October 28, 2026

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डॉ. गिरीश रंजन तिवारी को राजभाषा गौरव पुरस्कार

नैनीताल। उत्तराखंड के वरिष्ठतम और सर्वाधिक सम्मानित पत्रकारों में शुमार, शिक्षाविद्, शोधकर्ता और सार्वजनिक जीवन की प्रतिष्ठित हस्ती डॉ. गिरीश रंजन तिवारी की पुस्तक ‘अतीत से वर्तमान तकः नैनीताल का सफर और गॉथिक राजभवन के निर्माण की अद्भुत गाथा’ को भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन राजभाषा विभाग द्वारा प्रदान किए जाने वाले प्रतिष्ठित राजभाषा गौरव पुरस्कार-2025 के अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय पुरस्कार के लिए चुना गया है। इस उपलब्धि का महत्व इसलिए भी विशेष है कि डॉ. गिरीश रंजन तिवारी उत्तराखंड से इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चयनित होने वाले एकमात्र व्यक्ति हैं। गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग द्वारा दिया जाने वाला यह सम्मान हिंदी में मौलिक, शोधपरक और उच्च गुणवत्ता वाले लेखन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से प्रदान किया जाता है। ऐसे में डॉ. तिवारी को मिला यह सम्मान उनके व्यक्तिगत साहित्यिक और शोध योगदान के साथ-साथ उत्तराखंड की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर मिली महत्वपूर्ण पहचान भी है। डॉ. गिरीश रंजन तिवारी उत्तराखंड की पत्रकारिता के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित नामों में गिने जाते हैं। दशकों से पत्रकारिता, शिक्षा, इतिहास, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों से जुड़े रहे डॉ. तिवारी ने पत्रकारिता के साथ अकादमिक क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वे कुमाऊं विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के प्राध्यापक और विभागाध्यक्ष रह चुके हैं। प्रदेश के बौद्धिक और सार्वजनिक जीवन में उनकी सक्रिय एवं सम्मानित उपस्थिति रही है और उन्हें उत्तराखंड के प्रमुख बुद्धिजीवियों तथा सार्वजनिक व्यक्तित्वों में माना जाता है। इससे पूर्व उन्हें ‘उत्तराखंड रत्न’ सम्मान से भी अलंकृत किया जा चुका है। डॉ. तिवारी की पुस्तक में नैनीताल के ऐतिहासिक राजभवन, जिसे वर्तमान में लोक भवन के नाम से जाना जाता है, के निर्माण, स्थापत्य और उससे जुड़े ऐतिहासिक- सामाजिक संदर्भों को गहन शोध के साथ प्रस्तुत किया गया है। लगभग 125 वर्ष पुराने इस भवन के निर्माण की कहानी अपने आप में अत्यंत रोचक है और इसके माध्यम से तत्कालीन नैनीताल के सामाजिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक परिवेश की भी झलक मिलती है। राज्यपाल लेफ्रिटनेंट जनरल गुरमीत सिंह ;सेनि.द्ध ने जून 2026 में पुस्तक का विमोचन करते हुए इसे उत्तराखंड की विरासत का महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया था। उन्होंने कहा था कि यह पुस्तक केवल राजभवन के निर्माण का इतिहास नहीं है, बल्कि नैनीताल की सांस्कृतिक यात्रा, उत्तराखंड की विरासत और उस दौर के सामाजिक परिवेश को भी सामने लाती है। उन्होंने पुस्तक को इतिहास प्रेमियों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी बताया था। पुस्तक के शोध में राजभवन के निर्माण से जुड़े कई महत्वपूर्ण और अपेक्षाकृत कम चर्चित तथ्यों को सामने लाया गया है। डॉ. तिवारी के अनुसार ब्रिटिश वास्तुकारों की डिजाइन पर तैयार इस भव्य भवन को वास्तविक स्वरूप देने में भारतीय शिल्पकारों और मजदूरों की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। विशेष रूप से पंजाब के रामगढ़िया सिख कारीगरों के योगदान का उल्लेख पुस्तक में किया गया है। राजभवन की स्थापत्य शैली को लेकर भी पुस्तक एक रोचक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। इसमें बताया गया है कि नैनीताल के राजभवन की वास्तुकला इंग्लैंड के बकिंघम पैलेस की तुलना में स्कॉटलैंड के बालमोरल पैलेस से अधिक साम्य रखती है। डॉ. तिवारी की यह कृति केवल ऐतिहासिक घटनाओं और स्थापत्य का विवरण नहीं है, बल्कि उत्तराखंड की ऐतिहासिक स्मृति को संरक्षित करने का गंभीर प्रयास भी है। नैनीताल जैसे ऐतिहासिक नगर की इमारतों, संस्थाओं, सामाजिक जीवन और सांस्कृतिक विकास की कहानी को हिंदी में शोधपरक ढंग से सामने लाकर पुस्तक इतिहास को नई पीढ़ी से जोड़ने का काम करती है। पुस्तक के विमोचन के अवसर पर राज्यपाल ने भी कहा था कि ऐतिहासिक धरोहरों की कहानियां केवल सरकारी अभिलेखों और पुरानी फाइलों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन्हें समाज और विशेषकर आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया जाना चाहिए।
राष्ट्रीय सम्मान से बढ़ा उत्तराखंड का गौरव
नैनीताल। गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग द्वारा दिए जाने वाले राजभाषा गौरव पुरस्कार-2025 में राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय स्थान प्राप्त करना डॉ. गिरीश रंजन तिवारी के लंबे पत्रकारिता, अध्यापन और शोध जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। साथ ही, उत्तराखंड से इस सम्मान के लिए चुने गए एकमात्र व्यक्ति होने के कारण यह उपलब्धि पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। ‘अतीत से वर्तमान तक’ अब केवल नैनीताल के इतिहास पर आधारित पुस्तक नहीं रह गई है, बल्कि हिंदी भाषा में उत्तराखंड की विरासत को प्रामाणिक, शोधपरक और प्रभावी रूप से प्रस्तुत करने वाली राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित कृति बन गई है। यह सम्मान उस समृद्ध बौद्धिक, पत्रकारिता और सांस्कृतिक परंपरा की भी स्वीकृति है, जिसका डॉ. तिवारी दशकों से प्रतिनिधित्व करते आए हैं।

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