‘तापमान’ के अंगड़ाई लेते ही सूबे में आवश्यक सेवाएं ‘धाड़ाम’
यूपीसीएल के पास 5.3 करोड़ यूनिट की वर्तमान मांग के सापेक्ष केवल 4.5 करोड़ यूनिट बिजली ही उपलब्ध, जल संस्थान के पास सामान्य दिनों की 971.91 एमएलडी पेयजल की मांग की तुलना में केवल 678.96 एमएलडी पेयजल सप्लाई की ही क्षमता
– अर्श-
देहरादून । गर्मी का मौसम आमतौर पर बिजली महकमे एवं पेयजल विभाग के लिए सबसे ज्यादा सरदर्दी वाला साबित होता है। गर्मी के मौसम में अमूमन इन्हीं दोनों विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर सबसे अधिक दबाव होता है। जिसके मध्य नजर दोनों ही विभागों द्वारा गर्मी का मौसम आने के पूर्व ही बिजली एवं पानी की संभावित मांग को पूरा करने की पूर्व तैयारियां कर लेने का दावा तो किया जाता है, लेकिन गर्मी के पीक पर आते ही लगभग हर वर्ष ही इन विभागों की तैयारियां नाकाफी साबित होती है और हालात आग लगने पर कुआं खोदने वाले जैसे हो जाते हैं। बात इस साल की करें तो गर्मी के मौसम के शुरुआत में ही सिस्टम की पूर्व तैयारियों की कलई खुलना आरंभ हो गई है। अभी जबकि तापमान ने केवल अंगड़ाई ही ली है, आवश्यक सेवाएं एवं व्यवस्थाएं धड़ाम होती नजर आ रही हैं। प्रदेश में बिजली की मांग तकरीबन 5.3 करोड़ यूनिट तक पहुंच गई है, जबकि यूपीसीएल के पास बिजली की वर्तमान उपलब्धता केवल 4.5 करोड़ यूनिट की ही है। मांग के सापेक्ष उपलब्धता कम होने के कारण यूपीसीएल पर्वतीय क्षेत्र छोड़कर प्रदेशभर में विद्युत कटौती कर रहा है, जिसके चलते आम लोगों की मुश्किलें खासा बढ़ गई है। ज्ञात हो कि राज्य में एक से 24 अप्रैल के बीच बिजली की मांग में 90 लाख यूनिट से अधिक का इजाफा हुआ है, जबकि यूपीसी यूपीसीएल के पास मांग के सापेक्ष राज्य पूल से 1.1 करोड़ तथा केंद्रीय पूल से 1.5 करोड़ यूनिट बिजली मिलकर केवल 2.7 करोड़ यूनिट बिजली ही उपलब्ध है। हालात इतने कठिन है कि करीब 1.5 करोड़ यूनिट बिजली बाजार व 34 लाख यूनिट बिजली अन्य माध्यमों से लेने के बाद भी यूपीसीएल केवल 4.6 करोड़ यूनिट बिजली ही जुटा पा रहा है । बिजली की इस भीषण किल्लत के चलते यूपीसीएल ने अब केंद्र सरकार के समक्ष 150 मेगावाट बिजली प्रदान किए जाने की मांग रखी है। इसके अलावा यूपीसीएल उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग से अनुमोदन प्राप्त कर ऊर्जा एक्सचेंज के माध्यम से किफायती दरों में अग्रिम विद्युत क्रय की व्यवस्था के लिए भी हाथ पांव मार रहा है। आगामी एक से 15 मई 2026 के लिए 100 मेगावाट व 16 से 31 मई 2026 के लिए 225 मेगावाट बिजली खरीदी की योजना है। कुछ ऐसे ही हालात कमोबेश जल संस्थान के भी हैं। गर्मी के शुरुआती तेवर देख कर जल संस्थान के हाथ पांव अभी से इसलिए फूले हुए हैं, क्योंकि उत्तराखंड में सामान्य दिनों में ही करीब 971.91 एमएलडी पेयजल की मांग रहती है, जबकि मांग के मुकाबले उत्पादन केवल 678.96 एमएलडी ही हो पाता है। जाहिर है कि उत्तराखंड में सामान्य परिस्थितियों में ही पेयजल की मांग और आपूर्ति के बीच में बड़ा अंतर रहता है। लिहाजा गर्मी के मौसम में आपूर्ति पेयजल आपूर्ति गड़बड़ाने की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि तापमान बढ़ने के साथ साथ ही पानी की खपत भी तेजी से बढ़ती है। उधर राज्य का जल संस्थान विभाग अभी भी मुगालता पाले हुए हैं और पेयजल आपूर्ति को सामान्य बनाए रखने पर सतत निगरानी का दावा कर रहा है। जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक एसके गुप्ता के अनुसार, पेयजल संकट से निपटने के लिए जल संस्थान और संबंधित विभागों द्वारा कई स्तरों पर काम किया जा रहा है। छोटे-छोटे लेकिन प्रभावी उपायों के जरिए स्थिति को संभालने की कोशिश की जा रही है। हैंडपंपों में मोटर लगाकर पानी की उपलब्धता बढ़ाने की योजना पर काम किया जा रहा है। जिससे कम जलस्तर वाले क्षेत्रों में भी पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। इसके अलावा जलाशयों तक पानी। पहुंचाने के लिए पंपिंग सिस्टम को भी मजबूत किया जा रहा है।ग्रामीण इलाकों में टैंकर से पानी पहुंचाना हर जगह संभव नहीं होता। ऐसे में स्थानीय स्तर पर वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है। जैसे छोटे जल संग्रहण टैंक, वर्षा जल संचयन और स्रोत संरक्षण पर जोर दिया जा रहा है। विभाग का कहना है कि गर्मियों के दौरान पेयजल आपूर्ति को सामान्य बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है।
