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फर्जी शस्त्र लाइसेंस गिरोह पर एसटीएफ का बड़ा प्रहार : काशीपुर से पार्षद सहित तीन गिरफ्तार

तीन सेमी ऑटोमैटिक पिस्टल, 65 कारतूस बरामद
काशीपुर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ‘अपराध मुक्त उत्तराखंड’ विजन के तहत स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और ऊधमसिंह नगर पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए फर्जी शस्त्र लाइसेंस के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। काशीपुर क्षेत्र से तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से तीन अवैध सेमी ऑटोमैटिक पिस्टल, 65 कारतूस तथा तीन कूटरचित शस्त्र लाइसेंस बरामद किए गए हैं। एसटीएफ द्वारा लगभग एक माह तक की गई गोपनीय जांच के बाद गुरुवार को काशीपुर कोतवाली में उत्तर प्रदेश से निर्गत दर्शाए गए 10 संदिग्ध शस्त्र लाइसेंस धारकों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया गया था। इसी मुकदमे की विवेचना के दौरान देर रात यह बड़ी कार्रवाई की गई। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि राज्य में बाहरी राज्यों से स्थानांतरित होकर आए शस्त्र लाइसेंसों की व्यापक जांच की जा रही है। जांच में सामने आया कि नौशाद हुसैन समेत 10 व्यक्तियों ने शाहजहांपुर (उत्तर प्रदेश) से जारी दर्शाए गए लाइसेंसों के आधार पर काशीपुर स्थित गन हाउस से हथियार खरीदे थे। एसटीएफ ने संबंधित लाइसेंसों और अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद शाहजहांपुर जिलाधिकारी कार्यालय से सत्यापन कराया। जांच में खुलासा हुआ कि जिन लाइसेंसों के आधार पर हथियार खरीदे गए थे, वे संबंधित व्यक्तियों के नाम पर कभी जारी ही नहीं हुए थे। लाइसेंस नंबर अन्य व्यक्तियों के नाम पर पंजीकृत पाए गए, जिससे पूरे दस्तावेज फर्जी और कूटरचित सिद्ध हुए। कार्रवाई के दौरान गिरफ्तार आरोपियों में मोहल्ला थाना साबिक काशीपुर निवासी नौशाद हुसैन, चामुंडा मंदिर काशीपुर निवासी जतिन कांडपाल तथा मूल रूप से शाहजहांपुर निवासी एवं वर्तमान में काशीपुर निवासी अजीम शामिल हैं। पुलिस के अनुसार नौशाद हुसैन के कब्जे से 30 बोर की एक पिस्टल, 28 कारतूस और फर्जी लाइसेंस, जतिन कांडपाल से 32 बोर की एक पिस्टल, 18 कारतूस और फर्जी लाइसेंस तथा अजीम से 30 बोर की एक पिस्टल, 19 कारतूस और फर्जी लाइसेंस बरामद किए गए हैं। एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि राज्यभर में बाहरी राज्यों से स्थानांतरित होकर आए हजारों शस्त्र लाइसेंसों का सत्यापन अभियान जारी है। जांच में सामने आने वाले प्रत्येक मामले में सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि फर्जी शस्त्र लाइसेंस राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा हैं तथा उत्तराखंड पुलिस ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्य कर रही है। एसटीएफ ने आम जनता से भी अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति को फर्जी या संदिग्ध शस्त्र लाइसेंसों के संबंध में कोई जानकारी हो तो वह एसटीएफ को सूचित करें। सूचनाकर्ता की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी। गौरतलब है कि एसटीएफ इससे पहले भी फर्जी शस्त्र लाइसेंस से जुड़े दो मुकदमे दर्ज कर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। अभियान के तहत आगे भी व्यापक स्तर पर जांच और कार्रवाई जारी रहेगी।
एसटीएफ की जांच में सनसनीखेज खुलासा,प्रशासन में भूचाल
काशीपुर। कूट रचित दस्तावेजों के सहारे फर्जी शस्त्र लाइसेंस तैयार कर शस्त्र खरीदने के एक गंभीर मामले में एसटीएफ के इंस्पेक्टर की तहरीर के आधार पर कोतवाली पुलिस ने 10 लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया है। कुमाऊं यूनिट के एसटीएफ के इंस्पेक्टर महेंद्र पाल सिंह ने कोतवाली पुलिस को दी तहरीर में बताया कि देहरादून के एसएसपी एसटीएफ द्वारा बीते 25 फरवरी को जारी आदेश के अनुपालन में जनपद उधम सिंह नगर में उनके द्वारा अवैध शस्त्र लाइसेंसों के संबंध में जांच की जा रही थी इस दौरान उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय से फर्जी एवं कोर्ट रचित दस्तावेजों के सहारे तैयार शस्त्र लाइसेंस के जरिए काशीपुर स्थित काशीपुर गन हाउस से 10 लोगों द्वारा फर्जी लाइसेंस के जरिए शस्त्र खरीदने का हैरत अंग्रेज मामला प्रकाश में आया। गन हाउस के मलिक सौभाग्य टंडन से जांच अधिकारी ने क्रय किए गए शास्त्रें से संबंधित अभिलेख लाइसेंसों की सत्यापित प्रतियां तथा खरीद की रसीदें प्राप्त की। अभिलेखों के प्रशिक्षण में सभी शस्त्र लाइसेंसों पर संपूर्ण भारतवर्ष हेतु विद्या अंकित था। साथ ही सभी लाइसेंसों को शाहजहांपुर जिला मजिस्ट्रेट द्वारा निर्गत दर्शाया गया था। जांच अधिकारी ने जब इस संबंध में शाहजहांपुर जिला मजिस्ट्रेट से पत्रचार कर जानकारी ली तो जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय से बताया गया कि वहां से ऐसे कोई भी लाइसेंस निर्गत नहीं किए गए। बताया गया कि जिन लाइसेंस क्रमांकों का उपयोग किया गया है वह किसी और के नाम पर निर्गत किए गए हैं। काशीपुर में चल रहे इतने बड़े फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद जांच अधिकारी खुद हैरत में पड़ गए। जांच के दौरान यह भी पाया गया कि उपरोक्त सभी व्यक्तियों ने संगठित एवं योजनाबद्ध आधार कार्ड एवं अन्य अभिलेखों में स्थानीय पते के स्थान पर जनपद शाहजहांपुर उत्तर प्रदेश का पता अंकित कराकर कूटरचित दस्तावेज तैयार कराए। जांच के दौरान कुछ के लाइसेंस पोर्टल पर भी प्रदर्शित पाए गए जिसके आधार पर शस्त्रें का क्रय किया गया। एसटीएफ इंस्पेक्टर महेन्द्र पाल सिंह की तहरीर के आधार पर कोतवाली पुलिस ने उक्त 10 लोगों के खिलाफ बीएनएस की धारा 111, 3(5), 318(4), 336(3), 338, 340, 61(2) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया।

फर्जीवाड़े का गढ़ बन चुका है काशीपुर
पुलिस व प्रशासन की लचर कार्य प्रणाली के कारण काशीपुर पिछले कुछ समय से धोखाधड़ी व फर्जीवाड़े का गढ़ बन चुका है। यहां धोखाधड़ी व फर्जीवाड़ा करने वाले तमाम सफेदपोश ऐसे माफिया सक्रिय हैं जिन पर पहले से ही दर्जनों गंभीर मामले पंजीकृत है। मजे की बात यह है कि कानून की जकड़ मजबूत होने के बावजूद यह माफिया खुले आम फर्जीवाड़ा कर रहे हैं। इसमें से कुछ ऐसे हैं जिनका प्रशासनिक अधिकारियों के बीच उठना बैठना भी है।
ये हैं फर्जीवाड़े के असली हीरोः नौशाद हुसैन पुत्र लियाकत हुसैन निवासी मौहल्ला थाना साबिक, काशीपुर।, मौ- नसीम पुत्र नन्हें खान निवासी लक्ष्मीपुर पट्टðी, काशीपुर,मौ- दानिश उर्फ दानू पुत्र छुट्टðन निवासी सरवरखेड़ा, काशीपुर, सौरभ अग्रवाल पुत्र राकेश अग्रवाल निवासी चामुंडा, काशीपुर, विशाल राजपूत पुत्र लखेंद्र कुमार राजपूत निवासी पुंवाया, हाल निवासी काशीपुर, गुरताज सिंह पुत्र सुखविंदर सिंह निवासी मेहरोत्र फार्म, जतिन कांडपाल पुत्र पूरन चन्द्र कांडपाल निवासी चामुंडा मंदिर, काशीपुर, मनजोत सिंह पुत्र त्रिलोक सिंह निवासी ग्राम नत्थापुर, थाना पुवांया, जनपद शाहजहाँपुर (उ-प्र-), हाल निवासी काशीपुर, अजीम पुत्र नन्हें पहलवान निवासी ग्राम एवं पोस्ट सिंधौली, जनपद शाहजहाँपुर (उ-प्र-), हाल निवासी काशीपुर , गौरव अग्रवाल पुत्र राकेश अग्रवाल निवासी चामुंडा, काशीपुर

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