पलायन की तैयारी में ‘पहाड़ का एक और महारथी’ : पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत ने जाहिर की मैदानी सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा
देहरादून। पहाड़ से पलायन की विभीषिका से जुड़ा एक शर्मनाक पहलू पहाड़ पुत्रें का मैदान की ओर पलायन भी है। उत्तराखंड राज्य के अस्तित्व में आने के बाद ही मैदान में रहकर पहाड़ की चिंता करने का चलन जोर पकड़ने लगा था। पहाड़ की अस्मिता, आत्मनिर्भरता और खुशहाली के सूत्र को लेकर राज्य आंदोलन की लड़ाई लड़ने वाले कई दिग्गज एक एक कर के पहाड़ के दुर्गम रास्तों एवं चुनौती पूर्ण जीवन शैली को पीठ दिखाकर मैदान का रुख कर चुके हैं। पहाड़ से राजनीतिक पलायन करने वाले पहाड़ पुत्रें की सूची में अब पूर्व मंत्री एवं दिग्गज कांग्रेसी नेता हरक सिंह रावत का नाम भी जुड़ने जा रहा है। अपने बयान बम के लिए पहचाने जाने वाले कांग्रेसी नेता हरक ने बीते रोज मैदान की किसी विधानसभा से सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर कर मैदानी क्षेत्र के कई कांग्रेसी नेताओं की नींद उड़ा दी है।दरअसल,कांग्रेस पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर अपने वरिष्ठ नेताओं से उनकी पसंद और राजनीतिक रणनीति को लेकर राय मशवरा करना आरंभ कर दिया है। इसी क्रम में हरक सिंह रावत से भी पूछा गया कि वह आगामी विधान सभा चुनाव किस सीट से लड़ना चाहते हैं? तो उन्होंने राज्य के मैदानी इलाके कि किसी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की मंशा प्रकट की। हालांकि, उन्होंने अभी तक पार्टी हाईकमान के सामने किसी एक सीट का नाम स्पष्ट रूप से नहीं रखा है, लेकिन उन्होंने इतना जरूर कहा है कि अगले एक से दो सप्ताह के भीतर वह खुद तय कर लेंगे कि उन्हें किस सीट से चुनाव लड़ना है।हरक सिंह रावत ने साफ तौर पर कहा कि अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान ही करेगा, लेकिन वह अपनी इच्छा जरूर पार्टी नेतृत्व के सामने रखेंगे। उनके इस बयान ने कांग्रेस के भीतर कई तरह की अटकलों को जन्म दे दिया है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई है कि आिखर हरक सिंह रावत किस सीट से अपनी दावेदारी पेश कर सकते हैं ? सबसे बड़ी बात यह है कि हरक सिंह रावत ने पहली बार खुलकर यह संकेत दिया है कि अब वह किसी मैदानी सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं। उन्होंने कहा जीवन के लंबे राजनीतिक अनुभव और 60 वर्ष की उम्र पार करने के बाद अब उनकी इच्छा है कि वह मैदानी क्षेत्र की किसी सीट का प्रतिनिधित्व करें। हरक सिंह रावत का कहना है कि उन्होंने अब तक पर्वतीय क्षेत्रें की विभिन्न विधानसभा सीटों से चुनाव लड़ा है। राज्य के लगभग हर पर्वतीय जिले में राजनीतिक सक्रियता दिखाई है। उनका मानना है कि अब पर्वतीय सीटों पर युवाओं को मौका मिलना चाहिए। उनके जैसे वरिष्ठ नेताओं को मैदानी क्षेत्रें में राजनीति करनी चाहिए।हरक के इस बयान के बाद राजनीतिक विश्लेषक इसे एक बड़े संकेत के रूप में देख रहे हैं। माना जा रहा है कि हरक सिंह रावत की नजर देहरादून और आसपास की कुछ प्रभावशाली मैदानी सीटों पर है। राजनीतिक चर्चाओं में डोईवाला और धर्मपुर जैसी सीटों के नाम प्रमुखता से लिए जा रहा है। यद्यपि अभी तक उन्होंने किसी सीट की औपचारिक घोषणा नहीं की है।हरक सिंह रावत के अनुसार उन्हें कई विधानसभा क्षेत्रें से चुनाव लड़ने का आमंत्रण मिल रहा है। उन्होंने कोटद्वार, रुद्रप्रयाग और केदारनाथ जैसी सीटों का नाम लेते हुए कहा कि इन क्षेत्रें से भी उनके समर्थक और स्थानीय नेता उन्हें चुनाव लड़ाने की इच्छा जता रहे हैं। रावत क इस बयान के बाद कांग्रेस के भीतर उन नेताओं की चिंता बढ़ गई है, जो पहले से इन सीटों पर सक्रिय हैं, क्योंकि हरक सिंह रावत जिस भी सीट पर दावेदारी करेंगे, वहां टिकट की दौड़ और अधिक दिलचस्प हो जाएगी। विशेष रूप से कोटद्वार सीट को लेकर चर्चाएं तेज हैं, क्योंकि हरक सिंह रावत पहले भी इस क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। वहीं रुद्रप्रयाग और केदारनाथ जैसे क्षेत्रें में भी उनकी राजनीतिक पकड़ मानी जाती है। ऐसे में उनका नाम सामने आने से स्थानीय नेताओं के समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। उधर कांग्रेस का प्रदेश संगठन फिलहाल इस पूरे मामले में संतुलन बनाकर चलने की कोशिश कर रहा है। पार्टी नेतृत्व नहीं चाहता कि टिकट वितरण से पहले किसी तरह का खुला विवाद सामने आए। लिहाजा, कांग्रेस संगठन फिलहाल वरिष्ठ नेताओं की राय लेने के साथ-साथ विभिन्न सीटों के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों का भी अध्ययन कर रहा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि पार्टी की ओर से हरक सिंह रावत से उनकी इच्छा जानने की कोशिश की गई है। उन्होंने माना कि हरक सिंह रावत पार्टी के वरिष्ठ और अनुभवी नेता हैं और उनकी भावनाओं को ध्यान में पार्टी में अंदरूनी रूप से इस पर चर्चा की जा रही है।
