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गदरपुर पालिका की करोड़ों की टेंडर प्रक्रिया निरस्त : उत्तरांचल दर्पण ने उठाया था भ्रष्टाचार का प्रकरण

उत्तरांचल दर्पण की खबरों का असरः शासन की शर्तों के पालन में अनियमितताएं के साथ-साथ सही कार्यों की भी निकाली गई थीं निविदाएं
गदरपुर/उधमसिंहनगर। गदरपुर नगर पालिका द्वारा निकाली गई करोड़ों रुपये की विकास कार्यों से संबंधित टेंडर प्रक्रिया आिखरकार निरस्त कर दी गई है। बताया जा रहा है कि निविदा प्रक्रिया में शासन द्वारा निर्धारित कई महत्वपूर्ण शर्तों का पालन नहीं किया गया था, जिसके चलते पूरे मामले पर सवाल खड़े हो गए थे। उत्तरांचल दर्पण ने नगर पालिका में कथित भ्रष्टाचार, नियमों की अनदेखी और टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं को प्रमुखता से उजागर किया था, जिसके बाद यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ था। नगर पालिका द्वारा करीब 8 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों के लिए 93 निविदाएं आमंत्रित की गई थीं। इन टेंडरों को लेकर शुरू से ही विवाद खड़ा हो गया था। विपक्षी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि बिना पर्याप्त बजट के टेंडर जारी किए गए और शासन की वित्तीय शर्तों की अनदेखी की गई। उत्तरांचल दर्पण ने अपनी खबरों में यह भी उजागर किया था कि कुछ स्थानों पर पहले से ठीक हालत के कार्यों की भी दोबारा निविदाएं निकाल दी गई थीं। वार्ड नंबर-3 स्थित पुरातन चामुंडा मंदिर के पास पहले से मौजूद इंटरलॉकिंग टाइल्स के बावजूद वहां पुनः निर्माण कार्य के लिए टेंडर जारी किया जाना भी चर्चाओं का विषय बना था। वहीं कांग्रेस नेताओं द्वारा भी पत्रकार वार्ता कर नगर पालिका प्रशासन और अध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। कांग्रेस नगर अध्यक्ष सिद्धार्थ भुसरी समेत अन्य नेताओं ने टेंडर प्रक्रिया में पक्षपात, वित्तीय अनियमितता और शासनादेशों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए मामले की जांच की मांग की थी। टेंडर प्रक्रिया को लेकर यह सवाल भी उठाए गए थे कि क्या शासन द्वारा अनिवार्य किए गए दस्तावेजों और पात्रता संबंधी शर्तों का पूरी तरह पालन किया गया था। साथ ही बिना पर्याप्त बजट के करोड़ों रुपये की निविदाएं जारी किए जाने पर भी सवाल खड़े हुए थे। लगातार उठ रहे सवालों, विपक्ष के आरोपों और मीडिया में सामने आए तथ्यों के बाद अब नगर पालिका द्वारा उक्त टेंडर प्रक्रिया को निरस्त करने के लिए मजबूर होना पड़ा। क्षेत्र में इसे उत्तरांचल दर्पण की लगातार की गई पड़ताल और जनदबाव का परिणाम माना जा रहा है। नगर क्षेत्र में अब चर्चा इस बात की है कि यदि टेंडर प्रक्रिया में वास्तव में खामियां थीं, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी। लोगों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि भविष्य में इस प्रकार की अनियमितताओं की पुनरावृत्ति न हो सके।

उत्तरांचल दर्पण ने उठाया था भ्रष्टाचार का प्रकरण

गदरपुर। उत्तरांचल दर्पण ने शुरू से ही इस पूरे प्रकरण को प्रमुखता से उठाया था। आम जनता और जागरूक पाठकों से मिली शिकायतों एवं उपलब्ध कराए गए तथ्यों के आधार पर समाचार पत्र ने टेंडर प्रक्रिया में संभावित अनियमितताओं, शासन की शर्तों की अनदेखी तथा पहले से पूर्ण हो चुके कार्यों की दोबारा निविदा निकाले जाने जैसे मामलों को लगातार उजागर किया। उत्तरांचल दर्पण की खबरों के बाद नगर क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हुई और आमजन ने भी पारदर्शिता तथा जवाबदेही की मांग उठाई। जनहित से जुड़े इस मुद्दे पर लगातार प्रकाशित खबरों, विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों और स्थानीय नागरिकों की आपत्तियों के बाद आिखरकार पालिका को पूरी टेंडर प्रक्रिया निरस्त करनी पड़ी। इसे आम जनता की आवाज और जागरूक नागरिकों की जीत के रूप में देखा जा रहा है।

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