फिर खोखले साबित हुए ‘विश्व स्तरीय धार्मिक पर्यटन’ के सरकारी दावे
मध्यमहेश्वर धाम पहुंचने वाले श्रद्धालु मौत का खतरा उठाने को मजबूर,आज तक नहीं बन पाया 2013 की आपदा में बहा पुल, ट्राली के सहारे उफनाती मधु गंगा नदी पार कर रहे शिव भक्त
रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड में चार धाम यात्रा आरंभ होने के पूर्व लगभग हर साल ही राज्य के धार्मिक पर्यटन को विश्व स्तरीय बनाने के सरकारी दावे बढ़ चढ़कर किए जाते हैं, लेकिन तकरीबन हर पर्यटन सीजन में प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंचने वाले मार्ग की बदहाली और बदइंतजामी उपरोक्त सरकारी दावे को पूरी तरह खोखला साबित कर देती है। उल्लेखनीय है कि दुनिया भर में द्वितीय केदार भगवान मध्यमहेश्वर के रूप में प्रतिष्ठित उत्तराखंड के बाबा मध्यमहेश्वर धाम जैसे महत्वपूर्ण तीर्थ मार्ग पर मूलभूत सुविधाओं का अच्छा खासा अभाव है। लिहाजा, द्वितीय केदार भगवान मध्यमहेश्वर धाम की यात्रा श्रद्धालुओं के लिए आस्था के साथ-साथ कठिन परीक्षा भी बन जाती है। वह इसलिए क्योंकि, धाम के प्रमुख आधार शिविर बनातोली में मधु गंगा नदी पर निर्माणाधीन झूला पुल पिछले तीन वर्षों से अधूरा पड़ा है। जिसके चलते स्थानीय ग्रामीणों और हजारों श्रद्धालुओं को ट्रॉली और अस्थायी लकड़ी की पुलिया के सहारे आज भी नदी पार करनी पड़ती है। ज्ञात हो कि बरसात के दौरान मधु गंगा का जलस्तर बढ़ते ही नदी पर निर्मित अस्थायी पुलिया बह जाती है। जिसके बाद ट्रॉली ही आवाजाही का एकमात्र साधन रह जाती है। ऐसे में प्रतिदिन लोग अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर होते हैं। इस दौरान किसी बड़े हादसे की आशंका बराबर बनी रहती है । सावन माह के आरंभ होने के साथ ही बाबा मध्यमहेश्वर के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में ट्रॉली से नदी पार करने के लिए दोनों ओर लंबी कतारें लग रही हैं। श्रद्धालुओं को घंटों तक अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। उफनती नदी के ऊपर रस्सी के सहारे ट्रॉली से सफर करना श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2013 की आपदा के बाद इस स्थान पर स्थायी झूला पुल की आवश्यकता महसूस की गई थी। पुल निर्माण शुरू होने पर सुरक्षित आवागमन की उम्मीद जगी थी, लेकिन वर्षों बाद भी निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका। हर मानसून में अस्थायी लकड़ी की पुलिया बह जाने से ग्रामीणों, स्कूली बच्चों और तीर्थयात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सरकारी दावे के अनुसार यदि झूला पुल समय पर तैयार हो गया होता तो श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को आज जान जोखिम में डालकर यात्रा नहीं करनी पड़ती। बदरी-केदार मंदिर समिति के पूर्व सदस्य शिव सिंह रावत एवं मप्रहेश्वर घाटी के तमाम जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों के नुमाइंदों के अनुसार मध्यमहेश्वर यात्रा क्षेत्र की आर्थिकी का प्रमुख आधार है। इसलिए सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यात्रा मार्ग का अधूरा पुल न केवल स्थानीय लोगों के दैनिक जीवन को प्रभावित कर रहा है, बल्कि क्षेत्र की धार्मिक पर्यटन व्यवस्था और तीर्थाटन की छवि पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। उधर , लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता आरपी नैथानी का दावा है कि बनातोली में झूला पुल का निर्माण कार्य पिछले दिसंबर माह में शुरू किया गया था। वर्तमान में मधु गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से पुल निर्माण सामग्री मौके तक पहुंचाने में भारी कठिनाई आ रही है। पैदल मार्ग से सामग्री पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है,लेकिन यात्रा सीजन के कारण मार्ग पर अधिक आवाजाही होने से कार्य प्रभावित हो रहा है। उनके अनुसार बरसात समाप्त होते ही पुल निर्माण युद्धस्तर पर कराया जाएगा।
