सीएम पुष्कर धामी का बड़ा फैसला: देहरादून-ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन परियोजना में पेड़ों की कटाई पर रोक
हजारों पेड़ों की कटाई को लेकर स्थानीय लोगों, पर्यावरण प्रेमियों, छात्रों और विभिन्न सामाजिक संगठनों का विरोध प्रदर्शन जारी
देहरादून। उत्तराखंड में देहरादून-ऋषिकेश (ऋषिकेश-भानियावाला) हाईवे के चौड़ीकरण को लेकर एक बार फिर पर्यावरण संरक्षण का मुद्दा चर्चा में है।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को देहरादून-ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन परियोजना को लेकर पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय लोगों की चिंताओं का संज्ञान लेते हुए बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि सभी हितधारकों, स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और विशेषज्ञों से दोबारा विस्तृत संवाद स्थापित किया जाए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन जनभावनाओं, पर्यावरण और स्थानीय हितों की अनदेखी कर कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों का पूर्ण सम्मान करते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी।सबसे महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए सीएम धामी ने कहा कि जब तक सभी पक्षों के बीच संतोषजनक सहमति और विश्वास का वातावरण नहीं बन जाता, तब तक परियोजना के तहत आने वाले पेड़ों की कटाई स्थगित रहेगी।उन्होंने बताया कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की इस परियोजना में वन्यजीव संरक्षण के लिए करीब 3.5 किलोमीटर लंबे हाथी अंडरपास और छोटे वन्यजीवों के आवागमन हेतु विशेष कल्वर्ट का भी प्रावधान किया गया है, ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष और सड़क दुर्घटनाओं में वन्यजीवों की मौत की घटनाओं को कम किया जा सके। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि उत्तराखंड की प्रकृति, जनभावनाएँ और विकास—तीनों सरकार के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं और सरकार संवाद, सहमति तथा व्यापक जनहित के आधार पर ही आगे बढ़ेगी।
सोशल मीडिया पर विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर नई बहस
उत्तराखंड में देहरादून-ऋषिकेश (ऋषिकेश-भानियावाला) हाईवे के चौड़ीकरण को लेकर एक बार फिर मुद्दे ने प्रदेश में विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही पोस्टों में दावा किया जा रहा है कि इस परियोजना के तहत 4,000 से अधिक पेड़ों की कटाई हो सकती है। वहीं कुछ अन्य दावों में करीब 3,000 पेड़ों के कटान का भी उल्लेख किया गया है, जिसे लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध तेज हो गया है। परियोजना के विरोध में पर्यावरण प्रेमी, स्थानीय नागरिक, विभिन्न सामाजिक संगठन और बड़ी संख्या में Gen-Z युवा तथा छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण का संतुलन बनाए रखना जरूरी है और बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई से क्षेत्र की जैव विविधता तथा पर्यावरण पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है।

