आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहा था सागर का वसूली नेटवर्क ?
आका के गिरेबान तक नहीं पहुंचे पुलिस के हाथ तो अधूरी मानी जाएगी कार्रवाई
रुद्रपुर(उद ब्यूरो)। जनपद उधमसिंहनगर के रूद्रपुर में बहुचर्चित वसूली का मामला एक बार फिर सुर्खियों में छा गया है। डंपर चालकों से कथित अवैध वसूली के आरोप में भाजपा से निष्कासित नेता विकास सागर और उसके साथियों की गिरफ्तारी के बाद भले ही पुलिस अपनी पीठ थपथपा रही हो, लेकिन इस पूरे प्रकरण से जुड़े कई बड़े सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर विकास सागर किसके संरक्षण में यह कथित वसूली नेटवर्क चला रहा था और लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई में इतनी देरी क्यों हुई? डंपर चालकों और वाहन स्वामियों की ओर से पिछले कई महीनों से अवैध वसूली की शिकायतें सामने आ रही थीं। कई लोगों ने पुलिस और प्रशासन को तहरीरें भी दीं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या विकास सागर को किसी प्रभावशाली व्यक्ति या राजनीतिक संरक्षण का लाभ मिल रहा था, जिसके कारण शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया। मामले को और गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि गिरफ्रतारी के बाद एक कथित ऑडियो भी चर्चा का विषय बना हुआ है। इस ऑडियो में विकास सागर पर कथित तौर पर यह कहते हुए सुना जा रहा है कि वसूली की रकम विभिन्न स्तरों तक पहुंचाई जाती है। हालांकि ऑडियो की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन इसके सामने आने के बाद मामले ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि पुलिस की जांच केवल विकास सागर और उसके दो-तीन साथियों तक सीमित रहती है, तो इसे अधूरी कार्रवाई माना जाएगा। क्योंकि जिस स्तर पर वसूली के आरोप सामने आए हैं, वहां बिना किसी मजबूत संरक्षण और नेटवर्क के लंबे समय तक ऐसा कथित खेल चल पाना आसान नहीं माना जाता। सबसे अहम सवाल यह भी है कि जब शिकायतकर्ता लगातार तहरीरें दे रहे थे, तब पुलिस ने तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं की? क्या जांच में लापरवाही बरती गई या फिर किसी दबाव के चलते कार्रवाई को टाला जाता रहा? यदि शिकायतें पहले से पुलिस के संज्ञान में थीं, तो फिर अचानक हुई कार्रवाई के पीछे क्या वजह रही? पुलिस ने विकास सागर को गिरफ्रतार कर मोबाइल फोन समेत अन्य साक्ष्य बरामद करने का दावा किया है। लेकिन अब लोगों की निगाह इस बात पर टिकी है कि जांच केवल आरोपियों तक सीमित रहती है या फिर उन लोगों तक भी पहुंचती है, जिनके संरक्षण में कथित तौर पर यह पूरा वसूली तंत्र संचालित हो रहा था। जनता के बीच यह चर्चा आम है कि पुलिस की वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी, जब जांच वसूली के कथित नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचेगी। लोगों को इंतजार है कि आखिर विकास सागर के पीछे कौन था, उसे संरक्षण कौन दे रहा था और कार्रवाई में देरी क्यों हुई। इन सवालों के जवाब ही इस पूरे मामले की सच्चाई सामने ला सकेंगे।
डंपर वसूली प्रकरण में आका को लेकर जनता में चर्चाएं तेज
रुद्रपुर। डंपर वसूली प्रकरण में विकास सागर की गिरफ्तारी के बाद शहर में उसके कथित संरक्षकों को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। लोगों के बीच सवाल उठ रहे हैं कि आखिर किसके संरक्षण में विकास सागर इतना लंबा वसूली नेटवर्क संचालित कर रहा था और शिकायतों के बावजूद उस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। चर्चा इस बात की भी है कि यदि विकास सागर के खिलाफ पहले से शिकायतें मिल रही थीं, तो उसके हौसले इतने बुलंद कैसे रहे। आमजन का मानना है कि मामले की सच्चाई तभी सामने आएगी, जब जांच कथित वसूली नेटवर्क के पीछे मौजूद संरक्षण देने वालों तक पहुंचेगी। शहर में यह भी चर्चा है कि विकास सागर की गिरफ्रतारी जांच का अंत नहीं, बल्कि शुरुआत है। अब लोगों की निगाह इस बात पर टिकी है कि पुलिस इस मामले में केवल गिरफ्रतार आरोपियों तक सीमित रहती है या फिर पूरे नेटवर्क और उसके कथित आकाओं तक भी पहुंचती है।
पुलिस पर भी उठ रहे सवाल
रुद्रपुर। वसूली प्रकरण में विकास सागर की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है। लोगों का कहना है कि पिछले कई महीनों से डंपर चालकों द्वारा अवैध वसूली की शिकायतें की जा रही थीं और तहरीरें भी दी गई थीं, लेकिन समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे यह सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर कार्रवाई में इतनी देरी क्यों हुई। चर्चा है कि यदि मामले को पहले ही गंभीरता से लिया जाता तो कथित वसूली का नेटवर्क इतना लंबा नहीं चल पाता। अब नजर इस बात पर है कि पुलिस आगे क्या कार्रवाई करती है।
