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विधानसभा विशेष सत्र में गूंजा महिला आरक्षण: अधिनियम को रोकने पर सदन में गरजे धामी, विपक्ष ने किया हंगामा

देहरादून। लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के विफल होने के बाद उत्तराखंड विधानसभा में इस मुद्दे पर चर्चा के लिए बुलाए गए विशेष सत्र में जोरदार हंगामा देखने को मिला। वंदेमातरम के साथ शुरू हुई कार्यवाही के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मातृशक्ति के अधिकारों को लेकर अपना पक्ष रखा और केंद्र सरकार के प्रयासों के समर्थन की अपील की। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में राज्य और देश के निर्माण में महिलाओं के योगदान को याद करते हुए कहा कि देश की आधी आबादी को उनका पूरा अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि मातृशक्ति को सशक्त बनाना विकसित भारत की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम है और सरकार इस दिशा में लगातार कार्य कर रही है। सदन में जारी हंगामे के बीच मुख्यमंत्री ने विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि मातृशक्ति वंदना योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, जल जीवन मिशन, उज्ज्वला योजना और लखपति दीदी योजना जैसी पहलों ने महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि आज महिलाओं को ड्रोन संचालन तक का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में भी आगे बढ़ रही हैं। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि अतीत में गरीब बेटियों के हितों को नजरअंदाज किया गया, जबकि वर्तमान सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में जेंडर बजट में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और बेटियों के कल्याण के लिए बड़े स्तर पर प्रावधान किए गए हैं। चारधाम यात्रा का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यात्रा की शानदार शुरुआत हुई है और भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, लेकिन कुछ लोग इस पर अनावश्यक विरोध दर्ज कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े विषयों को राजनीति से दूर रखना चाहिए। महिला आरक्षण के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाया गया नारी शक्ति वंदन अधिनियम एक ऐतिहासिक कदम था, जिसका उद्देश्य महिलाओं को विधायिका में उचित प्रतिनिधित्व देना है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने राजनीतिक कारणों से इस पहल का समर्थन नहीं किया। मुख्यमंत्री के इस बयान पर सदन में विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी और सरकार पर गलत तथ्य प्रस्तुत करने का आरोप लगाया, जिसके चलते हंगामा और तेज हो गया। मुख्यमंत्री ने ऐतिहासिक उदाहरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के इतिहास में नारी शक्ति के अनेक प्रेरणादायक उदाहरण रहे हैं। उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई, सावित्री बाई फुले, कल्पना चावला, तीलू रौतेली, जिया रानी, रानी कर्णावती और गौरा देवी का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं ने हर दौर में अपनी क्षमता और साहस का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि एक शिक्षित महिला न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में सदन से अपील की कि उत्तराखंड विधानसभा एकमत से केंद्र सरकार के इस प्रयास का समर्थन करे और महिला सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर राजनीति से ऊपर उठकर निर्णय लिया जाए। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति के सम्मान और अधिकार सुनिश्चित करने के लिए सभी दलों को एकजुट होकर कार्य करना चाहिए। सत्र के दौरान विपक्ष ने भी सरकार को घेरने की रणनीति अपनाई और महिला आरक्षण के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। विपक्ष का कहना था कि सरकार इस विषय पर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास कर रही है, जबकि वास्तविकता कुछ और है। सत्र के दौरान लगातार हंगामे के बीच भी चर्चा जारी रही और महिला आरक्षण का मुद्दा सदन में केंद्र में बना रहा। समाचार लिखने तक सदन में चर्चा जारी थी।

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