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‘साइबर ठगों’ के मकड़ जाल में ‘तराई की तरुणाई’ साइबर ठगी की रकम को रफा दफा करने में सीएससी सेंटर के संचालकों का भी बड़ा रोल

– अर्श-
मोटे कमीशन का लालच देकर साइबर अपराध के सिंडिकेट में शामिल किये जा रहे किशोर 
रुद्रपुर। उधम सिंह नगर जिले में किशोरों में ऑनलाइन गेमिंग तथा सूखे एवं रासायनिक नशे की लत से पहले से ही परेशान अभिभावकों के सामने अब एक नई मुसीबत आन खड़ी हुई है, क्योंकि उधम सिंह नगर जिले के युवकों को पैसों का लालच देकर बड़े ही सुनियोजित तरीके से साइबर ठगी के मकड़ जाल में फंसाया जा रहा है। साइबर ठगी के इस समूचे सिलसिले में साइबर ठगों के स्थानीय एजेंट द्वारा गरीब एवं जरूरतमंद युवाओं का पहले तो बैंक में खाता खुलवाया जाता है उसके बाद उन खातों से साइबर ठगी की रकम का लेनदेन किया जाता है और बदले में खाताधारी युवकों को मोटा कमीशन दिया जाता है। सारे सिलसिले को इतनी होशियारी से अंजाम दिया जाता है कि पुलिस कार्यवाही की स्थिति में मुख्य कर्ताधर्ता पूरी तरह सुरक्षित बच जाता है और साइबर ठगी के लिए अपना खाता उपलब्ध कराने अथवा बैंक खाता किराए से देने वाले युवक पुलिस की गिरफ्रत में आ जाते हैं। पिछले दिनों जिला मुख्यालय से लगे दिनेशपुर में दिल्ली पुलिस की साइबर सेल की दबिश और दिनेशपुर कस्बे के पांच युवकों की गिरफ्रतारी साइबर ठगों की इसी कार्य प्रणाली को स्पष्टतया रेखांकित करती है। उपरोक्त प्रकरण में गिरफ्रतार युवकों के परिजनों को इस बात की बिल्कुल भी भनक नहीं थी कि उनके लाडले क्या गुल खिला रहे हैं ? लेकिन जब पुलिस ने कार्रवाई की और असलियत सामने आई, तो उनके पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई और वे रोते बिलखते नजर आए। उधम सिंह नगर जनपद में इससे पूर्व भी ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। कुछ मामलों में तो जनपद में संचालित सीएससी सेंटर ही साइबर अपराधियों की टूलकिट की तरह काम करते पाए गए हैं। उत्तरांचल दर्पण खोजबीन में सामने आया है कि कई सीएससी सेंटर भी साइबर अपराधियों के संपर्क में होते हैं और वह ठगी की रकम को इधर-उधर करने में साइबर ठगों की सहायता करते हैं। कई बार तो सीएससी सेंटर के संचालक साइबर ठगी की रकम किसी सामान्य या अनजान खाता धारक के खाते में ऑनलाइन डाल देते हैं। इसके अलावा कुछ मामलों में तो सीएससी सेंटर के संचालक व्यक्तियों के अशिक्षित अथवा कम शिक्षित होने का भी फायदा उठाते देखे गए हैं। दिनेशपुर में ही सीएससी सेंटर की धोखाधड़ी का शिकार हुए विकास कुमार ने उत्तरांचल दर्पण को बताया कि उन्होंने लगभग 8 महीने पहले अनन्या कंप्यूटर के नाम से संचालित सीएससी सेंटर के संचालक को अपने खाते में पचास हजार रुपया डालने के लिए कमीशन सहित नकदी भुगतान किया था, मगर सीएससी सेंटर के संचालक ने उनके खाते में साइबर Úॉड के जरिए प्राप्त राशि डाल दी। जिसके चलते अगले ही दिन उनका खाता सीज हो गया। मजे की बात तो यह है कि जब विकास कुमार ने सीएससी सेंटर के संचालक से अपनी रकम वापस करने और वापस न करने की स्थिति में कानूनी कार्यवाही की बात की तो सीएससी सेंटर का संचालक सेंटर स्थाई रूप से बंद करके रफू चक्कर हो गया। वहीं जिला न्यायालय के प्रैक्टिशनर लॉयर दिनेश गुप्ता एडवोकेट ने उत्तरांचल दर्पण से हुई चर्चा के दौरान बताया कि पहले उनके पास आने वाले साइबर अपराध से संबंधित अधिकतर मामले बिहार और दक्षिण भारत की पृष्ठभूमि के होते थे, लेकिन अब तो देश के विभिन्न क्षेत्रों के साइबर ठगी से संबंधित मामले उनके पास पहुंच रहे हैं। उनके अनुसार ज्यादातर मामले धोखे से या अनजाने में खाते में रकम ट्रांसफर से संबंधित होते हैं तथा कुछ मामले खाते को किराए पर देने से भी संबंधित होते है।

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