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भक्तिमय हुआ बदरीनाथ धाम : पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने दिया सनातन एकता, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण का संदेश

बदरीनाथ (उद संवाददाता)। बद्रीनाथ धाम में बाबा बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने 21 दिनों की एकांत साधना के बाद पांच दिवसीय श्री सत्यनारायण कथा का शुभारंभ किया। श्री बदरीनाथ धाम में पिछले पांच दिनों से आयोजित बागेश्वर धाम सरकार की श्री बदरीनाथ महिमा एवं श्री सत्यनारायण कथा का रविवार को विधिवत समापन हो गया। कथा के अंतिम दिन रिमझिम बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा स्थल पहुंचे और आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के प्रवचनों का श्रवण कर धर्म लाभ प्राप्त किया। रविवार सुबह बागेश्वर धाम सरकार के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री खाक चौक स्थित आश्रम से बाबा योगेश्वर दास बालकनाथ महाराज के सानिध्य में कथा स्थल अराइवल प्लाजा पहुंचे। इस दौरान पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ उनका भव्य स्वागत किया, जबकि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हाथ जोड़कर सभी का अभिवादन स्वीकार करते हुए आशीर्वाद प्रदान किया। कथा के अंतिम दिन अपने संबोधन में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने धैर्य, संयम और सनातन संस्कृति के मूल्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए धैर्य सबसे बड़ा साधन है। फ्सब्र ही शबरी हैय् का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि धैर्य और विश्वास के बल पर व्यक्ति कठिन से कठिन लक्ष्य को भी प्राप्त कर सकता है।उन्होंने उत्तराखंड चारधाम यात्रा और विशेष रूप से बदरीनाथ धाम की महत्ता का उल्लेख करते हुए श्रद्धालुओं से तीर्थ स्थलों की पवित्रता, स्वच्छता और गरिमा बनाए रखने का आ“वान किया। उन्होंने कहा कि बदरीनाथ धाम केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, आस्था और आध्यात्मिक परंपरा का जीवंत प्रतीक है। इसके संरक्षण और संवर्धन की जिम्मेदारी प्रत्येक श्रद्धालु की है।पांच दिवसीय कथा के समापन अवसर पर श्रद्धालुओं ने विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया तथा भगवान बदरीविशाल के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। दिनभर कथा स्थल पर भक्ति और श्रद्धा का वातावरण बना रहा। बारिश के बीच भी श्रद्धालुओं का उत्साह देखने लायक रहा और जयकारों से पूरा बदरीनाथ धाम भक्तिमय माहौल में सराबोर रहा।धार्मिक आयोजन के सफल समापन के साथ धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने सनातन एकता, तीर्थ संरक्षण और आध्यात्मिक जागरण का संदेश देते हुए श्रद्धालुओं से धर्म, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने का आहवान किया।


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