46 साल बाद साधु के वेश में लौटा बेटाः मां ने एक नजर में पहचाना,भावुक मिलन देख नम हुईं आंखें
बेरीनाग (पिथौरागढ़)। जिले के बेरीनाग क्षेत्र से मां की ममता और अटूट विश्वास की एक ऐसी मार्मिक कहानी सामने आई है, जिसने पूरे क्षेत्र को भावुक कर दिया। 46 वर्ष पहले घर से लापता हुआ बेटा साधु के वेश में भिक्षा मांगते हुए अपने गांव पहुंचा तो 85 वर्षीय मां ने उसे एक नजर में पहचान लिया। चार दशक से अधिक समय बाद मां-बेटे के मिलन का दृश्य देखकर गांव वालों की आंखें भी नम हो गईं। पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिले की सीमा पर स्थित दौलीगाड़ गांव निवासी बुद्धि बल्लभ उपाध्याय वर्ष 1980 के आसपास मात्र 15 वर्ष की उम्र में घर से अचानक लापता हो गए थे। परिजनों ने उनकी काफी तलाश की, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला। समय के साथ पिता तारादत्त उपाध्याय का निधन हो गया, लेकिन मां नंदी देवी ने बेटे के लौटने की आस कभी नहीं छोड़ी। गुरुवार को एक साधु भिक्षा मांगते हुए उनके घर पहुंचा। नंदी देवी ने उसकी आवाज सुनी और कुछ देर तक उसे गौर से देखती रहीं। अचानक उन्हें एहसास हुआ कि यह साधु कोई और नहीं बल्कि उनका बिछड़ा बेटा बुद्धि बल्लभ है। इसके बाद मां ने बेटे को गले लगा लिया और दोनों फूट-फूट कर रो पड़े। बुद्धि बल्लभ ने बताया कि घर छोड़ने के बाद उन्होंने विभिन्न स्थानों पर काम किया और बाद में आध्यात्मिक जीवन अपना लिया। हरिद्वार में समय बिताने के बाद वह राजस्थान के बीकानेर पहुंचे, जहां एक मंदिर में रहकर साधु जीवन व्यतीत करने लगे। इसी दौरान उन्होंने अपना नाम बदलकर बुद्धनाथ रख लिया। वर्तमान में उनकी 12 फीट से अधिक लंबी जटाएं हैं और वे साधु के रूप में जीवन यापन कर रहे हैं। मां-बेटे के पुनर्मिलन की खबर पूरे क्षेत्र में तेजी से फैल गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण उनसे मिलने पहुंचे और उनका आशीर्वाद लिया। बुद्धनाथ ने अपने रिश्तेदारों और परिजनों को भी पहचान लिया तथा परिवार की पुरानी यादों को ताजा किया। उन्होंने बताया कि वह कुछ दिन अपनी मां के साथ बिताने के बाद वापस बीकानेर लौट जाएंगे। यह कहानी एक मां के अटूट विश्वास, ममता और बेटे की घर वापसी की ऐसी मिसाल बन गई है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। 46 वर्षों का लंबा इंतजार आखिरकार समाप्त हुआ और मां की उम्मीद सच साबित हुई।
मेरा बेटा जरूर लौटेगा.. 85 वर्षीय नंदी देवी वर्षों से हर मिलने वाले से अपने बेटे के बारे में पूछती थीं। परिवार और गांव के लोग उम्मीद छोड़ चुके थे, लेकिन मां को विश्वास था कि उनका बेटा एक दिन जरूर लौटेगा। गुरुवार को उनका यह विश्वास सच साबित हुआ और 46 साल बाद बेटे को सामने देखकर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
