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समावेशी शिक्षा से हर बच्चे की प्रतिभा को मिलेगा अवसरः धामी

राष्ट्रीय संगोष्ठी में ‘शाइन अवि विजुअल लर्निंग करिकुलम’ और ‘समावेशी शिक्षा मिशन 2030’ पुस्तकों का लोकार्पण
देहरादून (उद संवाददाता)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि शिक्षा तभी सार्थक होगी, जब वह समाज के प्रत्येक बच्चे तक समान रूप से पहुंचे और किसी भी बच्चे को उसकी विशेष आवश्यकताओं के कारण पीछे न छोड़ना पड़े। उन्होंने कहा कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए समावेशी शिक्षा समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है और राज्य सरकार शिक्षा में नवाचार, आधुनिक तकनीक तथा समावेशी शिक्षण मॉडल को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री रविवार को राजपुर रोड स्थित होटल हयात सेंट्रिक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 आधारित राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘ब्रिजिंग लर्निंग गैप्स थ्रू विजुअल लर्निंग एंड अर्ली इंटरवेंशन’् को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने श्शाइन अवि विजुअल लर्निंग करिकुलमश् तथा श्समावेशी शिक्षा मिशन 2030श् पुस्तकों का लोकार्पण किया। साथ ही विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए तैयार 150 से अधिक विशेष पुस्तकें और विजुअल लर्निंग संसाधन भी जारी किए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि अपने लिए तो हर व्यक्ति कार्य करता है, लेकिन जो दूसरों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए स्वयं को समर्पित करता है, वही सच्चे अर्थों में परमार्थ का कार्य करता है। उन्होंने शाइन अवि आटिज्म फाउंडेशन की संस्थापक अनीता शर्मा थपलियाल के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनका कार्य समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। संवेदनशील सोच, दृढ़ संकल्प और सकारात्मक विचार ही समाज में परिवर्तन के वास्तविक आधार बनते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अनीता शर्मा थपलियाल लगभग 30 वर्ष अमेरिका में रहने के बाद अपनी मातृभूमि लौटी हैं और उन्होंने अपने अनुभवों को हजारों बच्चों के बेहतर भविष्य से जोड़ने का संकल्प लिया है। यह रिवर्स पलायन का एक प्रेरक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि अनीता शर्मा राज्य में रिवर्स पलायन की ब्रांड एम्बेसडर की तरह कार्य कर रही हैं और उनके इस अभियान में पूरा उत्तराखंड उनके साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पहचान ही यह है कि यहां लोग जाति, वर्ग और क्षेत्र से ऊपर उठकर अच्छे विचारों और सकारात्मक प्रयासों को स्वीकार करते हैं। भारतीय संस्कृति में ज्ञान को सर्वाेच्च स्थान दिया गया है और राज्य सरकार ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें प्रत्येक बच्चे को समान अवसर प्राप्त हों। समावेशी शिक्षा की दिशा में किए जा रहे प्रयास इसी सोच को मजबूत कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन में उत्तराखंड देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। उत्तराखंड नई शिक्षा नीति लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना है। राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था में नवाचार, तकनीकी आधारित शिक्षण और समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देकर भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा प्रणाली विकसित कर रही है। कार्यक्रम में लॉन्च किए गए विजुअल लर्निंग संसाधन विशेष रूप से ऐसे बच्चों के लिए तैयार किए गए हैं, जिन्हें भाषा, संचार, सामाजिक व्यवहार, संज्ञानात्मक विकास, शैक्षणिक तैयारी तथा दैनिक जीवन कौशल विकसित करने में अतिरिक्त सहयोग की आवश्यकता होती है। इन संसाधनों के माध्यम से बच्चों के सीखने की प्रक्रिया को अधिक सरल, प्रभावी और व्यवहारिक बनाने का प्रयास किया गया है। विकासनगर विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने कहा कि अनीता शर्मा थपलियाल ने जिस विषय को अपने कार्य का आधार बनाया है, वह केवल राष्ट्रीय नहीं बल्कि वैश्विक महत्व का विषय है। उन्होंने महान वैज्ञानिक थॉमस अल्वा एडिसन का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को सही मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मिले तो वे भी अपनी प्रतिभा से समाज और दुनिया को नई दिशा दे सकते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि शाइन अवि की यह पहल ऐसे बच्चों के लिए शिक्षा और विकास के नए अवसर उपलब्ध कराएगी। शाइन अवि आटिज्म फाउंडेशन की संस्थापक अनीता शर्मा थपलियाल ने कहा कि विजुअल लर्निंग करिकुलम का उद्देश्य अलग-अलग सीखने की क्षमता और आवश्यकता वाले बच्चों के लिए सहज, प्रभावी और वैज्ञानिक शिक्षण संसाधन उपलब्ध कराना है, ताकि प्रत्येक बच्चा अपनी क्षमता के अनुरूप सीख सके और आत्मनिर्भर बन सके।

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