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29 दुकानों के खिलाफ न्यायालय जाने की तैयारी: पुराने टैक्सी स्टैंड स्थित कीमती सरकारी भूमि का मामला फिर चर्चा में

अतिक्रमण की 2017 में तैयार हो गई थी रिपोर्ट
किच्छा। शहर के पुराने टैक्सी स्टैंड क्षेत्र में स्थित आरआर विभाग की भूमि पर कथित अतिक्रमण का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। वर्ष 2017 में राजस्व विभाग द्वारा तैयार की गई जांच रिपोर्ट को आधार बनाया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार अब उक्त भूमि पर बनी 29 दुकानों के खिलाफ पुनः न्यायालय की शरण लेने की तैयारी की जा रही है।जानकारी के अनुसार वर्ष 2017 में तत्कालीन जिला प्रशासन के निर्देश पर पुराने टैक्सी स्टैंड स्थित आरआर विभाग की भूमि का सीमांकन और सर्वेक्षण कराया गया था। जांच के दौरान तैयार रिपोर्ट में 29 दुकानदारों द्वारा भूमि पर कब्जा किए जाने का उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट में संबंधित भूमि की स्थिति, सीमाएं तथा कब्जाधारकों का विवरण भी दर्ज किया गया था। बताया जाता है कि रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे संबंधित विभागों और अधिकारियों को उपलब्ध करा दिया गया था।इसके बावजूद लगभग नौ वर्ष बीत जाने के बाद भी मामला किसी निर्णायक निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाया है। यही कारण है कि अब इस प्रकरण को लेकर एक बार फिर कानूनी लड़ाई की तैयारी शुरू हो गई है। सूत्रों की मानें तो आरआर विभाग की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के उद्देश्य से जल्द ही न्यायालय में याचिका दायर की जा सकती है। यदि ऐसा होता है तो यह मामला एक बार फिर न्यायिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बन जाएगा।मामले की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि उत्तराखंड हाईकोर्ट ने जनहित याचिका संख्या 192/2024 में सरकारी भूमि पर हुए अतिक्रमणों के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए थे। न्यायालय ने जिला प्रशासन को ऐसे मामलों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद प्रदेश के कई हिस्सों में सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए अभियान भी चलाए गए, लेकिन किच्छा के पुराने टैक्सी स्टैंड स्थित इस भूमि का मामला अब भी लंबित माना जा रहा है।शहर के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र में स्थित होने के कारण आरआर विभाग की यह भूमि काफी मूल्यवान मानी जाती है। जानकारों के अनुसार वर्तमान बाजार मूल्य के आधार पर इसकी कीमत करोड़ों रुपये में आंकी जा सकती है। ऐसे में इस भूमि की स्थिति और इससे जुड़े विवाद पर स्थानीय लोगों की निगाहें लगातार बनी हुई हैं।अब जबकि मामले को लेकर दोबारा न्यायालय जाने की तैयारी की चर्चा सामने आ रही है, लोगों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि वर्ष 2017 में तैयार हुई रिपोर्ट और वर्ष 2024 में हाईकोर्ट द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के बाद भी आखिर इस प्रकरण में अंतिम कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी। यदि मामला न्यायालय पहुंचता है तो आने वाले दिनों में इस पर प्रशासन और संबंधित विभागों का पक्ष भी महत्वपूर्ण रहेगा।

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