नेपाल में भीषण बाढ़ की तबाही, तिब्बत क्षेत्र में भूकंप और 2,000 फीट चौड़ा ग्लेशियर ग्लेशियर टूटने से सैलाब की आशंका
द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सैटेलाइट तस्वीरों के अध्ययन से संकेत मिले हैं कि आपदा ग्लेशियर का करीब 2,000 फीट चौड़ा हिस्सा टूटकर निचली नदी घाटी में गिरने से आई। कैलगरी विश्वविद्यालय के भूवैज्ञानिक डेनियल शुगर के अनुसार, करीब 17,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित ग्लेशियर का विशाल हिस्सा अलग होकर लगभग 4,000 फीट नीचे गिरा।
इतने बड़े हिमखंड के ऊंचाई से गिरने के कारण ल्हेंडे खोला नदी में जबरदस्त सैलाब आया, जो आगे भोटेकोशी नदी में पहुंच गया। तेज बहाव ने निचले इलाकों में भारी तबाही मचा दी।
रसुवा के मुख्य सीमा शुल्क अधिकारी राजेंद्र ढुंगाना ने काठमांडू पोस्ट को बताया कि जब वह बाहर निकले तो उन्होंने ऊपर की ओर से धुएं जैसे गुबार के साथ पानी की एक विशाल दीवार को तिमुरे बाजार की ओर तेजी से आते देखा।उनके मुताबिक, बाढ़ करीब 100 मीटर ऊंची लहर की तरह बाजार में दाखिल हुई और कुछ ही पलों में पूरा बाजार बह गया।
काठमांडू से करीब 125 किलोमीटर दूर रसुवा, धाडिंग और नुवाकोट सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में शामिल हैं। नेपाली अखबार कांतिपुर के अनुसार, करीब एक दर्जन पनबिजली परियोजनाओं को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है, जिससे बिजली संकट की आशंका बढ़ गई है।
बाढ़ के तेज बहाव में:
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नेपाल सरकार ने रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग को तीन महीने के लिए आपदा प्रभावित क्षेत्र घोषित किया है। सरकार की ओर से स्वास्थ्य सेवाओं समेत आवश्यक सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराने के कदम उठाए जा रहे हैं।