साइबर ठगी रोकने को पुलिस और बैंकों में बेहतर समन्वय पर जोर
देहरादून । मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में पुलिस विभाग और विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधियों के साथ साइबर एवं वित्तीय धोखाधड़ी की रोकथाम तथा लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण को लेकर समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक में साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों को देखते हुए पुलिस और बैंकिंग संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल एवं त्वरित सूचना साझा करने पर जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने कहा कि पिछले तीन चार वर्षों में साइबर एवं वित्तीय अपराधों में वृद्धि को गंभीरता से लेते हुए बैंकों के साथ होने वाली बैठकों में इस विषय को स्थायी एजेंडा बनाया जाए। बैंक अधिकारियों एवं कर्मचारियों को साइबर ठगी के मामलों को लेकर नियमित प्रशिक्षण और जागरूकता भी दी जाए। उन्होंने साइबर ठगी के मामलों में रोकी गई धनराशि को पीड़ितों को वापस दिलाने की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। कहा कि बैंकों को पीड़ितों को सक्रिय रूप से आवश्यक जानकारी उपलब्ध करानी चाहिए, ताकि वे समय पर धनराशि की बहाली के लिए आवेदन कर सकें। साथ ही बैंकों में शिकायत निस्तारण व्यवस्था को मजबूत कर मामलों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने को कहा गया। मुख्य सचिव ने म्यूल अकाउंट्स की पहचान और उन पर कार्रवाई के लिए विशेष अभियान चलाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस और बैंक आपसी समन्वय से संदिग्ध खातों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई करें। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठकों में भी साइबर एवं वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों को नियमित एजेंडा में शामिल करने तथा लंबित प्रकरणों की समीक्षा कर उनका शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण और पीड़ितों को शीघ्र राहत देने के लिए पुलिस, बैंकिंग संस्थानों और संबंधित विभागों के बीच निरंतर समन्वय, सूचना साझा करने और जवाबदेही आवश्यक है। बैठक में सचिव शैलेश बगौली, आईजी डॉ. नीलेश आनन्द भरणे, अपर सचिव गृह तृप्ति भट्ट सहित प्रदेश के विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
