September 11, 2026

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पंजाबी गौरव सम्मेलन में दिखा भाजपा का सियासी संदेश: धामी नेतृत्व पर भरोसा, 2027 के लिए जुटने का आह्वान

रुद्रपुर, उद संवाददाता। रुद्रपुर में आयोजित पंजाबी गौरव सम्मेलन को भले ही सामाजिक आयोजन के रूप में प्रस्तुत किया गया, लेकिन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की मौजूदगी और उनके संबोधन में उठाए गए मुद्दों ने इसके राजनीतिक मायने भी स्पष्ट कर दिए। तराई की राजनीति में प्रभावशाली पंजाबी और सिख समाज को केंद्र में रखकर आयोजित इस सम्मेलन के जरिए भाजपा ने एक ओर विभाजन के बाद तराई को बसाने में समाज के योगदान को सम्मान दिया, वहीं दूसरी ओर नई पीढ़ी को राष्ट्रवादी और विकास के एजेंडे से जोड़ने का संदेश भी दिया।भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड में पार्टी की मजबूती पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि धामी सरकार ने प्रदेश के विकास को नई दिशा दी है, जिससे जनता का विश्वास मजबूत हुआ है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से मुख्यमंत्री के नेतृत्व में आगे बढ़ने और 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को दोबारा सत्ता में लाने के संकल्प के साथ जुटने का आह्वान किया।नबीन ने सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय को भी भाजपा की ताकत बताया। उनके इस संदेश ने सम्मेलन को सीधे तौर पर आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़ दिया।

तराई की राजनीति में पंजाबी-सिख समाज महत्वपूर्ण

उधमसिंह नगर की राजनीति में पंजाबी और सिख समाज लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। खेती, व्यापार, उद्योग और सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से इस समाज ने तराई की अर्थव्यवस्था और सामाजिक ढांचे को प्रभावित किया है। रुद्रपुर, किच्छा, गदरपुर, बाजपुर, काशीपुर, सितारगंज और खटीमा तक इसके व्यापक प्रभाव को देखते हुए राजनीतिक दलों के लिए इस समाज को साधना महत्वपूर्ण माना जाता है।ऐसे में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का सीधे इस समाज के बीच पहुंचना पार्टी की सामाजिक और राजनीतिक रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विभाजन के दर्द से राष्ट्र निर्माण तक

नितिन नबीन ने अपने संबोधन में विभाजन की पीड़ा से लेकर तराई के विकास तक की कहानी को सामने रखा। उन्होंने कहा कि विभाजन की सबसे बड़ी पीड़ा पंजाबी और सिख समाज ने झेली, लेकिन विस्थापन के बाद समाज ने मेहनत और पुरुषार्थ से तराई को समृद्ध बनाया।भाजपा ने इस भावनात्मक जुड़ाव के जरिए समाज की पुरानी पीढ़ी के संघर्ष को वर्तमान पीढ़ी की उपलब्धियों और राष्ट्र निर्माण की भावना से जोड़ने का प्रयास किया।सम्मेलन में गुरु परंपरा, नानकमत्ता साहिब, हेमकुंड साहिब, साहिबजादों का बलिदान, करतारपुर साहिब कॉरिडोर और वीर बाल दिवस जैसे विषयों को भी प्रमुखता दी गई। धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत को राष्ट्र निर्माण के व्यापक विमर्श से जोड़ना भाजपा की राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।

1984 के दंगों का मुद्दा भी उठा

सम्मेलन में 1984 के सिख विरोधी दंगों का उल्लेख भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहा। नितिन नबीन ने 1984 की पीड़ा और एसआईटी के गठन का जिक्र किया। भाजपा लंबे समय से इस मुद्दे को कांग्रेस के खिलाफ अपने राजनीतिक विमर्श में उठाती रही है।रुद्रपुर में इस मुद्दे का उल्लेख उन पंजाबी-सिख परिवारों तक राजनीतिक संदेश पहुंचाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है, जिनकी स्मृतियों में 1984 की घटनाएं आज भी मौजूद हैं।

नई पीढ़ी को जोड़ने की कोशिश

करतारपुर साहिब कॉरिडोर, साहिबजादों के बलिदान और वीर बाल दिवस जैसे विषयों के साथ केंद्र सरकार के फैसलों को सामने रखकर भाजपा ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि धार्मिक और ऐतिहासिक भावनाओं से जुड़े विषयों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिया जा रहा है।वहीं सम्मेलन में नशे के खिलाफ अभियान को भी प्रमुखता मिली। नितिन नबीन ने पंजाब और युवा पीढ़ी में बढ़ती नशे की समस्या को गंभीर चुनौती बताते हुए समाज से नशामुक्ति अभियान में अग्रणी भूमिका निभाने का आह्वान किया।राजनीतिक दृष्टि से यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि तराई की नई पीढ़ी के बीच शिक्षा, रोजगार, कारोबार, नशामुक्ति और विकास जैसे विषय तेजी से प्रभावी हो रहे हैं। भाजपा ने इन मुद्दों को धार्मिक और राष्ट्रवादी विमर्श के साथ जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुंच बनाने की कोशिश की।

धामी सरकार की सराहना से संगठन को संदेश

सम्मेलन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कार्यशैली की राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा की गई सराहना भी राजनीतिक रूप से अहम रही। इससे यह संदेश गया कि राष्ट्रीय नेतृत्व उत्तराखंड में धामी सरकार के साथ-साथ संगठनात्मक रणनीति को भी मजबूती देने के पक्ष में है।तराई के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों से जुड़े भाजपा नेताओं और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी ने भी सम्मेलन के राजनीतिक महत्व को बढ़ाया। रुद्रपुर से लेकर काशीपुर, गदरपुर, बाजपुर और अन्य क्षेत्रों के नेताओं की उपस्थिति ने इसे व्यापक संगठनात्मक मंच का रूप दिया।

2027 के लिए सामाजिक समीकरण साधने की कवायद

तराई की राजनीति में सामाजिक समीकरण चुनावी परिणामों को प्रभावित करते रहे हैं। ऐसे में पंजाबी-सिख समाज के बीच राष्ट्रीय अध्यक्ष का सीधा संवाद भाजपा की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें पार्टी अपने पारंपरिक सामाजिक आधार को मजबूत रखने के साथ नई पीढ़ी और बदलते सामाजिक समीकरणों में भी अपनी पकड़ बढ़ाना चाहती है।पंजाबी गौरव सम्मेलन इस लिहाज से केवल अतीत के गौरव का स्मरण नहीं रहा। विभाजन की पीड़ा, तराई के निर्माण में योगदान, धार्मिक आस्था, 1984 का दर्द, केंद्र सरकार के फैसले, नशामुक्ति और विकसित भारत जैसे अलग-अलग मुद्दों को एक साझा राजनीतिक-सामाजिक संदेश में पिरोया गया। अब सम्मेलन का वास्तविक राजनीतिक असर इस बात से तय होगा कि भाजपा इन संदेशों को समाज के बीच कितनी मजबूती से पहुंचा पाती है और पंजाबी-सिख समाज की नई पीढ़ी को अपने राजनीतिक एवं सामाजिक विमर्श से कितना जोड़ पाती है।

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