आज हर घर में तिरंगा और हर मन में तिरंगा : लाल किले से पीएम मोदी का विकसित भारत के लिए ‘शक्ति की सप्तधारा’ का आह्वान
लाल किले पर पहली बार ‘वंदे मातरम’ गूंज रहा
नई दिल्ली, 15 अगस्त 2026: स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प दोहराया। उन्होंने देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज हर घर में तिरंगा और हर मन में तिरंगा है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में आत्मनिर्भर भारत, ऊर्जा सुरक्षा, विनिर्माण, परमाणु ऊर्जा, राष्ट्रीय सुरक्षा और नक्सलवाद समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार की प्राथमिकताएं सामने रखीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद 15 अगस्त के अवसर पर लाल किले पर पहली बार ‘वंदे मातरम’ गूंज रहा है। उन्होंने इसे ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा कि देश नए संकल्पों और नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है।मोदी ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत बनाना देश का बड़ा सपना है और इसे पूरा करने की शक्ति 140 करोड़ भारतीयों के सामर्थ्य से मिल रही है। उनके अनुसार, दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश द्वारा विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य तय करना पूरी दुनिया के लिए एक मजबूत संदेश है।
आत्मनिर्भरता और ऊर्जा सुरक्षा पर जोर

प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों के बीच आत्मनिर्भरता भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हुई है। उन्होंने पेट्रोलियम, डीजल, उर्वरक, दवाइयों और तकनीक जैसे क्षेत्रों में संसाधनों के ‘हथियारीकरण’ का उल्लेख करते हुए कहा कि आत्मनिर्भरता के मंत्र ने भारत को ऐसी चुनौतियों से निपटने की क्षमता दी है।ऊर्जा सुरक्षा को भविष्य की बड़ी आवश्यकता बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा सेंटर और आधुनिक तकनीकों के विस्तार के लिए बड़ी मात्रा में बिजली की जरूरत होगी। उन्होंने परमाणु ऊर्जा को इस दिशा में महत्वपूर्ण माध्यम बताया और 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा।प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार पांच नए परमाणु रिएक्टर शुरू करने के लक्ष्य पर भी काम कर रही है।प्रधानमंत्री ने कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समुद्र के बड़े हिस्से को पहले ‘नो-गो एरिया’ माना जाता था, लेकिन अब समुद्र के भीतर संसाधनों की खोज के लिए नए प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने ‘समुद्र मंथन’ पहल का उल्लेख करते हुए बताया कि इस दिशा में 85 हजार करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।उन्होंने समुद्री क्षेत्र और सीफूड उद्योग में भारत की संभावनाओं का भी उल्लेख किया और कहा कि देश की समुद्री पट्टी इस क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।प्रधानमंत्री ने लाल किले से देश में ‘शक्ति की सप्तधारा’ का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जो काम पिछले पांच दशकों में नहीं हो सके, उन्हें अगले पांच से सात वर्षों में पूरा करने के लिए नई ऊर्जा और गति की जरूरत है। इस अभियान में युवाओं की शक्ति को भी महत्वपूर्ण भूमिका दी जाएगी।उन्होंने उत्पादन और विनिर्माण को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। प्रधानमंत्री के अनुसार, भारत को केवल अंतिम उत्पाद बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि छोटे-छोटे पुर्जों से लेकर बड़े उत्पादों तक पूरी वैल्यू चेन पर अपनी पकड़ बनानी होगी।उन्होंने कहा कि डिजाइन से लेकर उत्पादन तक भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का केंद्र बनाना होगा। इसके लिए उत्पादों की गुणवत्ता, पैमाने और उपयोगिता को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाना जरूरी है। उन्होंने ‘जीरो डिफेक्ट’ उत्पादों को भारत की पहचान बनाने का आह्वान किया और कहा कि वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की पहचान गुणवत्ता के आधार पर होनी चाहिए।

दुनिया में भारतीय कंपनियों के नेतृत्व का लक्ष्य
प्रधानमंत्री ने भारतीय कंपनियों और संस्थानों को वैश्विक स्तर पर नेतृत्वकारी भूमिका हासिल करने का लक्ष्य दिया। उन्होंने कहा कि भारत की कंपनियां फॉर्च्यून 500 जैसी वैश्विक सूचियों में शीर्ष स्थान पर क्यों नहीं हो सकतीं। उन्होंने भारतीय बैंकों, फार्मा कंपनियों और अकाउंटिंग फर्मों के लिए भी दुनिया की अग्रणी संस्थाओं में स्थान बनाने की आवश्यकता बताई।उन्होंने राज्य सरकारों और स्थानीय स्वशासन संस्थाओं से विकास की गति तेज करने का आग्रह किया।
नक्सलवाद के खिलाफ अभियान

प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद और माओवाद को देश की सुरक्षा और विकास के लिए बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि पिछले चार दशकों में हिंसा ने बड़ी आबादी को प्रभावित किया। उन्होंने सुरक्षाबलों और पुलिस के जवानों के बलिदान का भी उल्लेख किया।मोदी ने कहा कि 2014 के बाद सरकार ने नक्सलवाद को समाप्त करने का संकल्प लिया और अब इसके खिलाफ अभियान निर्णायक चरण में है। उन्होंने दावा किया कि जिन क्षेत्रों में कभी नक्सली हिंसा होती थी, वहां अब विकास और विश्वास का माहौल बन रहा है।प्रधानमंत्री ने ‘हथियार वाले नक्सलवाद’ के साथ-साथ वैचारिक प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि देश को हिंसा की ओर धकेलने वाली मानसिकता को पहचानना और अलग-थलग करना आवश्यक है।
राष्ट्रीय सुरक्षा को नई चुनौती
प्रधानमंत्री ने कहा कि सुरक्षा का अर्थ केवल सीमा की रक्षा तक सीमित नहीं है। उन्होंने तेल रिफाइनरियों और बैंकिंग क्षेत्र जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर संभावित हमलों का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक समय में देश की आंतरिक और आर्थिक सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

बाढ़ और भूस्खलन प्रभावित राज्यों के प्रति एकजुटता
प्रधानमंत्री ने देश के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सरकार प्रभावित परिवारों की पीड़ा को समझती है और उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।उन्होंने असम, केरल, उत्तराखंड और नागालैंड समेत कई राज्यों में भारी बारिश, अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित जनजीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि पूरा देश संकट की इस घड़ी में प्रभावित परिवारों के साथ खड़ा है।
विकसित भारत के लक्ष्य पर जोर
अपने संबोधन के समापन की ओर प्रधानमंत्री ने कहा कि 2047 का लक्ष्य केवल एक सपना नहीं, बल्कि मजबूत नींव पर आधारित राष्ट्रीय संकल्प है। उन्होंने पिछले एक दशक में देशवासियों द्वारा दिखाई गई क्षमता को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।प्रधानमंत्री ने कहा कि देश को अपनी सोच, संस्कृति और काम करने की गति में बदलाव लाना होगा। उनका संदेश था कि जिन कार्यों को पूरा होने में पहले दशकों लगते थे, उन्हें अब कुछ वर्षों में पूरा करने की क्षमता भारत को विकसित करनी होगी। उन्होंने विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयास, आत्मनिर्भरता, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, ऊर्जा सुरक्षा, युवा शक्ति और राष्ट्रीय संकल्प के आधार पर भारत 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल कर सकता है।

