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परमवीर चक्र विजेताओं की सम्मान राशि अब दो करोड़ : कारगिल विजय दिवस पर मुख्यमंत्री धामी की घोषणा

जल्द होगा सैन्य धाम का लोकार्पण
देहरादून (उद संवाददाता)। 27वें कारगिल विजय दिवस पर गांधी पार्क में आयोजित शौर्य दिवस श्रद्धांजलि एवं सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सैनिकों और पूर्व सैनिकों के सम्मान तथा कल्याण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के परमवीर चक्र विजेता सैनिकों को दी जाने वाली सम्मान राशि को डेढ़ करोड़ रुपये से बढ़ाकर दो करोड़ रुपये किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने सैन्य धाम का लोकार्पण भी शीघ्र किए जाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सैन्य धाम आने वाली पीढ़ियों को देश के लिए सर्वाेच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों के शौर्य और त्याग की प्रेरणा देगा तथा युवाओं में राष्ट्रसेवा की भावना को मजबूत करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सेवा पूरी कर लौटने वाले अग्निवीरों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में अग्निवीरों के लिए राजकीय सेवाओं में आरक्षण का प्रावधान किया गया है। साथ ही राज्य का पहला अग्निवीर सेल गठित किया जा रहा है, जो उनके पुनर्वास और रोजगार से जुड़े मामलों में सहयोग करेगा। उन्होंने कहा कि अग्निवीरों को निशुल्क कौशल विकास प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा तथा होमस्टे सहित विभिन्न स्वरोजगार योजनाओं में उन्हें विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व सैनिकों के शस्त्र लाइसेंस से जुड़ी समस्याओं का भी शीघ्र समाधान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सैनिकों और उनके परिवारों का सम्मान एवं कल्याण राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और इस दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री धामी ने कारगिल युद्ध को भारतीय सेना के अदम्य साहस, पराक्रम और अनुशासन का प्रतीक बताते हुए कहा कि कठिनतम परिस्थितियों में भारतीय सैनिकों ने दुश्मन को परास्त कर विश्व के सामने अपनी वीरता का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि जब भारत का सैनिक मातृभूमि की रक्षा के लिए रणभूमि में उतरता है तो विजय उसके कदम चूमती है। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड का कण कण राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत है। स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आजादी के बाद हुए प्रत्येक युद्ध और सैन्य अभियान में उत्तराखंड के सैनिकों ने अग्रिम पंक्ति में रहकर देश की रक्षा की है। यही कारण है कि उत्तराखंड को वीरभूमि के रूप में जाना जाता है। यहां का युवा सेना की वर्दी को केवल रोजगार नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का सर्वाेच्च अवसर मानता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद उत्तराखंड के सैनिकों को प्राप्त वीरता पदक राज्य की गौरवशाली परंपरा के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के नेतृत्व में भारतीय सेना का मनोबल बढ़ा है, सेना को आधुनिक हथियारों और संसाधनों से सशक्त बनाया गया है तथा रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिला है। उन्होंने कहा कि अब भारत किसी भी चुनौती पर केवल कड़ी निंदा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि देश की संप्रभुता पर चोट करने वालों को मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रें में तेजी से हो रहे आधारभूत ढांचे के विकास और सैनिकों के कल्याण से जुड़े फैसलों का भी उल्लेख किया। कार्यक्रम में सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि उत्तराखंड वीरों और राष्ट्रभक्ति की भूमि है। उन्होंने कहा कि देश की रक्षा करने वाला प्रत्येक पांचवां सैनिक उत्तराखंड से है और भारतीय सेना में राज्य का योगदान लगभग 17-5 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि शहीदों को वापस नहीं लाया जा सकता, लेकिन जब सरकार और समाज उनके परिवारों के साथ मजबूती से खड़े होते हैं तो उन्हें यह विश्वास मिलता है कि पूरा देश उनके साथ है। उन्होंने कहा कि सैन्य धाम का निर्माण इसी भावना का प्रतीक है, जो शहीदों के सम्मान और उनकी स्मृतियों को सहेजने का कार्य करेगा। सैनिकों और पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए राज्य सरकार द्वारा लिए गए अनेक निर्णय इस बात का प्रमाण हैं कि राष्ट्र की सुरक्षा और सैनिकों का सम्मान सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कारगिल शहीदों के परिजनों को सम्मानित किया। इस अवसर पर सैन्य कल्याण मंत्री गणेश जोशी, विधायक मुन्ना सिंह चौहान,शमशेर सिंह बिष्ट, संदीप सबरवाल, केपी बहल, केएस बसेड़ा, आर एस भंडारी, केके बाजपेयी, एके सिंह, युगल किशोर पंत,प्रताप सिंह, रावत, ज्योति कोटिया आदि समेत तमाम लोग मौजूद रहे।

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