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बारिश के बदलते पैटर्न से ‘डेंजर जोन में उत्तराखंड’ : नदियों के किनारे बसे होने के कारण उत्तराखंड के सभी पौराणिक, धार्मिक एवं बड़े शहर खतरे की जद में

देहरादून। पिछले कुछ वर्षों से उत्तराखंड में बारिश का पैटर्न लगातार बदल रहा है। बारिश का यह  बदलता पैटर्न राज्य में अतिवृष्टि जनित प्राकृतिक आपदाओं के खतरे को साल दर साल बढ़ा रहा है। बारिश के इस बदले पैटर्न से पर्यावरण विज्ञानी एवं मौसम एक्सपर्ट बेहद चिंतित है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार प्रदेश में मानसून की दो ब्रांचों, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाले मानसून के फ्रलो के टकराने से उत्तराखंड में कम समय में ज्यादा बारिश देखने को मिल  रही है। कम समय में अधिक बारिश, नदियों के बहाव को तो विकराल बनाती ही है, साथ ही इस दौरान पहाड़ की मिट्टठ्ठी भी तेजी से कटती है, जो की आगे चलकर भूस्खलन एवं जल प्रलय जैसी प्राकृतिक आपदा का कारण बनती है। बीते दिनों उत्तरकाशी के धराली क्षेत्र में आई प्राकृतिक आपदा मौसम के इसी बदले पैटर्न का ही नतीजा है ।देखा जा रहा है  प्रदेश में हर साल मानसून के सीजन में अतिवृष्टि की घटनाएं सामने आ रही हैं ।मौसम विभाग ने इस साल भी मानसून में सामान्य से ज्यादा बारिश होने की साठ फीसदी संभावना जताई है ,लिहाजा चालू मानसून सीजन उत्तराखंड के लिए बेहद चुनौती पूर्ण है। मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के पूर्व निदेशक और वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक डॉ. बिक्रम सिंह के अनुसार  पिछले कुछ सालों में उत्तराखंड में मानसून सीजन में बारिश तो सामान्य या सामान्य से पांच से दस फीसदी ज्यादा एवं एक समान दर्ज की जा रही है,लेकिन रेनी डे  की संख्या घटी है। ऐसा देखा जा रहा है कि जितनी बारिश आमतौर पर एक सप्ताह में होती थी, वह तीन दिन में हो जा रही है। साथ ही, जो मानसून सीजन जून से सितंबर तक एक समान होता था, वह अब जुलाई एवं अगस्त में ज्यादा रहता है। डॉ.सिंह के मुताबिक उत्तराखंड में अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाले मानसून की दो ब्रांच रहती है। इन दिनों दोनों सिस्टम का फ्रलो आपस में टकरा रहा है, इस कारण उत्तराखंड में ज्यादा बारिश हो रही है। मौसम विज्ञान केंद्र के प्रभारी निदेशक डॉ. थपलियाल के मुताबिक जुलाई माह में प्रदेशभर में सामान्य 417.8 एमएम से 16 फीसदी कम 349.9 एमएम बारिश हुई। जून-जुलाई माह में प्रदेश में मानसून की बारिश सामान्य 594.6 एमएम से एक फीसदी कम 590.6 एमएम हुई है। दो माह में प्रदेश के आठ जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई । वहीं , बागेश्वर, देहरादून, टिहरी गढ़वाल में ही सामान्य से अधिक बारिश हुई है।अगस्त माह में अब तक उत्तराखंड में सामान्य 69.7 एमएम की तुलना में 35 फीसदी अधिक 94।1 एमएम बारिश हुई है। मौसम विज्ञान केंद्र के प्रभारी निदेशक डॉ। रोहित थपलियाल ने कि उत्तरकाशी में बीते मंगलवार को कुछ ही घंटे में 30 एमएम तक बारिश दर्ज की गई, जो कि जल प्रलय की सबसे प्रमुख वजह बनी। धराली में आई भयानक बाढ़ ने नदी-नालों और गाड़ गदेरों के किनारे बसे शहरों, नगरों और कस्बों की सुरक्षा पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। ये बहस इतनी गंभीर है कि अब नदियों से 100 मीटर दूर बसावट होने की बात जोर पकड़ने लगी है। जिस धराली मार्केट में भयंकर आपदा आई वो खीरगंगा नदी से तट पर ही था। इतने नजदीक कि जरा सा जलस्तर बढ़ने पर खीरगंगा इनको छूते हुए बहती थी। ज्ञात हो कि उत्तराखंड में एक नहीं कई धराली जैसे शहर, नगर और कस्बे हैं ,जो ऐसी ही किसी आपदा का इंतजार करते प्रतीत हो रहे हैं।

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