राहुल गांधी बोले- ‘पैसा दो और पेपर लो’ की व्यवस्था नहीं चलेगी,शिक्षा संस्थानों को राजनीतिक हस्तक्षेप से रखा जाये मुक्त
देहरादून में छात्रों की गूंज कार्यक्रम में राहुल गांधी ने पेपर लीक पर सरकारी तंत्र पर उठाये सवाल
देहरादून (उद ब्यूरो)। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने देहरादून में आयोजित श्छात्रों की गूंजश् कार्यक्रम में देशभर में बढ़ते पेपर लीक मामलों को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश में पेपर लीक का एक संगठित तंत्र बन चुका है, जहां हर पेपर का रेट तय है, पैसा दो और पेपर लो यह व्यवस्थ नहीं चलेगी। शुक्रवार को जौलीग्रांट पहुंचने के बाद राहुल गांधी ने दिवंगत कांग्रेस नेता अमर मेहता को श्रद्धांजलि दी और उनके परिजनों से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक ली और शाम को रेसकोर्स स्थित बन्नू स्कूल में छात्रों से संवाद किया। कार्यक्रम के दौरान उत्तराखंड, बिहार और अन्य राज्यों के प्रतियोगी छात्रों ने पेपर लीक से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। उत्तराखंड पटवारी भर्ती, बिहार शिक्षक भर्ती और अन्य परीक्षाओं के अभ्यर्थियों ने बताया कि वर्षों की मेहनत पेपर लीक की वजह से बेकार हो गई। अभ्यर्थियों ने पेपर लीक से जुड़ा अपना दर्द साझा किया। छात्रो से संवाद करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि देश में पेपर लीक का मेन्यू कार्ड तैयार हो चुका है। उनके अनुसार, नीट, आईआईटी, उत्तराखंड पटवारी भर्ती, बिहार शिक्षक भर्ती और अन्य परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लाखों रुपये में बेचे जाते हैं। उन्होंने कहा कि इसका सबसे बड़ा नुकसान उन लाखों ईमानदार छात्रों को होता है, जिनके परिवार उनकी तैयारी पर वर्षों की मेहनत और लाखों रुपये खर्च करते हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं के लिए रोजगार के पांच प्रमुख रास्ते हैं, लेकिन अधिकांश अवसर सीमित हो चुके हैं।

सरकारी नौकरियां ही एक उम्मीद हैं, लेकिन वहां भी पारदर्शिता की जगह पेपर लीक और भ्रष्टाचार ने व्यवस्था को कमजोर कर दिया है। राहुल गांधी ने छात्र-केंद्रित और पूरी तरह सुरक्षित परीक्षा प्रणाली लागू करने की वकालत करते हुए कहा कि परीक्षाएं कराने की जिम्मेदारी सरकार की होनी चाहिए, निजी कंपनियों की नहीं। उन्होंने शिक्षा संस्थानों को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त रखने, कुलपतियों की निष्पक्ष नियुक्ति, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और पेपर लीक करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि पेपर लीक से प्रभावित छात्रों को उचित मुआवजा भी मिलना चाहिए। राहुल गांधी ने कहा कि देश में पेपर लीक का पूरा मेन्यू तैयार है। उनके अनुसार, नीट का पेपर 40 लाख रुपये, आईआईटी का 15 लाख रुपये, उत्तराखंड पटवारी भर्ती का 15 लाख रुपये, बिहार बेसिक शिक्षक भर्ती का 10 लाख रुपये और सब-इंस्पेक्टर भर्ती का पेपर 25 लाख रुपये में बेचा जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग पैसे दे सकते हैं, उनके मोबाइल तक माफिया प्रश्नपत्र पहुंचा देते हैं, जबकि इसका सबसे बड़ा नुकसान उन ईमानदार और मध्यम वर्गीय छात्रों को होता है, जिनके परिवार उनकी तैयारी पर लाखों रुपये खर्च करते हैं। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के पांच प्रमुख रास्ते हैं विनिर्माण, उद्यमिता, कॉर्पाेरेट, निजी क्षेत्र और सरकारी नौकरी। राहुल गांधी ने दावा किया कि इनमें से चार रास्ते लगभग बंद हो चुके हैं और सरकारी नौकरियों में भी मेहनत और पारदर्शिता की बजाय पेपर लीक और भ्रष्टाचार के जरिए प्रवेश मिल रहा है। राहुल गांधी ने छात्र-केंद्रित और पूरी तरह सुरक्षित परीक्षा प्रणाली लागू करने की वकालत करते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली में रैंडमाइजेशन होना चाहिए और शिक्षा संस्थानों को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल का विश्वविद्यालयों और शिक्षा संस्थानों पर कब्जा नहीं होना चाहिए तथा कुलपतियों की नियुक्ति निष्पक्ष होनी चाहिए। राहुल गांधी ने कहा कि यह कार्यक्रम किसी राजनीतिक भाषण का मंच नहीं, बल्कि छात्रों की समस्याओं को सुनने और परीक्षा प्रणाली में सुधार पर चर्चा करने का प्रयास है। उन्होंने छात्रों से सीधे संवाद करते हुए कहा कि पेपर लीक केवल परीक्षा नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के सपनों और उनके भविष्य पर हमला है। कार्यक्रम में नीट पेपर लीक प्रकरण के बाद आत्महत्या करने वाली देहरादून की छात्रा रिया थापा के पिता राजेश गुरुंग भी मौजूद रहे। उन्होंने भावुक होकर बताया कि उनकी बेटी परीक्षा के बाद बेहद खुश थी, लेकिन पेपर लीक की खबर मिलने के बाद पूरी तरह टूट गई और बाद में उसने आत्महत्या कर ली। उन्होंने कहा कि परिवार आज भी न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है।
अभ्यर्थियों ने पेपर लीक से जुड़ा अपना दर्द साझा किया
देहरादून। छात्रों की गूंज कार्यक्रम में राहुल गांधी के सामने कई प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों ने पेपर लीक से जुड़ा अपना दर्द साझा किया। मंच पर मनीष कांडपाल, आरती भंडारी, बिहार के आशु नारंग सहित अन्य अभ्यर्थियों ने बताया कि वर्षों की मेहनत के बावजूद पेपर लीक की घटनाओं ने उनका भविष्य और मनोबल दोनों प्रभावित किया है।उत्तराखंड पटवारी भर्ती परीक्षा के अभ्यर्थियों ने कहा कि परीक्षा देकर बाहर निकलने के बाद उन्हें पता चला कि प्रश्नपत्र लीक हो चुका है। उन्होंने कहा कि वर्षों की तैयारी के बाद भी पेपर लीक होने से उनकी मेहनत पर पानी फिर गया और उनका मनोबल टूट गया। वहीं, बिहार से आए छात्र आशु नारंग ने बताया कि एक ही भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र तीन बार लीक हो चुका है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बार-बार ऐसी घटनाएं हो रही हैं तो इस समस्या का स्थायी समाधान क्या है। छात्रों ने निष्पक्ष और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग की। कार्यक्रम में ऑनलाइन गणित शिक्षक अभिनय शर्मा ने भी परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि शिक्षा व्यवस्था में लगातार गड़बड़ियां हो रही हैं तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने नई शिक्षा नीति के अधूरे क्रियान्वयन और परीक्षा संबंधी आपत्तियों के लिए छात्रों से शुल्क वसूले जाने पर भी नाराजगी जताई।

