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गोताखोर परगट सिंह ने 25 हजार शवों को गहरे जल से निकाले बाहर, हजारों को दिया जीवनदान

पानी के नीचे की दुनिया के अनुभव को गोताखोर परगट सिंह ने उत्तरांचल दर्पण से किया साझा
-मनोज श्रीवास्तव-
काशीपुर। खुद की जान जोखिम में डालकर नदियों और नहरों में डूबते हजारों जिंदगियों को मौत के मुंह से बाहर खींचने वाले हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के दबखेड़ी गांव निवासी परगट सिंह गोताखोर आज किसी परिचय के मोहताज नहीं है। लगभग ढाई दशक के दरम्यान उन्होंने पंजाब हरियाणा और उत्तराखंड के रुड़की आदि क्षेत्रों से होकर निकलने वाली विभिन्न नदियों और नहरों से 6000 से अधिक लोगों को डूबने से बचाया। इसी तरह विषम परिस्थितियों में उन्होंने 25 हजार से अधिक शवों को पानी के तेज प्रवाह से बाहर निकाले। अदम्य साहस और मानवीय सेवा की ऐसी नजीर बिरले ही देखने अथवा सुनने को मिलती है। मंगलवार को अपनी टीम के साथ काशीपुर पहुंचे परगट सिंह गोताखोर ने उत्तरांचल दर्पण प्रतिनिधि मनोज श्रीवास्तव से खुलकर बातचीत की। उन्होंने कहा कि सही मायनों में मानव सेवा ही परमात्मा की आराधना है। कहा कि प्रत्येक जीव में ईश्वर का वास है। उन्होंने बताया कि तैराकी करते हुए गोताखोरी के 25 वर्षों में एक दर्जन से अधिक जिंदा व खूंखार मगरमच्छों को रेस्क्यू किया। कोरोना काल के दौरान वह देवदूत बने रहे। उनके इस अदम्य साहस और जनसेवा के लिए सैकड़ो बार प्रशासन तथा सामाजिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। वह अपने गांव तथा आसपास के बच्चों को मुफ्रत में तैराकी का प्रशिक्षण देते हैं ताकि मानवता की यह मुहिम आगे लगातार यूं ही चलती रहे। गोताखोर परगट सिंह ने कहा कि समाज सेवा उनके जीवन का एकमात्र लक्ष्य है। सरकार से नहीं मिला आर्थिक सहयोग – पिछले लगभग ढाई दशक से एनडीआरएफ एसडीआरएफ और स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर जलीय जीव जंतुओं एवं इंसानी जिंदगियों को रेस्क्यू करने वाले गोताखोर परगट सिंह को 600 से अधिक बार शाशन सरकार व सामाजिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है लेकिन वास्तविक जीवन में इस सम्मान के सहारे वह अपने मिशन को आगे बढ़ाने में कामयाब नहीं हो पा रहे हैं। खुद गोताखोर परगट सिंह ने बताया कि उन्हें इस मुश्किल भरे कार्य के लिए कहीं ना कहीं आर्थिक सहयोग एवं उपकरणों की जरूरत होती है। सरकार से शील्ड प्रमाण पत्र स्मृति चिन्ह अथवा साल के रूप में सम्मान तो मिलता है लेकिन वास्तविक सम्मान और सहयोग उन्हें आज तक नहीं मिल सका जिसकी उन्हें सख्त दरकार है। केपीएच के फाउंडर ने भेंट किए स्मृति चिन्ह – कुलविंदर प्रोडक्शन हाउस ;केपीएचद्ध के फाउंडर एवं प्रख्यात समाजसेवी कुलविंदर सिंह ने गोताखोर परगट सिंह के काशीपुर पहुंचने पर फूल मालाओं से उनका अभूतपूर्व स्वागत किया। गिरीताल रोड स्थित अपने कार्यालय में केपीएच के फाउंडर ने परगट सिंह को स्मृति चिन्ह व पगड़ियां भेंट की। बताया गया की रेस्क्यू करते वक्त कई बार महिलाओं अथवा लड़कियों के तन पर कपड़ा नहीं होता है ऐसे में भेंट स्वरूप मिली पगड़ियां तन ढकने का काम करती है।

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