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पर्यावरण संरक्षण में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की भूमिका पर संगोष्ठी आयोजित

जन-सहभागिता और वैज्ञानिक तकनीक के समन्वय पर जोर, यूसैक में आयोजित हुआ कार्यक्रम
देहरादून । विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर उत्तराखंड अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र ;यूसैक में एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की भूमिका पर विस्तृत चर्चा की गई। इस कार्यशाला में वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों और यूसैक के वैज्ञानिकों ने सक्रिय रूप से प्रतिभाग किया। संगोष्ठी की संयोजक एवं यूसैक की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अरुण रानी ने बताया कि उत्तराखंड जैसे संवेदनशील पर्वतीय राज्य में वनों, जल स्रोतों, हिमनदों और आपदा संभावित क्षेत्रों की निगरानी के लिए उपग्रह आधारित सुदूर संवेदी ;रिमोट सेंसिंगद्ध और भौगोलिक सूचना प्रणाली ;जीआईएसद्ध तकनीकों का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन आधुनिक तकनीकों के माध्यम से वनाग्नि, भूस्खलन और हिमनदों में हो रहे परिवर्तनों का वैज्ञानिक विश्लेषण संभव हो पाया है, जो राज्य सरकार की विभिन्न पर्यावरणीय योजनाओं के क्रियान्वयन में सहायक सिद्ध हो रहा है। यूसैक के वैज्ञानिक डॉ. गजेन्द्र सिंह ने उत्तराखंड की समृद्ध जैव विविधता और स्थानीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान पर प्रस्तुति दी। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनजातियां और स्थानीय समाज सदियों से प्रकृति को अपनी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा मानकर उनका संरक्षण करते आए हैं। उन्होंने वैज्ञानिक अध्ययनों के साथ-साथ स्थानीय सामुदायिक ज्ञान को एकीकृत करने पर जोर दिया। यूसैक की वैज्ञानिक डॉ. सुषमा गैरोला ने मानव जनित कूड़े की डम्पिंग साइट्स के चिर्ीिंकरण के लिए रिमोट सेंसिंग और जीआईएस तकनीकों के अनुप्रयोग के बारे में जानकारी दी। दूसरे सत्र में वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के सहायक आचार्य डॉ. सूरज ने बढ़ते शहरीकरण और कंक्रीट के निर्माण के कारण भूजल पुनर्भरण में आ रही कमी पर चिंता जताई। वहीं, डॉ. सुरभि भट्ट ने पॉलिथीन और रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग से मिट्टðी और जल स्रोतों को होने वाले नुकसान के प्रति सचेत किया। उन्होंने वर्मी कंपोस्ट और जैविक खाद के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के सहायक आचार्य डॉ. परितोष ने नागरिकों से वृक्षारोपण और प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की अपील की। कार्यक्रम में यूसैक के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. प्रियदर्शी उपाध्याय, प्रशासनिक अधिकारी आर.एस. मेहता, वैज्ञानिक डॉ. नीलम रावत, डॉ. आशा थपलियाल और पुष्कर कुमार सहित कई विशेषज्ञों ने पर्यावरण संरक्षण हेतु अपने विचार साझा किए। अंत में यूसैक परिसर में अतिथियों और प्रतिभागियों द्वारा पौधारोपण किया गया। इस अवसर पर शशांक लिंगवाल, डॉ. दिव्य उनियाल, देवेश कपरवान और मीन पंत सहित यूसैक के समस्त कार्मिक एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।

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