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सुशासन की मिसाल बने पांच जिलाधिकारी, उत्तराखंड का बढ़ाया गौरव

काम बोला, देश ने सराहाः उत्तराखंड के पांच आईएएस अधिकारी राष्ट्रीय सम्मान की दौड़ में
देहरादून। जनकल्याणकारी सोच के साथ जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं का समाधान करना और सरकार की विकास योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना ही एक संवेदनशील और प्रभावी प्रशासनिक अधिकारी की पहचान होती है। उत्तराखंड के जिम्मेदार अधिकारी अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ कर रहे हैं, लेकिन कुछ अधिकारी अपनी कार्यशैली, त्वरित निर्णय क्षमता और जनहित के प्रति विशेष प्रतिबद्धता के कारण अलग पहचान बनाने में सफल होते हैं। फेम इंडिया मैगजीन और एशिया पोस्ट द्वारा जारी फ्सर्वश्रेष्ठ जिलाधिकारी 2026य् की प्रारंभिक सूची ने यह सिद्ध किया है कि उत्कृष्ट कार्यशैली और जनकेंद्रित प्रशासन को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान अवश्य मिलता है। किसी भी जिलाधिकारी की कार्यप्रणाली सीधे तौर पर उस जिले के लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित करती है। ऐसे में जो अधिकारी सुशासन, संवेदनशीलता, नवाचार और प्रभावी नेतृत्व के मानकों पर खरे उतरते हैं, वे न केवल प्रतिष्ठित सम्मानों के पात्र बनते हैं, बल्कि आमजन के बीच भी विशेष सम्मान अर्जित करते हैं। उत्तराखंड के पांच आईएएस अधिकारियों का इस प्रतिष्ठित सूची में शामिल होना राज्य की प्रशासनिक दक्षता और जनहितकारी कार्यसंस्कृति की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। साथ ही यह सम्मान अन्य अधिकारियों के लिए भी प्रेरणास्रोत है कि यदि कार्य निष्पक्षता, संवेदनशीलता और समर्पण के साथ किया जाए तो राष्ट्रीय स्तर पर पहचान स्वतः मिलती है। देशभर के लगभग 800 जिलों में कार्यरत जिलाधिकारियों और डिप्टी कमिश्नरों के प्रशासनिक प्रदर्शन, नेतृत्व क्षमता, नवाचार और जनसरोकार के आधार पर यह सूची तैयार की गई है। प्रारंभिक सूची में करीब 100 अधिकारियों को शामिल किया गया है, जिनमें से आगे शीर्ष 25 अधिकारियों का अंतिम चयन किया जाएगा। चयनित अधिकारियों के नाम फेम इंडिया मैगजीन के जून अंक में प्रकाशित किए जाएंगे। उत्तराखंड से इस सूची में स्थान बनाने वाले अधिकारियों में रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी विशाल मिश्रा, ऊधम सिंह नगर के जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्य, हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित और नैनीताल के जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल शामिल हैं। इन अधिकारियों ने अपने-अपने जिलों में जन समस्याओं के त्वरित निस्तारण, विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और प्रशासन को अधिक जवाबदेह व संवेदनशील बनाने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया है। यही कारण है कि उनकी कार्यशैली को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है। उत्तराखंड के लिए यह उपलब्धि केवल पांच अधिकारियों का सम्मान नहीं, बल्कि पूरे राज्य की प्रशासनिक कार्यसंस्कृति और सुशासन की सोच को मिली राष्ट्रीय मान्यता है।

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