी पार्टी संगठन जिला और मंडल स्तर पर गतिविधियां बढ़ा रहा है। वहीं संभावित जल्द चुनाव की चर्चाओं ने विपक्षी दलों को भी सक्रिय कर दिया है। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और अन्य विपक्षी दल संगठन विस्तार और जनसंपर्क अभियानों को धार देने में जुट गए हैं। राजनीतिक दलों का मानना है कि यदि चुनाव तय समय से पहले होते हैं तो उन्हें अपनी रणनीति और उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया भी जल्द पूरी करनी होगी। हालांकि चुनाव की तारीखों को लेकर अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन सियासी गलियारों में चल रही चर्चाओं ने राजनीतिक दलों को अलर्ट मोड में ला दिया है। यदि चुनाव तय समय से पहले होते हैं तो उत्तराखंड समेत पांचों राज्यों में राजनीतिक समीकरण भी अपेक्षा से पहले बनने-बिगड़ने शुरू हो जाएंगे। ऐसे में आने वाले कुछ महीने इन राज्यों की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं
