August 28, 2026

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नेपाल में भीषण बाढ़ की तबाही, तिब्बत क्षेत्र में भूकंप और 2,000 फीट चौड़ा ग्लेशियर ग्लेशियर टूटने से सैलाब की आशंका

काठमांडू। नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद को बताया कि बुधवार सुबह स्थानीय समयानुसार 8:37 बजे तिब्बत क्षेत्र में भूकंप आया था। करीब तीन मिनट बाद बाढ़ की सूचना मिली। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि भूकंप के झटकों के कारण ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट या ग्लेशियर टूटने जैसी घटना हुई, जिससे अचानक भारी मात्रा में पानी नीचे की ओर आया। बाढ़ से नेपाल के कई इलाकों में सड़कें और पुल बह गए, जबकि घरों और वाहनों को भारी नुकसान पहुंचा है। कई क्षेत्रों का संपर्क पूरी तरह टूट गया है। बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है और सैकड़ों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। संचार और आवागमन व्यवस्था ठप होने के कारण प्रशासन के सामने प्रभावित लोगों की वास्तविक संख्या का पता लगाना बड़ी चुनौती बना हुआ है।

2,000 फीट चौड़ा ग्लेशियर का हिस्सा टूटा

द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सैटेलाइट तस्वीरों के अध्ययन से संकेत मिले हैं कि आपदा ग्लेशियर का करीब 2,000 फीट चौड़ा हिस्सा टूटकर निचली नदी घाटी में गिरने से आई। कैलगरी विश्वविद्यालय के भूवैज्ञानिक डेनियल शुगर के अनुसार, करीब 17,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित ग्लेशियर का विशाल हिस्सा अलग होकर लगभग 4,000 फीट नीचे गिरा।

इतने बड़े हिमखंड के ऊंचाई से गिरने के कारण ल्हेंडे खोला नदी में जबरदस्त सैलाब आया, जो आगे भोटेकोशी नदी में पहुंच गया। तेज बहाव ने निचले इलाकों में भारी तबाही मचा दी।

‘100 मीटर ऊंची लहर ने पल भर में सबकुछ तबाह किया’

रसुवा के मुख्य सीमा शुल्क अधिकारी राजेंद्र ढुंगाना ने काठमांडू पोस्ट को बताया कि जब वह बाहर निकले तो उन्होंने ऊपर की ओर से धुएं जैसे गुबार के साथ पानी की एक विशाल दीवार को तिमुरे बाजार की ओर तेजी से आते देखा।उनके मुताबिक, बाढ़ करीब 100 मीटर ऊंची लहर की तरह बाजार में दाखिल हुई और कुछ ही पलों में पूरा बाजार बह गया।

22 कंक्रीट पुल और 42 किलोमीटर सड़क बही

काठमांडू से करीब 125 किलोमीटर दूर रसुवा, धाडिंग और नुवाकोट सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में शामिल हैं। नेपाली अखबार कांतिपुर के अनुसार, करीब एक दर्जन पनबिजली परियोजनाओं को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है, जिससे बिजली संकट की आशंका बढ़ गई है।

बाढ़ के तेज बहाव में:

  • 22 कंक्रीट पुल बह गए।
  • 5 बेली पुल भी क्षतिग्रस्त होकर बह गए।
  • करीब 42 किलोमीटर सड़क बह गई।
  • करीब एक दर्जन पनबिजली परियोजनाओं को गंभीर नुकसान पहुंचा।
  • बाढ़ का पानी नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी ईस्ट तक फैल गया।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नेपाल सरकार ने रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग को तीन महीने के लिए आपदा प्रभावित क्षेत्र घोषित किया है। सरकार की ओर से स्वास्थ्य सेवाओं समेत आवश्यक सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराने के कदम उठाए जा रहे हैं।

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