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बनभूलपुरा हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की डिफॉल्ट जमानत, जावेद सिद्दीकी और अरशद अयूब को सरेंडर के आदेश

नई दिल्ली। उत्तराखंड के बहुचर्चित बनभूलपुरा हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपियों को मिली डिफॉल्ट जमानत रद्द कर दी है। शीर्ष अदालत ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें जावेद सिद्दीकी और अरशद अयूब को डिफॉल्ट बेल दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि हाईकोर्ट ने तथ्य और कानून दोनों के स्तर पर गंभीर त्रुटि की है। कोर्ट ने पाया कि जांच एजेंसी पर सुस्ती का आरोप लगाना उचित नहीं था, क्योंकि मामले की गंभीरता और व्यापकता को देखते हुए जांच तेजी से की जा रही थी। रिकॉर्ड के अनुसार, 90 दिनों के भीतर 65 गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे, जबकि हाईकोर्ट ने इसे मात्र 12 गवाहों तक सीमित मानकर टिप्पणी की थी।यह मामला 8 फरवरी 2024 को हल्द्वानी के बनभूलपुरा थाना क्षेत्र में हुई हिंसा, आगजनी और सार्वजनिक संपत्ति को भारी नुकसान से जुड़ा है। घटना में पुलिस स्टेशन भवन को भी निशाना बनाया गया था और कई गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था, जिनमें यूएपीए भी शामिल है।सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपियों ने समय रहते निचली अदालत के आदेशों को चुनौती नहीं दी और काफी देरी से हाईकोर्ट का रुख किया। इस बीच जांच पूरी हो चुकी थी और चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी थी, जिससे आरोपियों का डिफॉल्ट जमानत का अधिकार समाप्त हो गया।अदालत ने दोनों आरोपियों को दो सप्ताह के भीतर ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि वे नियमित जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं, जिस पर कानून के अनुसार विचार किया जाएगा। इस फैसले को राज्य सरकार के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, वहीं बनभूलपुरा हिंसा मामले में न्यायिक प्रक्रिया को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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