खनन रॉयल्टी के करोड़ों के बकायेदारों पर प्रशासन का शिकंजा
टॉप 10 सूची में सात खनन कारोबारी, बकाया नहीं चुकाने पर कुर्की और नीलामी की तैयारी
रुद्रपुर । जनपद ऊधमसिंह नगर में खनन रॉयल्टी और प्रशासनिक अर्थदंड के करोड़ों रुपये बकाया छोड़ने वाले बड़े बकायेदारों पर जिला प्रशासन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। जिलाधिकारी कार्यालय में चस्पा जिले के शीर्ष 10 बकायेदारों की सूची में सात नाम खनन कारोबार से जुड़े हैं। इनके अलावा भी जिले में कई अन्य खनन कारोबारी सरकारी राजस्व के बड़े बकायेदार हैं। प्रशासन ने राजस्व वसूली प्रमाण पत्र जारी कर कुर्की और अन्य दंडात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया तेज कर दी है। ऊधमसिंह नगर की कोसी, गोला, नन्धौर, फीका और कल्याणी जैसी नदियां रेत, बजरी और बोल्डर जैसे उपखनिजों के लिए पूरे उत्तर भारत में महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। लेकिन इन्हीं क्षेत्रों में लंबे समय से अवैध खनन और रॉयल्टी चोरी की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि इससे एक ओर सरकारी राजस्व को करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है तो दूसरी ओर पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। जिला प्रशासन की सूची के अनुसार सबसे बड़े बकायेदारों में काशीपुर के दमोरा एहमदमाली निवासी दुलीचंद पर लगभग एक करोड़ 91 लाख रुपये की खनन रॉयल्टी बकाया है। इसी क्षेत्र की आनंदी सिंह पर एक करोड़ 60 लाख रुपये से अधिक, बाजपुर के रतनपुरा निवासी इकबाल पर लगभग एक करोड़ 40 लाख रुपये तथा बाजपुर के मुकंदपुर निवासी राजेंद्र सिंह और जोगेंद्र सिंह पर करीब 99 लाख 80 हजार रुपये बकाया हैं। सूची में रुद्रपुर के बगवाड़ा निवासी अमनदीप कौर पर करीब 60 लाख रुपये, काशीपुर के घोसीपुरा निवासी गिर आलम पर लगभग 60 लाख रुपये तथा बगवाड़ा निवासी कश्मीर सिंह पर करीब 42 लाख रुपये का बकाया दर्ज है। इसके अलावा सितारगंज के झनकट निवासी पूरन सिंह और प्रीतम सिंह पर लगभग 36 लाख रुपये, कोटखर्रा निवासी वक्शीश सिंह पर करीब 76 लाख 80 हजार रुपये तथा दारा सिंह पर लगभग 30 लाख पांच हजार रुपये का सरकारी बकाया है। फीका नदी क्षेत्र में अवैध खनन और रॉयल्टी उल्लंघन के मामले में अनीश अहमद और शमीम अहमद पर 16 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया था, जिसकी वसूली अभी लंबित है। वहीं खमिया नंबर चार निवासी मनमोहन सिंह पर लगभग 14 लाख नौ हजार रुपये तथा केशर सिंह पर 13 लाख 68 हजार 750 रुपये का बकाया दर्ज है। जीएन स्टोन क्रेशर पर भी अवैध भंडारण और रॉयल्टी संबंधी अनियमितताओं के मामले में 46 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया था। सूत्रों के अनुसार इनमें से कई बकायेदारों ने वसूली कार्रवाई के खिलाफ विभिन्न न्यायालयों में राहत के लिए याचिकाएं भी दायर की हैं। जिला खान अधिकारी से इस संबंध में जानकारी लेने पर उन्होंने इसे जिला प्रशासन का विषय बताते हुए विस्तृत जानकारी जिलाधिकारी कार्यालय से प्राप्त करने की बात कही। वहीं जिलाधिकारी कार्यालय के संबंधित अनुभाग से बताया गया कि मामले में अद्यतन स्थिति चार अगस्त के आसपास स्पष्ट हो सकेगी। जानकारी के अनुसार जिले के बाजपुर, काशीपुर, खटीमा, सितारगंज और किच्छा क्षेत्रों में रॉयल्टी चोरी के लिए मुख्य रूप से फर्जी रॉयल्टी प्रपत्रों का उपयोग तथा स्वीकृत सीमा से अधिक खनन और ओवरलोडिंग जैसे तरीके अपनाए जाते हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय गिरोह कथित रूप से जाली दस्तावेजों के माध्यम से बिना वैध रॉयल्टी जमा किए उपखनिजों का परिवहन करते हैं, जबकि कई स्थानों पर स्वीकृत सीमा से अधिक गहराई तक खनन किए जाने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यदि बकायेदारों ने निर्धारित समय में सरकारी धनराशि जमा नहीं की तो उनकी चल और अचल संपत्तियों की कुर्की और नीलामी की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि सरकारी राजस्व की सुरक्षा और अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए यह कार्रवाई आवश्यक है।
