उत्तराखंड कांग्रेस में भूचाल : हरीश रावत ने की कांग्रेस के दोनों पदों से हटने की पेशकश, ‘प्रमाण हैं तो सीबीआई, ईडी या पुलिस को दें’
एक दशक बाद ईडी की कार्रवाई ‘चुनाव से पहले नरेटिव बनाने का प्रयास’
देहरादून। देहरादून। उत्तराखंड की सियासत में उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब यूकेएसएसएससी की वर्ष 2016 की भर्ती परीक्षा में कथित धांधली से जुड़े मामले की जांच के बीच पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कांग्रेस के दो महत्वपूर्ण पदों से हटने का ऐलान कर दिया। रावत ने सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी कर कहा कि उनके किसी सहयोगी से जुड़े मामले की वजह से पार्टी के भ्रष्टाचार विरोधी संघर्ष पर कोई असर न पड़े, इसलिए उन्होंने यह फैसला लिया है। यूकेएसएसएससी की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (वीपीडीओ) परीक्षा-2016 में कथित अनियमितताओं का मामला करीब एक दशक बाद एक बार फिर सुर्खियों में है। मामले की जांच पहले विजिलेंस ने शुरू की थी, जिसके बाद वर्ष 2023 में जांच एसटीएफ को सौंपी गई। एसटीएफ की जांच में आयोग के तत्कालीन अधिकारियों समेत कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के पूर्व ओएसडी चंदन सिंह जीना के आवास पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई के बाद हरीश रावत ने बड़ा बयान दिया है। रावत ने कहा कि जीना उनके ओएसडी रहे हैं और उन्होंने उनके साथ विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं। हालांकि, उन्होंने जीना पर लगे परीक्षा भर्ती में गड़बड़ी के आरोपों पर अविश्वास जताया है। रावत ने कहा कि टीवी पर जीना के घर से भारी मात्रा में नकदी और ज्वैलरी बरामद होने की खबर सामने आ रही है। उन्होंने कहा कि बरामदगी के तथ्यों और उनके स्रोत का वास्तविक खुलासा जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा।उन्होंने जीना को “निहायत सज्जन, विनम्र और काम करने वाला व्यक्ति” बताते हुए कहा कि यदि ग्राम सेवकों की भर्ती में ओएमआर शीट के साथ छेड़छाड़ करने या किसी अन्य तरह की गलती के प्रमाण सामने आते हैं तो वह ऐसे कृत्य के लिए लज्जित होंगे। हालांकि, उन्होंने कहा कि फिलहाल उन्हें इन आरोपों पर विश्वास नहीं है।
‘चुनाव से पहले नरेटिव बनाने का प्रयास’
हरीश रावत ने ईडी की कार्रवाई को राजनीतिक संदर्भ से जोड़ते हुए कहा कि उत्तराखंड चुनाव में भारी दांव लगा हुआ है। उन्होंने अपने पुराने अंदाज का जिक्र करते हुए कहा कि जब लोग उनसे चुनाव की तारीख पूछते थे तो वह मजाक में कहते थे कि चुनाव तब होंगे, जब सीबीआई उनके दरवाजे पर दस्तक देगी। रावत ने कहा कि इस बार उनके घर पर नहीं, बल्कि उनके एक सहयोगी के घर पर दस्तक देकर एक नरेटिव बनाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और कांग्रेस कार्यकर्ता भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं और ऐसे समय में उनके किसी भी कृत्य से पार्टी के संघर्ष को कमजोरी नहीं मिलनी चाहिए।
कांग्रेस के दो पदों से हटने की घोषणा
रावत ने कहा कि उन्होंने अपने इष्ट देवता का स्मरण करने के बाद एक बड़ा निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि वह फिलहाल किसी सरकारी पद पर नहीं हैं, लेकिन उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी के सदस्य और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि वह इन दोनों पदों से हटना चाहते हैं, ताकि पार्टी के भ्रष्टाचार विरोधी संघर्ष में उनकी वजह से कोई कमजोरी न आए।
भर्ती प्रक्रिया पर उठे सवालों पर मांगी माफी
अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के गठन का जिक्र करते हुए रावत ने कहा कि आयोग का गठन राज्य के युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखकर किया गया था। उनके अनुसार, उनके कार्यकाल में लोक सेवा आयोग को समय पर परीक्षाएं कराने के लिए बाध्य किया गया और विभिन्न क्षेत्रों में भर्ती बोर्डों का गठन किया गया। रावत ने दावा किया कि उनके करीब तीन वर्ष के कार्यकाल में 42 हजार से अधिक सरकारी पदों पर भर्तियां हुईं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यदि नियुक्तियों और भर्ती प्रक्रिया के दौरान उनसे कोई “एरर ऑफ जजमेंट” हुआ है तो वह इसके लिए उत्तराखंड की जनता से क्षमा मांगते हैं। उन्होंने कहा कि नियुक्तियों और परीक्षाओं में गड़बड़ी राज्य की आने वाली पीढ़ी के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। यदि जाने-अनजाने में उनसे कोई ऐसा कृत्य हुआ है, जिससे राज्य के युवाओं के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा हो, तो वह स्वयं को इसके लिए दंड का पात्र मानते हैं।
‘प्रमाण हैं तो सीबीआई, ईडी या पुलिस को दें’
पूर्व मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक अपील करते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति के पास नियुक्तियों के मामलों में उनके हस्तक्षेप या संलिप्तता के कोई प्रमाण हैं तो वे प्रमाण सीबीआई, ईडी या राज्य पुलिस को उपलब्ध कराए जाएं। रावत ने कहा कि बड़े दायित्व संभालने वाले प्रत्येक व्यक्ति को भ्रष्टाचार के प्रलोभनों से बचना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि यदि उनसे कोई चूक हुई है तो कानून को उन्हें दंडित करना चाहिए।ईडी की कार्रवाई और रावत के इस बयान के बाद अब मामले की जांच के साथ-साथ इसके राजनीतिक प्रभाव को लेकर भी उत्तराखंड की सियासत में चर्चा तेज हो गई है।
